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सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया जिसके तहत मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला मंदिर परिसर को प्राचीन वागदेवी (मां सरस्वती) मंदिर घोषित करने का फैसला किया गया था।

14 जुलाई 2026 को 06:14 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया

सौजन्य से:- Navbharat Times

हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक से इनकार

- सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला मंदिर परिसर को प्राचीन वागदेवी (मां सरस्वती) मंदिर घोषित करने के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतरिम व्यवस्था दी है।

- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र, एएसआई, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य हिंदू पार्टियों को नोटिस दिया है।

- सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि शुक्रवार को दिन के 1 बजे से 3 बजे तक नमाज के लिए अलग से जगह की तलाश की जाए।

- हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती वाली याचिका पर अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया है।

- सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे किसी भी आदेश से बचने पर जोर दिया, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो या सांप्रदायिक तनाव पैदा हो।

बहुत ही संवेदनशील मामला

सु्प्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद पर कहा है कि 'ये बहुत ही संवेदनशील मामले हैं, इस्तेमाल किए जाने वाले हर एक्सप्रेशन के प्रति बहुत ही सावधानी की जरूरत है।' सुप्रीम कोर्ट इस मामले में तीन हफ्ते बाद आगे की सुनवाई करेगा।विवाद के समाधान के लिए तैयार

न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों से कहा कि 'दोनों पक्षों को धैर्य रखना होगा, भोजशाला विवाद के समाधान के लिए रोजाना आधार पर सुनवाई के लिए तैयार हैं।'मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर मानने और हिंदू समुदाय को विशेष पूजा अधिकार देने का फैसला सुनाया था। जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, काजी मोइनुद्दीन की ओर से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की गई। यह मामला डायरी नंबर 32281/2026 के रूप में दर्ज हुआ। अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक से इनकार कर दिया।सुप्रीम कोर्ट में दी गई है हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती

यह याचिका मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ के उस फैसले को चुनौती देती है, जो भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद में 15 मई को सुनाया गया था। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति और हिंदू मंदिर माना था। कोर्ट ने कहा था कि हिंदू समुदाय का पूजा का अधिकार कभी समाप्त नहीं हुआ।एएसआई की व्यवस्था को हाई कोर्ट ने नकारा था

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि परिसर में नमाज की अनुमति देने वाली 7 अप्रैल 2003 की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की व्यवस्था स्थल के मूल स्वरूप के अनुरूप नहीं थी। इसके साथ ही कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार देते हुए मुस्लिम समुदाय के लिए अलग स्थान पर मस्जिद निर्माण हेतु वैकल्पिक जमीन देने पर विचार करने की बात कही थी। अदालत ने अपने फैसले में 2024 के पुरातात्विक सर्वेक्षण का भी उल्लेख किया था, जिसमें संस्कृत शिलालेख, हवन कुंड और हिंदू मंदिर वास्तुकला से जुड़े कई प्रमाण मिलने की बात कही गई थी।भोजशाला परिसर में पूजा को मिली थी अनुमति

फैसले के बाद एएसआई ने 16 मई 2026 को नया आदेश जारी कर हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में पूजा और मां सरस्वती से जुड़े अध्ययन कार्यों के लिए बिना रोक-टोक प्रवेश की अनुमति दी थी। हालांकि, संरक्षित स्मारक होने के कारण प्रशासनिक नियंत्रण एएसआई के पास ही रहेगा। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह प्रयास करने का भी निर्देश दिया था कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाया जाए।भोजशाला विवाद लंबे समय से मध्य भारत के सबसे संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थल 1034 ईस्वी में राजा भोज ने मां सरस्वती के मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित किया था, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां सदियों से कमाल मौला मस्जिद मौजूद है और पूर्व प्रशासनिक व्यवस्थाओं के जरिए इस स्थल की कानूनी स्थिति पहले ही तय की जा चुकी है।

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