सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के जोन‑ए में चिन्हित 16,726 अवैध या अनधिकृत इमारतों को तुरंत सील करने और उनके निर्माण को ध्वस्त करने का निर्देश दिया। इस आदेश में आवासीय, गैर‑आवासीय और मिश्रित प्रयोजन वाली संपत्तियों को शामिल किया गया है। साथ ही उल्देपुर की अवैध आवासीय कॉलोनियों की जांच के लिये पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग बनाया गया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6ab77e552a16a60909039010","slug":"supreme-court-orders-sealing-demolition-16726-illegal-structures-meerut-2026-09-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध कॉलोनियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: मेरठ में सील होंगी 16,726 संपत्तियां, अनधिकृत निर्माण गिराने के निर्देश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अवैध कॉलोनियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: मेरठ में सील होंगी 16,726 संपत्तियां, अनधिकृत निर्माण गिराने के निर्देश
Sat, 26 Sep 2026 01:42 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sat, 26 Sep 2026 01:42 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माणों के मामले में सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने जोन ए में चिन्हित 16,726 अवैध या अनधिकृत निर्माणों को सील करने और उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई का आदेश दिया है। इनमें आवासीय, गैर आवासीय और मिश्रित इस्तेमाल वाली संपत्तियां शामिल हैं। उल्देपुर में विकसित अवैध आवासीय कॉलोनियों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग बनाया गया है।
विज्ञापन
विस्तार
अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर गंभीर रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मेरठ में 16,726 संपत्तियों को सील करने और अनधिकृत निर्माणों को गिराने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में अवैध आवासीय कॉलोनियों के विकसित होने की प्रकृति की विस्तृत जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग भी गठित किया है।
चार में केवल एक जोन की रिपोर्ट में ही निकले 16 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण
पीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी गुरु प्रसाद की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट देखने के बाद कहा, “हम यह जानकर स्तब्ध और परेशान हैं कि स्थिति रिपोर्ट पढ़ने पर पता चलता है कि उल्देपुर में सैकड़ों अवैध आवासीय कॉलोनियां विकसित हो गई हैं।”
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि विभाग ने मेरठ के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण और सर्वेक्षण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर को चार जोन में बांटा गया है। इन्हें जोन ए, जोन बी, जोन सी और जोन डी नाम दिया गया है। 21 सितंबर के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जोन ए में निरीक्षण और सर्वेक्षण के लिए लगाई गई 16 टीमों ने 16,726 निर्माणों की पहचान पूरी तरह अवैध या अनधिकृत के तौर पर की है।
सुप्रीम कोर्ट का जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश
इन 16,726 निर्माणों में 12,907 आवासीय, 874 आवासीय और गैर आवासीय दोनों तरह के तथा 2,945 गैर आवासीय निर्माण शामिल हैं। अवैध निर्माण से जुड़े पुराने निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को जोन ए के सभी 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, “इस प्रक्रिया में पहला कदम कब्जाधारियों से परिसर खाली करने के लिए कहना और इन सभी परिसरों यानी 16,726 अवैध निर्माणों को सील करना है। हम इसी का निर्देश देते हैं।” अदालत ने कहा कि संभव है कि इनमें से कुछ निर्माण जर्जर स्थिति में हों और उनके गिरने से लोगों की जान जा सकती है। पीठ ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं चाहती और इसलिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने चारों जोन में भी तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अगली सुनवाई में सभी जोन की मांगी रिपोर्ट
पीठ ने यह भी कहा कि अगर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से किसी घटना में निर्दोष लोगों की जान जाती है तो इसके लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अदालत ने कहा कि स्थिति रिपोर्ट में जोन बी, जोन सी और जोन डी की स्थिति का उल्लेख नहीं है। इसलिए इन तीनों जोन में मौजूद अवैध निर्माणों की संख्या को लेकर फिलहाल अदालत के पास पूरी जानकारी नहीं है।
पीठ ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में संबंधित प्राधिकरण को जोन बी, जोन सी और जोन डी के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। अदालत ने कहा, “हालांकि, चूंकि जोन ए में अवैध निर्माण की पहचान हो चुकी है, इसलिए अब उन्हें गिराने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।”
मेरठ में अनधिकृत निर्माणों पर क्यों चिंता?
