सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी‑बांडी‑लूणी नदी के औद्योगिक प्रदूषण पर व्यापक जांच और उद्योग क्षेत्र के पुनर्स्थापन का आदेश दिया
कोर्ट ने राज्य को नदी के पास स्थित उद्योग क्षेत्रों को स्थानांतरित करने की सम्भावना का मूल्यांकन करने, तथा अवैध औद्योगिक इकाइयों के वित्तीय लेन‑देन और सप्लाई नेटवर्क की जांच करने का निर्देश दिया। सभी अनधिकृत डिस्चार्ज पॉइंट, बाईपास और पाइपलाइन को तुरंत सील या हटाने, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने और जिला‑स्तर पर सतत निगरानी व्यवस्था स्थापित करने को कहा गया।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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नदी के पास बने इंडस्ट्री-एरिया को ट्रांसफर करने पर विचार:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अवैध इंडस्ट्रीज के वित्तीय लेन-देन से लेकर पूरे नेटवर्क की जांच की जाए
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राजस्थान में जोजरी-बांडी-लूणी नदी के प्रदूषण और संरक्षण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट जस्टिस विक्रम नाथ एवं जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि नदी तंत्र को प्रभावित करने वाली समस्याएं केवल व्यक्तिगत औद्योगिक इकाइयों के उल्लंघन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे अपर्याप्त उपचार क्षमता, अवैध औद्योगिक गतिविधियां, भूमि उपयोग में अनियमितताएं और प्रभावी निगरानी की कमी जैसी व्यापक समस्याएं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने नदी के पास बने इंडस्ट्री एरिया को भी किसी और जगह ट्रांसफर करने के लिए आंकलन करने को कहा। इतना ही नहीं रेजिडेंशियल और एग्रीकल्चर जमीन पर संचालित होने वाली अवैध इंडस्ट्री यूनिट के पूरे नेटवर्क की जांच करने के लिए भी कहा हैञ
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन अवैध या अनधिकृत डिस्चार्ज पॉइंट, बाईपास व्यवस्था, मैनहोल, चैंबर, पाइपलाइन और नालियों की पहचान कर उन्हें हटाने की अनुमति दी जा चुकी है, उन्हें बिना देरी सील, इंटरसेप्ट या हटाया जाए।
इसके लिए व्यापक सर्वे पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को मौके पर कार्रवाई का भौतिक सत्यापन कर प्रत्येक 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट समिति के सामने पेश करनी होगी।
अवैध औद्योगिक इकाइयों पर होगी व्यापक कार्रवाई
कोर्ट ने कृषि एवं आवासीय भूमि पर अवैध रूप से संचालित औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसी किसी इकाई के मिलने पर केवल उस इकाई के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन, जॉब-वर्क, कच्चे माल, परिवहन और लाभार्थियों के नेटवर्क की भी जांच की जाएगी।
संबंधित भूमि पर राजस्व एवं भूमि उपयोग संबंधी कार्रवाई, मशीनरी को हटाने या जब्त करने, प्रभावित भूमि के पुनर्स्थापन और कानून के अनुसार अभियोजन की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
हर जिले में स्थायी निगरानी व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को प्रदूषण फैलाने वाली अवैध औद्योगिक गतिविधियों की रोकथाम के लिए स्थायी और जिला-स्तरीय समन्वित तंत्र स्थापित करने को कहा है। इसमें राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन, पुलिस, राजस्व, परिवहन, स्थानीय निकाय और अन्य संबंधित विभाग शामिल होंगे। नियमित निगरानी, चिन्हित नोडल अधिकारियों और समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
जोधपुर प्रदूषण नियंत्रण और अनुसंधान फाउंडेशन की ओर से अधिवक्ता ऋषभ संचेती ने पैरवी की।
पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली के निर्देश
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उल्लंघन की पूरी अवधि के लिए संबंधित औद्योगिक इकाइयों और जिम्मेदार व्यक्तियों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति निर्धारित करने और वास्तविक रूप से वसूलने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड को यह भी बताना होगा कि कितनी राशि निर्धारित हुई, कितनी वसूल की गई और कितनी राशि अभी बकाया है।
कोर्ट ने मौजूदा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के विस्तार, नए सीईटीपी की स्थापना तथा औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) को ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेएलडी) प्रणाली में अपग्रेड करने से संबंधित प्रस्तावों पर तय समयसीमा में निर्णय लेने को कहा है।
पाली के रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्वीकृत 7 एमएलडी सीईटीपी (जेएलडी) को भी तत्काल और चरणबद्ध तरीके से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें टेंडर, कार्यादेश, निर्माण, कमीशनिंग और स्थिरीकरण की प्रक्रिया को बिना अनावश्यक प्रशासनिक देरी के पूरा करना होगा।
अवैध बजरी खनन पर भी सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने नदी तल, नदी किनारों और प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित करने वाले अवैध एवं अनधिकृत बजरी/रेत खनन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खनन क्षेत्रों, लीज, अनुमत मात्रा, खनन की गहराई, पुनर्भरण और पुनर्स्थापन दायित्वों से जुड़ी पूरी जानकारी समिति को उपलब्ध कराने को कहा गया है। यह जानकारी 15 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तुत करने का निर्देश है।
जोजरी, बांडी और लूणी पर पुलों की होगी तकनीकी जांच
कोर्ट ने लूणी, जोजरी और बांडी नदी तंत्र तथा उनकी सहायक नदियों पर बने पुलों और सड़क क्रॉसिंग की व्यापक तकनीकी जांच के निर्देश भी दिए हैं। ऐसे ढांचों की पहचान की जाएगी जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डालते हैं या डाल सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अवरोधों को हटाने और भविष्य में निर्माण के दौरान नदी के प्राकृतिक प्रवाह को सुरक्षित रखने के उपाय किए जाएंगे।
औद्योगिक क्षेत्रों को स्थानांतरित करने की संभावना पर भी विचार
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लूणी, जोजरी और बांडी नदी तंत्र के बेहद नजदीक स्थित प्रदूषणकारी औद्योगिक क्षेत्रों को उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने की व्यवहार्यता का व्यापक आकलन करने को कहा है।
इस आकलन में नदी की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, उसकी वहन क्षमता, उपचार सुविधाओं की उपलब्धता, ZLD की संभावना और प्रभावित समुदायों के दीर्घकालीन हितों को ध्यान में रखा जाएगा।
राज्य को व्यापक समाधान योजना पेश करनी होगी
कोर्ट ने राजस्थान सरकार को समिति की टिप्पणियों और चिंताओं पर विचार कर व्यापक समाधान योजना को अंतिम रूप देने और उसमें स्पष्ट समयसीमा, जिम्मेदार विभाग तथा प्रगति मापने के लिए निर्धारित लक्ष्य शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को होगी।
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