चिनाब डैम पर हमला क्यों नहीं हो सकता, यह दावा बोले इस्लामाबाद से एक पाकिस्तानी विशेषज्ञ!
पाकिस्तान का दावा: चिनाब पर बने भारत के बांध सैन्य हमलों से सुरक्षित नहीं हैं, यह कहकर देश के विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित बातें कर रहे हैं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
- भारत ने बीते साल पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि निलंबित की थी।
- पाकिस्तान की ओर जाने वाला पानी रोकने के लिए चिनाब पर बांध बना रहा है भारत।
- पाकिस्तानी विशेषज्ञ का दावा- अंतरराष्ट्रीय कानून की सुरक्षा में नहीं आता चिनाब डैम।
इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान के बीच पानी बंटवारा बीते साल से लगातार विवाद के केंद्र में बना हुआ है। पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने और फिर चिनाब पर बांध बनाने के भारत के प्रोजेक्ट पर पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तानी नेताओं और आर्मी अफसरों ने इस मुद्दे पर भारत को युद्ध की गीदड़भभकी तक दी है। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के वकील और पूर्व कार्यवाहक कानून मंत्री अहमर बिलाल सूफी ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के कुछ ऐसे पहलू हैं, जो भारत के बांधों को सैन्य हमलों से सुरक्षा नहीं देते हैं।
युद्ध की स्थिति में जिन ढांचों को अंतरराष्ट्रीय कानून सुरक्षा देते हैं, उनमें बांध भी आते हैं। डॉन में लिखे लेख में अहमर बिलाल सूफी ने इस सवाल पर बात की है कि पाकिस्तानी पक्ष धमकी तो दे रहा है लेकिन क्या वाकई चिनाब पर बने बांध हमले का निशाना बनाए जा सकते हैं। भारत चिनाब के ऊपरी हिस्सों में चार बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट- पाकल डुल, किरू, क्वार, रातले और विशाल सवालकोट पर काम कर रहा है।
क्या बांधों पर हमला हो सकता है?
सूफी कहते हैं, 'अहम सवाल ये है कि क्या पाकिस्तान किसी ऐसे बांध या पानी की सुरंग पर हमला कर सकता है, जिसे भारत चिनाब पर बना रहा है। यह सवाल 1949 के जिनेवा कन्वेंशन के एडिशनल प्रोटोकॉल I के आर्टिकल 56 के तहत सशस्त्र संघर्ष के दौरान बांधों, तटबंधों और ऐसी जगहों को मिलने वाली सुरक्षा के संदर्भ में उठाया जाता है।'इसका जवाब सीधा है यह है कि ऐसी संरचना सुरक्षा का अधिकार खो देती है, जिसका इस्तेमाल निचले इलाके वाले देश के खिलाफ सैन्य मकसद के तहत लिए किया जा रहा हो। मौजूदा मामले में बन रहा बांध जैसा इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित नहीं हो सकता है क्योंकि उसे सैन्य मकसद से बनाया जा रहा है। भले ही वह आम नागरिकों की संपत्ति हो।
'पाकिस्तान ने खुद साबित किया सैन्य मकसद'
सूफी का दावा है कि भारत का नजरिया पाकिस्तान को यह तर्क देने में मदद करेगा कि चिनाब पर बांध आक्रामक इरादे से बनाए जा रहे हैं। इसे दो उदाहरणों से समझा जा सकता है। एक- भारत के जल मंत्री सीआर पाटिल ने बयान दिया है कि आने वाले सालों में पानी की एक बूंद भी पाकिस्तान नहीं जाएगी। दूसरा- भारत कहता है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है।पाकिस्तान का पानी रोकना उसके सामने सिंचाई और आम लोगों के लिए संकट खड़ा करता है। इसलिए अगर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून या जस एड बेलम (युद्ध शुरू करने का अधिकार) के दायरे में रहकर ऐसे किसी भी निर्माण को रोकने, उसमें देरी करने या उसे पूरी तरह से रोकने के लिए कार्रवाई करता है तो उसका यह कदम सही माना जाएगा।
पाकिस्तान की आपत्ति जायज: सूफी
सूफी का दावा है कि भारत इस बांध के निर्माण को पाकिस्तान को 'सजा देने' के सैन्य मकसद से जोड़ता है। भारत ने IWT (सिंधु जल संधि) के तहत कोई बांध बनाने की योजना बनाई होती तो पाकिस्तान आपत्ति नहीं कर सकता था। संधि को रोककर भारत ने युद्ध के कानूनों के तहत बांधों और तटबंधों को मिलने वाली पारंपरिक सुरक्षा को खत्म कर दिया है।अहमर बिलाल सूफी का कहना है कि सशस्त्र संघर्ष में बांध सुरक्षित जगहें मानी जाती हैं। हालांकि इसमें एक पेंच है कि जिस जलाशय या बांध में पानी नहीं भरा गया है, उसे यह सुरक्षा नहीं मिलती क्योंकि खाली बांध के नष्ट होने पर कोई बड़ा खतरा पैदा नहीं होता है। निर्माण शुरू होने से पानी भरने तक निर्माणाधीन बांध को 'अतिरिक्त प्रोटोकॉल 1' के तहत सुरक्षा नहीं मिलने की बात पाकिस्तान के योजनाकार भी जानते होंगे।
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