पीठ ने आगे कहा, “स्थिति रिपोर्ट से सामने आने वाली पूरी तस्वीर बेहद गंभीर है। अधिकारियों को इन अनधिकृत निर्माणों को गिराने के लिए दिन-रात काम करने की जरूरत है।” स्थिति रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों को चिंताजनक बताते हुए अदालत ने कहा, “पूरे शहर और बाहरी इलाकों में अनधिकृत या अवैध निर्माण की स्थिति अब प्राधिकरण की रिपोर्ट से ही सामने आ गई है।”
शीर्ष अदालत ने विध्वंस की प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई तक आगे की स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा। उल्देपुर के संबंध में पीठ ने कहा कि रिपोर्ट देखने से पता चलता है कि सील की गई 44 संपत्तियों के संबंधित मालिकों को जल्द से जल्द नोटिस जारी किए गए थे। अदालत ने बताया कि इन 44 में से 20 संपत्तियों को गिराया जा चुका है और उनके अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल को रोक दिया गया है।
अधिकारियों को क्यों लगाई फटकार
रिपोर्ट के अनुसार, 44 में से 38 संपत्तियों के भवन नक्शे मंजूर थे, लेकिन मालिकों ने इनमें अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त निर्माण कर लिए थे। इन संपत्तियों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया कि छह संपत्तियां प्लॉट के रूप में बेची गई थीं और उनमें बिना योजना या नक्शे की मंजूरी के अनधिकृत आवासीय और व्यावसायिक निर्माण किए गए थे।
पीठ ने आदेश दिया, “हम अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि जिन 44 संपत्तियों पर सील लगाई गई थी, उनमें बची हुई 24 संपत्तियों को भी जल्द से जल्द गिराना सुनिश्चित करें।” अदालत ने न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग का भी उल्लेख किया। आयोग यह जांच करेगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण पांच साल से अधिक समय तक निष्क्रिय क्यों रहा, जिसके कारण इन अवैध आवासीय कॉलोनियों का विकास हुआ।
आयोग यह भी जांच करेगा कि क्या मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत से इन अवैध आवासीय कॉलोनियों को विकसित किया गया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिसंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने अपने निर्देशों के तहत की गई कार्रवाई पर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में अवैध आवासीय कॉलोनियों के विकसित होने की प्रकृति की विस्तृत जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग भी गठित किया है।
विज्ञापन
चार में केवल एक जोन की रिपोर्ट में ही निकले 16 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण
पीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी गुरु प्रसाद की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट देखने के बाद कहा, “हम यह जानकर स्तब्ध और परेशान हैं कि स्थिति रिपोर्ट पढ़ने पर पता चलता है कि उल्देपुर में सैकड़ों अवैध आवासीय कॉलोनियां विकसित हो गई हैं।”
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि विभाग ने मेरठ के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण और सर्वेक्षण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर को चार जोन में बांटा गया है। इन्हें जोन ए, जोन बी, जोन सी और जोन डी नाम दिया गया है। 21 सितंबर के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जोन ए में निरीक्षण और सर्वेक्षण के लिए लगाई गई 16 टीमों ने 16,726 निर्माणों की पहचान पूरी तरह अवैध या अनधिकृत के तौर पर की है।
सुप्रीम कोर्ट का जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश
इन 16,726 निर्माणों में 12,907 आवासीय, 874 आवासीय और गैर आवासीय दोनों तरह के तथा 2,945 गैर आवासीय निर्माण शामिल हैं। अवैध निर्माण से जुड़े पुराने निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को जोन ए के सभी 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, “इस प्रक्रिया में पहला कदम कब्जाधारियों से परिसर खाली करने के लिए कहना और इन सभी परिसरों यानी 16,726 अवैध निर्माणों को सील करना है। हम इसी का निर्देश देते हैं।” अदालत ने कहा कि संभव है कि इनमें से कुछ निर्माण जर्जर स्थिति में हों और उनके गिरने से लोगों की जान जा सकती है। पीठ ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं चाहती और इसलिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने चारों जोन में भी तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अगली सुनवाई में सभी जोन की मांगी रिपोर्ट
पीठ ने यह भी कहा कि अगर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से किसी घटना में निर्दोष लोगों की जान जाती है तो इसके लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अदालत ने कहा कि स्थिति रिपोर्ट में जोन बी, जोन सी और जोन डी की स्थिति का उल्लेख नहीं है। इसलिए इन तीनों जोन में मौजूद अवैध निर्माणों की संख्या को लेकर फिलहाल अदालत के पास पूरी जानकारी नहीं है।
पीठ ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में संबंधित प्राधिकरण को जोन बी, जोन सी और जोन डी के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। अदालत ने कहा, “हालांकि, चूंकि जोन ए में अवैध निर्माण की पहचान हो चुकी है, इसलिए अब उन्हें गिराने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।”
मेरठ में अनधिकृत निर्माणों पर क्यों चिंता?
