सड़कों पर पशुओं से हादसों में अब मुआवजा देना होगा: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं से होने वाले हादसों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि पशुपालक को पशु की जिम्मेदारी निभानी होगी, उनके आर्थिक रूप से अनुपयोगी होने पर नहीं छोड़ना होगा। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से ऐसे हादसों के पीड़ितों को मुआवजा देने का नियम बनाने को कहा है।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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सड़कों पर पशुओं से हादसों में मुआवजा दिया जाए:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र और राज्य सरकारें इसके लिए कानूनों में संशोधन करें
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सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं से होने वाले हादसों पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा- पशुओं को नेशनल हाईवे, सड़कों और गलियों में यूं ही नहीं छोड़ सकते। वे नेचुरल स्पीड ब्रेकर नहीं हैं।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकारों से ऐसे हादसों के पीड़ितों को मुआवजा देने का नियम बनाने को कहा। साथ ही सुझाव दिया कि जरूरत हो तो इसके लिए कानूनों और नियमों में संशोधन भी किया जाए।
सांड के हमले में पति की मौत पर ₹15 लाख मुआवजा
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को यह सलाह पंजाब के संगरूर की रहने वाली निशा की याचिका पर दी। निशा के पति विजय की 21 सितंबर 2007 को सड़क पर पैदल जाते समय आवारा सांड के हमले में मौत हो गई थी।
कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि महिला को चार सप्ताह में ₹15 लाख मुआवजा दें। साथ ही कोर्ट ने कहा- हालांकि, इसे भविष्य के मामलों में नजीर नहीं माना जाएगा।
पशुपालकों को पूरे जीवन अपने पशु की जिम्मेदारी निभानी होगी
कोर्ट ने कहा- लावारिस पशुओं की समस्या का सबसे बड़ा कारण उन्हें आर्थिक रूप से अनुपयोगी होने पर छोड़ देना है। पशुपालक सिर्फ पशु पालने तक सीमित नहीं रह सकते, बल्कि उनके पूरे जीवन की जिम्मेदारी भी उनकी है।
यदि किसी कारण पशु नहीं रख सकते तो गौशाला या आश्रय गृह में सौंपें, सड़कों पर न छोड़ें। समाज उपयोगिता खत्म होने पर पशु को छोड़ देता है। वहीं, उनके दूसरे उपयोगों का विरोध करता है। यह भी समस्या की एक वजह है।
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