केरल हाईकोर्ट ने बोला - अनुसूचित जनजाति आयोग अदालत नहीं है
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुसूचित जनजाति आयोग कोई अदालत नहीं है, और इसकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं। इसी कारण हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस को निर्देश दिया है कि वे कोई भी कार्रवाई के बिना एक लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित करें

सौजन्य से:- Hindustan
अनुसूचित जनजाति आयोग अदालत नहीं है : हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस को निर्देश दिया कि प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान एक लड़की को कोर्ट के आदेश के बिना किसी और को न सौंपा जाए। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग कोई अदालत नहीं है और उसकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं, इसीलिए लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान चर्चा में आई लड़की को कोर्ट के आदेश के बिना मध्य प्रदेश पुलिस या किसी और को न सौंपा जाए। अदालत ने आगे कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग कोई अदालत नहीं है। यह निर्देश जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने तब जारी किया जब कोर्ट को बताया गया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने केरल के राज्य पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया है कि वे लड़की को तुरंत मध्य प्रदेश पुलिस को सौंप दें। हाईकोर्ट ने कहा कि आयोग कोई कोर्ट नहीं है।
आयोग के पास केवल सिफारिश करने की शक्तियां हैं। इसलिए, आयोग किसी व्यक्ति के जीवन के अधिकार से जुड़ा आदेश नहीं जारी कर सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत का मानना है कि याचिकाकर्ता को अपनी जान का जो खतरा महसूस हो रहा है, वह वास्तविक है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पुलिस (जिसमें कोच्चि शहर के पुलिस कमिश्नर भी शामिल हैं, जिनके अधिकार क्षेत्र में लड़की रहती है) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दे कि जब तक उसकी जान की सुरक्षा की याचिका का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक उसे हाईकोर्ट के आदेश के बिना और उसकी मर्जी के खिलाफ वहां से न हटाया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य और पुलिस लड़की की उचित सुरक्षा सुनिश्चित करे।
इस खबर पर आपकी क्या राय है?
लेखक के बारे में
Hindustan | Bureauहिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में 'हिन्दुस्तान' विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्यों सहित देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्करण प्रकाशित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपरि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद विस्तार से न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।
और पढ़ें
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक घोटाला मामले में पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को क्लीन चिट दे दी

सुप्रीम फटकार! अब पहले पर्यावरण मंजूरी लेना होगा

सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' के प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार दिया

संदिग्ध विदेशी पर कानूनी शिकंजा कसता, पहचान छिपाने की आशंका

सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा झटका उद्योगों को, पर्यावरण मंजूरी बिना शुरू नहीं होगा कोई प्रोजेक्ट

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग खारिज की, कहा ई-फाइलिंग पहुंच की अनुमति देती है

महाराजगंज में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, तैयारियां शुरू

विशेष अदालतें: भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली का परीक्षण
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, वन विभाग ने जारी किए निर्देश
- भूमि कानून में संशोधन पर राष्ट्रीय सभा की स्थायी समिति की राय
- पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ को हाईकोर्ट की फटकार, मानसिक पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए देरी पर सवाल
- याचिका केवल अपने कथनों पर खारिज की जा सकती है: आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग से कहा- शिक्षकों को 'असहनीय' बोझ न दें
- मोहाली लोक अदालत की गमाडा को सख्त चेतावनी
- अहमदाबाद एयर इंडिया दुर्घटना जांच: अदालत 13 अक्टूबर को आगे की सुनवाई पर
- लोकसभा में पास हुई एंटी परीक्षा लीक बिल: हंगामे के बीच संसद ने ली बड़ी बेदागता

