राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट से संपत्ति मामले को टालने को कहा गया
राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट से संपत्ति मामले को टालने को कहा गया By रुस्तम राणा | Updated: August 17, 2026 14:30 IST2026-08-17T14:30:11+5:302026-08-17T14:30:11+5:30 मुख्य न्यायाधीश सूर्य…

सौजन्य से:- Lokmat News Hindi
राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट से संपत्ति मामले को टालने को कहा गया
By रुस्तम राणा | Updated: August 17, 2026 14:30 IST2026-08-17T14:30:11+5:302026-08-17T14:30:11+5:30
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की पीठ ने कर्नाटक निवासी एस विग्नेश शिशिर को भी नोटिस जारी किया, जिन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के साथ-साथ सीबीआई और ईडी का दरवाजा खटखटाया था।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में अंतरिम राहत दी। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा कि वह फिलहाल इस मामले में आगे न बढ़े और सीबीआई तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) को निर्देश दिया कि वे हाई कोर्ट के पहले के निर्देशों के तहत कोई रिपोर्ट दाखिल न करें। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की पीठ ने कर्नाटक निवासी एस विग्नेश शिशिर को भी नोटिस जारी किया, जिन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के साथ-साथ सीबीआई और ईडी का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC से अगली सुनवाई टालने को कहा
सुप्रीम कोर्ट राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों के संबंध में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय को अपनी अगली सुनवाई उच्चतम न्यायालय के समक्ष सुनवाई की अगली तारीख तक स्थगित करने का निर्देश दिया। पीठ ने सीबीआई और ईडी से यह भी कहा कि वे उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में कोई रिपोर्ट प्रस्तुत न करें। यह मामला गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़ा है और यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष है।
कपिल सिब्बल ने मामले को 'विच-हंट' बताया
राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कार्यवाही का कड़ा विरोध किया और मामले के आधार पर सवाल उठाया। कार्यवाही के अनुसार, सिब्बल ने कहा, "यह कानून के लिए बिल्कुल अज्ञात है। यह एक विच हंटिंग प्रक्रिया है जिसे कानून द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है।" उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए एस विग्नेश शिशिर के अधिकार पर भी सवाल उठाया और कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी साख का खुलासा नहीं किया है।
सिब्बल ने आगे तर्क दिया कि सीबीआई ने अब तक केवल शिकायत का सत्यापन किया है और सवाल किया है कि अगर आरोप गंभीर थे तो जांच एजेंसियों ने स्वतंत्र कार्रवाई क्यों नहीं की।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों से सवाल किए
केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में अब तक सीबीआई और ईडी की कोई भूमिका नहीं रही है। सुनवाई के दौरान बेंच ने एजेंसियों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पूछा कि अगर आरोप गंभीर थे तो एजेंसी निष्क्रिय क्यों रही?
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या किसी शिकायत में संज्ञेय अपराध का पता चलने पर कार्रवाई करने के लिए CBI को कोर्ट के निर्देश की ज़रूरत होती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी कहा कि अगर कोर्ट कोई निर्देश जारी करने का फैसला करता है, तो उससे 'प्राकृतिक न्याय' (natural justice) के सिद्धांत का पालन करने की उम्मीद की जाती है।
याचिकाकर्ता का क्या कहना है?
इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने वाले एस. विग्नेश शिशिर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में ऑनलाइन शामिल हुए और गांधी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि मामला अभी एफआईआर से पहले के चरण में है और दावा किया कि इस चरण में आरोपी को अपनी बात रखने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता ने पहले गांधी की संपत्ति से जुड़े आरोपों की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया था।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 20 जुलाई को CBI के जवाब पर नाखुशी जताई थी और एजेंसी के एक सीनियर अधिकारी को जांच की प्रगति के बारे में विस्तार से बताते हुए व्यक्तिगत रूप से एक नया हलफनामा (affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि CBI द्वारा दाखिल हलफनामा उसके पिछले आदेश के अनुरूप नहीं था और याचिकाकर्ता की शिकायत पर हुई प्रगति को ठीक से नहीं समझाता था।
कोर्ट ने CBI के नई दिल्ली स्थित एंटी-करप्शन हेडक्वार्टर में संबंधित ज़ोन के जॉइंट डायरेक्टर या प्रमुख को व्यक्तिगत रूप से नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले की कार्यवाही सीलबंद लिफाफे में
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मामले का पूरा रिकॉर्ड सीनियर रजिस्ट्रार की सुरक्षित कस्टडी में एक सीलबंद लिफाफे में रखा जाए। मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए बेंच खुली अदालत के बजाय चैंबर में कार्यवाही कर रही थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 20 अगस्त तय की थी और केंद्र सरकार को विभिन्न विभागों और एजेंसियों - जिनमें डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग, डिपार्टमेंट ऑफ़ रेवेन्यू, मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस शामिल हैं - की ओर से विस्तृत जवाबी हलफनामे दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश का मतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की कार्यवाही फिलहाल टल जाएगी, जबकि शीर्ष अदालत हाई कोर्ट के निर्देशों को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर विचार करेगी।
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