सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता पहल विफल, ज्ञानवापी, मथुरा और संभल के मंदिर विवाद आगे अदालत में
सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता पहल विफल होने के बाद देश में चल रहे तीन सबसे बड़े मंदिर विवाद - ज्ञानवापी, मथुरा और संभल - अब नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेंगे। हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने मध्यस्थता से इनकार किया है, क्योंकि उन्होंने महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक प्रश्नों का उल्लेख किया है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
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सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता पहल क्यों हुई और पक्षकारों ने क्यों ठुकराया?
देश में चल रहे तीन अन्य प्रमुख विवाद जिनमें वाराणसी का ज्ञानवापी, मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद का विवाद शामिल हैं, लगता है सुप्रीम कोर्ट की प्राथमिकता सूची में हैं। इन विवादों को जल्द सुलझाने की उम्मीद के साथ सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने 'समाधान समारोह 2026' के तहत सहमति आधारित विवाद निपटारे की पहल की थी। लेकिन ज्ञानवापी, मथुरा और संभल मामलों के प्रमुख पक्षकारों ने इस विकल्प को स्वीकार नहीं किया। दोनों पक्षों का कहना है कि इन विवादों में महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक प्रश्न जुड़े हैं, जिनका समाधान केवल अदालत के फैसले से ही संभव है। आपको बता दूं कि मध्यस्थता पूरी तरह स्वैच्छिक प्रक्रिया होती है और किसी भी पक्ष पर इसे स्वीकार करने का दबाव नहीं डाला जा सकता।तीनों मंदिर विवादों का कानूनी आधार और वर्तमान स्थिति
1. ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद का निर्माण प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर के अवशेषों पर हुआ था, जबकि मुस्लिम पक्ष इन दावों का विरोध करता है और Places of Worship Act, 1991 का हवाला2. मथुरा विवाद में हिंदू पक्ष शाही ईदगाह परिसर को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि का हिस्सा बताता है और 1968 के समझौते की वैधता पर प्रश्न उठाता है। दूसरी ओर, मस्जिद प्रबंधन इस समझौते और मौजूदा कानूनों के आधार पर अपना पक्ष रख रहा है
3. संभल में हिंदू पक्ष के अनुसार प्राचीन 'हरिहर मंदिर' (श्री हरि मंदिर) को तोड़कर संभल की 'शाही जामा मस्जिद' बनाई गई थी। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद मुगल शासक बाबर द्वारा 16वीं शताब्दी में एक प्राचीन 'हरिहर मंदिर' (श्री हरि मंदिर) को तोड़कर बनाई गई थी। वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद हमेशा से इबादत की जगह रही है। संभल विवाद में याचिका के आधार पर अदालत द्वारा कराए गए सर्वे के बाद व्यापक तनाव और हिंसा हुई थी।
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मध्यस्थता से इनकार के बाद आगे की राह क्या
इन मामलों में चूंकि दोनों पक्षों ने मध्यस्थता से इनकार कर दिया है, इसलिए उम्मीद है कि अब सभी विवाद नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट संबंधित याचिकाओं, सर्वे रिपोर्ट, पूजा-अधिकार और कानून की व्याख्या से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई जारी रखेगा। अदालत का अंतिम फैसला केवल इन तीन मामलों तक सीमित नहीं रहेगा, देश में चल रहे अनेकों धार्मिक स्थलों से जुड़े भविष्य के मुकदमों पर भी प्रभाव डाल सकता है। दरअसल, ये सभी मामले अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए न्यायालय की प्रत्येक टिप्पणी और आदेश पर देशभर की नजर बनी हुई है।Banke Bihari Temple Case: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, मंदिर प्रबंधन विवाद पर नजर
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