सुप्रीम कोर्ट ने SAVE डेटाबेस के इस्तेमाल को मंजूरी दी, ट्रम्प प्रशासन को राहत
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार के SAVE (Systematic Alien Verification for Entitlements) डेटाबेस को मतदाता सूची में नागरिकता जांच के लिए राज्यों द्वारा उपयोग की अनुमति दी, जिससे आगामी नवंबर चुनावों से पहले एक बड़ा राहत प्रदान हुआ। तीन उदारवादी जजों ने सार्वजनिक रूप से असहमति जताई, जबकि यह उपयोग वैकल्पिक है और DHS ने स्वयं डेटा की पूर्णता पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम मध्यावधि चुनावों पर सीमित प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि मौजूदा नियम कई राज्यों को चुनाव से 90 दिन पहले सूची में से नाम हटाने से रोकते हैं।

सौजन्य से:- AajTak
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत देते हुए नागरिकता सत्यापन के लिए इस्तेमाल होने वाले SAVE डेटाबेस में बदलाव की अनुमति दे दी. अदालत के इस आदेश से राज्यों को मतदाता सूची में दर्ज लोगों की नागरिकता की पुष्टि करने के लिए फिलहाल इस सिस्टम का इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है.
यह फैसला नवंबर में होने वाले चुनावों से पहले आया है. कोर्ट के तीन उदारवादी रुझान वाले जजों ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई. आपातकालीन आदेश के तहत राज्य अब डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के सिस्टमेटिक एलियन वेरिफिकेशन फॉर एंटाइटलमेंट्स यानी SAVE कार्यक्रम का इस्तेमाल मतदाताओं की पात्रता की पुष्टि करने के लिए कर सकेंगे. हालांकि, राज्यों के लिए SAVE कार्यक्रम का इस्तेमाल स्वैच्छिक है.
राज्यों के ऊपर भी निर्भर
चुनाव कानून एक्सपर्ट डेविड बेकर ने कहा कि आगामी मध्यावधि चुनावों पर इसका तत्काल प्रभाव सीमित रहने की संभावना है. उन्होंने बताया कि मौजूदा कानून ज्यादातर राज्यों को चुनाव से 90 दिन पहले मतदाता सूची से व्यवस्थित तरीके से नाम हटाने से रोकता है.
डेविड बेकर ने कहा कि कार्यक्रम स्वैच्छिक है और DHS खुद मान चुका है कि इसका डेटा पूरी तरह सही नहीं है. ऐसे में राज्य मतदाता सूचियों को अपडेट रखने के लिए अन्य माध्यमों के साथ इस सिस्टम का इस्तेमाल कर सकते हैं.
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सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को राहत
सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने फेडरल जज के जून के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें ट्रंप प्रशासन के नए रूप से तैयार किए गए SAVE सिस्टम को अवैध बताया गया था. अमेरिकी जिला अदालत की जज स्पार्कल एल. सुकनानन ने इस सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए कहा था कि इससे अमेरिकियों के निजता के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है और मतदाता सूची से गलत तरीके से लोगों के नाम हटाए जा सकते हैं. इसके बाद एक फेडरल अपील अदालत ने भी उनके आदेश को बरकरार रखा था.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने कहा कि 1996 का कानून DHS को अन्य संघीय एजेंसियों से नागरिकता और इमिग्रेशन से जुड़ी जानकारी लेने की स्पष्ट अनुमति देता है. कोर्ट ने कहा कि नागरिकता की पुष्टि करने के लिए राज्यों की ओर से किए गए अनुरोधों का जवाब देना संघीय सरकार का दायित्व भी है. कोर्ट के आदेश में कहा गया कि निचली अदालत का आदेश संघीय सरकार को उस कार्यक्रम के इस्तेमाल से रोकता है, जिसे वह इस काम के लिए सबसे उपयुक्त मानती है.
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