पीठ ने आगे कहा, “स्थिति रिपोर्ट से सामने आने वाली पूरी तस्वीर बेहद गंभीर है। अधिकारियों को इन अनधिकृत निर्माणों को गिराने के लिए दिन-रात काम करने की जरूरत है।” स्थिति रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों को चिंताजनक बताते हुए अदालत ने कहा, “पूरे शहर और बाहरी इलाकों में अनधिकृत या अवैध निर्माण की स्थिति अब प्राधिकरण की रिपोर्ट से ही सामने आ गई है।”
शीर्ष अदालत ने विध्वंस की प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई तक आगे की स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा। उल्देपुर के संबंध में पीठ ने कहा कि रिपोर्ट देखने से पता चलता है कि सील की गई 44 संपत्तियों के संबंधित मालिकों को जल्द से जल्द नोटिस जारी किए गए थे। अदालत ने बताया कि इन 44 में से 20 संपत्तियों को गिराया जा चुका है और उनके अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल को रोक दिया गया है।
अधिकारियों को क्यों लगाई फटकार
रिपोर्ट के अनुसार, 44 में से 38 संपत्तियों के भवन नक्शे मंजूर थे, लेकिन मालिकों ने इनमें अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त निर्माण कर लिए थे। इन संपत्तियों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया कि छह संपत्तियां प्लॉट के रूप में बेची गई थीं और उनमें बिना योजना या नक्शे की मंजूरी के अनधिकृत आवासीय और व्यावसायिक निर्माण किए गए थे।
पीठ ने आदेश दिया, “हम अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि जिन 44 संपत्तियों पर सील लगाई गई थी, उनमें बची हुई 24 संपत्तियों को भी जल्द से जल्द गिराना सुनिश्चित करें।” अदालत ने न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग का भी उल्लेख किया। आयोग यह जांच करेगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण पांच साल से अधिक समय तक निष्क्रिय क्यों रहा, जिसके कारण इन अवैध आवासीय कॉलोनियों का विकास हुआ।
आयोग यह भी जांच करेगा कि क्या मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत से इन अवैध आवासीय कॉलोनियों को विकसित किया गया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिसंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने अपने निर्देशों के तहत की गई कार्रवाई पर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को विवादास्पद नागरिकता डेटाबेस के उपयोग की स्वीकृति दी

सुप्रीम कोर्ट ने SAVE डेटाबेस के इस्तेमाल को मंजूरी दी, ट्रम्प प्रशासन को राहत

कानून का सही उपयोग: बहादुरपुर में एससी-एसटी अधिनियम पर बैठक

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की याचिका खारिज की, आदेश से नहीं थोप सकते भाषा

एपी हाई कोर्ट ने अमरावती को राजधानी मानने के बाद तीन‑राजधानी प्रस्ताव को निरर्थक घोषित किया
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं रोका SIR?
- महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह की बरी को चुनौती, दिल्ली कोर्ट में दायर की अपील
- ICU सुधार में नया कदम: कोर्ट ने बुनियादी ढाँचा 9 महीने, स्टाफिंग 6 महीने में पूरा करने का आदेश
- OBC क्रीमी लेयर के फैसले को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने दो साल की राहत मांगी
- सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जजों के भत्ते‑पेंशन कमेटी का नेतृत्व पूर्व मुख्य न्यायाधीश को दें, सुप्रीम कोर्ट ने कहा
- सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर पर नया फैसला सुनाया, सरकार ने लागू करने में दो साल का समय मांगा
- प्रधानमंत्री को अपमान करने के बयान से सेक्शन 352 BNS नहीं लागू, कर्नाटक हाई कोर्ट ने केस खारिज किया
- देवघर में कुख्यात गैंगस्टर शिबू मिश्रा का अचानक दिल का दौरा, पुलिस को मिली राहत

