दो साल से अधिक पुरानी जन्म‑मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए अब अदालत की मंजूरी अनिवार्य
एक अक्टूबर से लागू नई नियमावली के तहत दो वर्ष से अधिक पुरानी जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिये आवेदकों को न्यायालय में वाद दायर करना होगा और आदेश मिलने पर ही नगर पालिका प्रमाण पत्र जारी करेगी। एक‑से‑दो वर्ष पुराने मामलों में एसडीएम की अनुमति आवश्यक है, जबकि इससे पहले केवल नगर निकाय से प्रक्रिया चलती थी। इस परिवर्तन से दस्तावेज़ प्राप्त करने की लागत और प्रक्रिया दोनों में वृद्धि होगी।

सौजन्य से:- Jagran
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वालों को झटका! 1 अक्टूबर से लागू हुआ नया नियम, अब जाना होगा अदालत
नई नियमावली के तहत अब दो साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अदालत की ...और पढ़ें
जागरण संवाददाता, अमरोहा। नगर पालिका में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में एक अक्टूबर से महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब दो साल से अधिक पुराने जन्म अथवा मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदकों को अदालत की शरण लेनी होगी। अदालत के आदेश के बाद ही नगर पालिका की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की आशंका पर अंकुश लगाना है। अभी तक एक साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदक को एसडीएम के यहां आवेदन करना पड़ता था।
एसडीएम की अनुमति मिलने के बाद नगर पालिका स्तर पर जांच-पड़ताल कर प्रमाण पत्र जारी किया जाता था। वहीं, एक साल तक की देरी वाले मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत नगर निकाय स्तर से ही प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता था।
शासन ने अब जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की नियमावली में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष तक पुराने मामलों में एसडीएम की अनुमति आवश्यक होगी। एसडीएम के अनुमोदन के बाद ही नगर पालिका प्रमाण पत्र जारी कर सकेगी।
वहीं, दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदक को अदालत में वाद दायर करना होगा। अदालत में मामले की जांच-पड़ताल और सुनवाई के बाद यदि प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया जाता है, तभी नगर पालिका प्रशासन की ओर से ऑनलाइन जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार यादव ने बताया कि एक अक्टूबर से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की नई नियमावली लागू हो गई है। दो वर्ष से अधिक पुराने प्रमाण पत्र के मामलों में अब अदालत के आदेश के बाद ही नगर पालिका प्रमाण पत्र जारी करेगी।
आवेदकों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
नई व्यवस्था लागू होने से पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले आवेदकों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। अभी तक ऐसे मामलों में शपथ पत्र सहित नगर पालिका की निर्धारित फीस जमा करनी पड़ती थी।
अब दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में आवेदक को पहले अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में वाद दायर करना होगा। अदालत से आदेश मिलने के बाद नगर पालिका में निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। इस तरह आवेदकों को अधिवक्ता की फीस के साथ नगर पालिका की फीस भी देनी पड़ेगी।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
स्थायी लोक अदालत के वेतन पर याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने NALSA को समीक्षा का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने पंजीकरण बाधा के कारण पाटियाला और मोघा के 50 नगरपालिका वार्डों के चुनाव रद्द किए

सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, लोधी‑युग की इमारत को गौशाला व कचरा डंपिंग स्थल बनते देखा

सुप्रीम कोर्ट ने SMA उपचार फंड की स्थापना और दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास केंद्रों की राज्यवार जानकारी की मांग की

आलाहाबाद हाई कोर्ट ने लंबित मामलों के निपटारे हेतु मध्यस्थता अभियान शुरू, दिसंबर तक जारी

दिल्ली हाई कोर्ट ने यू.एस. नागरिक की वीज़ा अस्वीकृति को बरकरार रखा, जिन पर यौन अपराध का दोष सिद्ध

सुप्रीम कोर्ट ने पटियाला‑मोगा के 50 नगर निगम वार्डों के चुनाव रद्द कर छह हफ्ते में नई मतदान प्रक्रिया का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 वार्डों में नई चुनावी प्रक्रिया का आदेश, नामांकन में व्यापक अड़चन की पुष्टि
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 वार्डों में नई चुनावों का आदेश दिया
- कंगना रनौत ने एआई‑जनित अपमानजनक कंटेंट के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर, न्यायालय ने नोटिस जारी किया
- सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड DGP नियुक्ति नियमों पर प्रकाश सिंह निर्णय का विरोध जताया
- सुप्रीम कोर्ट में 3 नए न्यायाधीश, कार्यबल 37 तक बढ़ा
- संसद ने मनोज कुमार तिवारी को उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय का कार्यवाहक प्रमुख न्यायाधीश नामित किया
- सुप्रीम कोर्ट ने फ़ार्मा विज्ञापन पर समिति बनाने का निर्देश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने 50 वार्डों में न्यायिक निगरानी के तहत दोबारा चुनावों का आदेश
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा: शादी से इनकार को आत्महत्या के उकसाने के रूप में नहीं माना जा सकता

