अदालत ने कहा, सरकार की आलोचना देश के खिलाफ युद्ध नहीं
पुणे की सत्र अदालत ने एनसीपी (एसपी) के पदाधिकारी महादेव बलगुडे को जमानत देते हुए कहा कि सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना देश के खिलाफ युद्ध नहीं है। अदालत ने कहा कि सरकारी नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाना सार्वजनिक विमर्श और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a568811d4c267b43b0e4706","slug":"pune-court-grants-bail-to-ncp-sp-leader-says-criticism-govt-and-cm-fadnavis-not-waging-war-against-country-2026-07-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharashtra: 'सरकार या CM की आलोचना देश के खिलाफ युद्ध नहीं', अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए और क्या कहा?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Maharashtra: 'सरकार या CM की आलोचना देश के खिलाफ युद्ध नहीं', अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए और क्या कहा?
Wed, 15 Jul 2026 12:39 AM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, पुणे
पीटीआई, पुणे
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 15 Jul 2026 12:39 AM IST
सार
पुणे की एक सत्र अदालत ने एनसीपी (एसपी) के पदाधिकारी महादेव बलगुडे को जमानत देते हुए कहा कि सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना मात्र को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसा नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि सरकारी नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाना सार्वजनिक विमर्श और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है।
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पुणे की एक सत्र अदालत ने मंगलवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के एक पदाधिकारी को जमानत देते हुए कहा कि केवल सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना नहीं माना जा सकता। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी.डी. कुलकर्णी ने एनसीपी (एसपी) के पदाधिकारी महादेव बलगुडे की जमानत याचिका मंजूर करते हुए कहा कि हर नागरिक को सरकार के कामकाज पर टिप्पणी करने, उसकी सराहना करने और आलोचना करने का अधिकार है।
शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रमुख महादेव बलगुडे को इस साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। उन पर सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कथित रूप से मॉर्फ की गई तस्वीरें प्रसारित करने और नक्सलियों के प्रति सहानुभूति जताने वाली सामग्री पोस्ट करने का आरोप है।
कोर्ट ने कहा- यह सार्वजनिक विमर्श के दायरे में
बलगुडे पर अन्य धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 भी लगाई गई थी। यह धारा जानबूझकर या जानकारी होते हुए भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से संबंधित है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले के दस्तावेजों से पता चलता है कि आरोपी ने कुछ मामलों में जांच प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं के कामकाज पर सवाल उठाए थे। यह सार्वजनिक विमर्श के दायरे में आता है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा, "रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा की या उसके लिए उकसाया हो अथवा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कोई कार्य किया हो।" न्यायाधीश ने यह भी कहा कि मौजूदा मामले में बीएनएस की धारा 152 लागू होने का सवाल "बहस का विषय" है। साथ ही आरोपी पर लगाई गई अन्य धाराएं जमानती हैं।
कई शर्तों के साथ दी जमानत
अदालत ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में आरोपी से आगे हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है। जमानत देते हुए अदालत ने बलगुडे को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक या दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने, जांच अधिकारी को अपना आवासीय पता और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने तथा अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाने का भी निर्देश दिया।
बलगुडे की ओर से पेश अधिवक्ता समीर शेख ने दलील दी कि मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और सरकार की आलोचना करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के तहत संरक्षित है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी से अब कुछ भी बरामद किया जाना शेष नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने सोशल मीडिया पोस्ट में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और राज्य के खिलाफ अपराध किए हैं।
विज्ञापन
शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रमुख महादेव बलगुडे को इस साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। उन पर सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कथित रूप से मॉर्फ की गई तस्वीरें प्रसारित करने और नक्सलियों के प्रति सहानुभूति जताने वाली सामग्री पोस्ट करने का आरोप है।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा- यह सार्वजनिक विमर्श के दायरे में
बलगुडे पर अन्य धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 भी लगाई गई थी। यह धारा जानबूझकर या जानकारी होते हुए भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से संबंधित है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले के दस्तावेजों से पता चलता है कि आरोपी ने कुछ मामलों में जांच प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं के कामकाज पर सवाल उठाए थे। यह सार्वजनिक विमर्श के दायरे में आता है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा, "रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा की या उसके लिए उकसाया हो अथवा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कोई कार्य किया हो।" न्यायाधीश ने यह भी कहा कि मौजूदा मामले में बीएनएस की धारा 152 लागू होने का सवाल "बहस का विषय" है। साथ ही आरोपी पर लगाई गई अन्य धाराएं जमानती हैं।
कई शर्तों के साथ दी जमानत
अदालत ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में आरोपी से आगे हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है। जमानत देते हुए अदालत ने बलगुडे को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक या दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने, जांच अधिकारी को अपना आवासीय पता और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने तथा अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाने का भी निर्देश दिया।
बलगुडे की ओर से पेश अधिवक्ता समीर शेख ने दलील दी कि मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और सरकार की आलोचना करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के तहत संरक्षित है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी से अब कुछ भी बरामद किया जाना शेष नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने सोशल मीडिया पोस्ट में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और राज्य के खिलाफ अपराध किए हैं।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट में CJI को भद्दे शब्द, अब जस्टिस सूर्यकांत ने ही दिया जवाब, देखें क्या कहा

दंगाईयों को 20 वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ठहराया दोषी, आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का केस

मधुबनी दोहरे हत्याकांड मामले में दोषी को 3 साल की सजा

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की खिंचाई की, कहा- न्यायाधीशों को संवेदनशील रहना होगा

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: तमिलनाडु में गौहत्या पर हाई कोर्ट के आदेश पर रोक

न्यायिक पहुँच 24/7: सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा एसओपी पर

ब्रिटेन में 'ग्रूमिंग गैंग' के मुखिया को देश से बाहर निकालने के लिए कानून में बदलाव

महिलाओं को जागरूक करने के लिए पुलिस ने चलाया अभियान
ताज़ा ख़बरें
- दिल्ली हाई कोर्ट में 'भूलने का अधिकार' को चुनौती
- राजस्थान के 3 अधिकारियों पर कार्रवाई, सरकार ने दिया जवाबदेही का संदेश!
- सिंगापुर की अदालत का बड़ा फैसला: ब्लूमबर्ग को मंत्रियों को 230,000 एसजीडी का हर्जाना देना होगा
- सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना, रणवीर अल्लाहबादिया और आशीष चंचलानी को फटकार लगाई
- गुजरात उच्च न्यायालय ने अहमदाबाद विस्फोटों के 38 दोषियों को मौत की सजा दी, 11 को आजीवन कारावास
- सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए यौन अपराध रिपोर्ट में दिशानिर्देश अपलोड करने का आदेश दिया
- बॉम्बे हाई कोर्ट के हाल के फैसले: नाबालिगों के अधिकारों से लेकर भूमि मामलों तक
- सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना को जमकर फटकारा, 3 लाख रुपये जुर्माना लगाया

