जम्मू कोर्ट ने JKCA के वार्षिक आम बैठक के किसी भी निर्णय को अंतरिम आवेदन के नतीजे तक रोकने का आदेश दिया
उप-न्यायाधीश संदीप सिंह सेन ने कहा कि 27 सितंबर को आयोजित होने वाली JKCA की AGM में लिए गए निर्णयों को तब तक घोषित नहीं किया जाएगा जब तक मॉडर्न क्रिकेट क्लब जम्मू की अंतरिम अर्जी का फैसला नहीं सुनाया जाता। कोर्ट ने वादी की प्राथमिक पक्षीय साक्ष्य और अपूरणीय नुकसान की संभावना को देखते हुए इस आपातकालीन निषेधाज्ञा को मंजूरी दी, और आगे की सुनवाई 23 अक्टूबर को निर्धारित की।

सौजन्य से:- ETV Bharat
जम्मू की अदालत ने JKCA की वार्षिक आम बैठक के फैसलों की घोषणा पर रोक लगाई
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि JKCA की प्रस्तावित AGM में लिया गया कोई भी निर्णय अंतरिम आवेदन के नतीजे के अधीन रहेगा.
Published : September 26, 2026 at 8:14 PM IST
श्रीनगर: जम्मू की एक अदालत ने निर्देश दिया है कि 27 सितंबर को जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) की प्रस्तावित वार्षिक आम बैठक (AGM) में लिए गए किसी भी फैसले को मॉडर्न क्रिकेट क्लब जम्मू (Modern Cricket Club Jammu) की अंतरिम अर्जी पर फैसला आने तक घोषित नहीं किया जाएगा.
उप-न्यायाधीश और स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सेन की ओर से मॉडर्न क्रिकेट क्लब जम्मू के अध्यक्ष सुदर्शन मेहता बनाम जाविद किताब और अन्य के केस में पारित आदेश में AGM बुलाने पर स्पष्ट रूप से रोक नहीं लगाई गई है. इसके बजाय, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बैठक में लिया गया कोई भी निर्णय, यदि कोई हो, घोषित नहीं किया जाएगा और वह अंतरिम आवेदन के नतीजे के अधीन रहेगा.
आदेश में कहा गया है, "दूसरी पक्षकार को नोटिस जारी किया जाए और इस बीच, गैर-आवेदकों या प्रतिवादियों की दिनांक 27 सितंबर (रविवार) को प्रस्तावित वार्षिक आम बैठक का फैसला, यदि कोई हो, तो उसे घोषित नहीं किया जाएगा और वह इस अंतरिम आवेदन के परिणाम के अधीन होगा."
मामले को आगे की कार्यवाही के लिए 23 अक्टूबर, 2026 को सूचीबद्ध किया गया है.
मॉडर्न क्रिकेट क्लब जम्मू ने अपने अध्यक्ष सुदर्शन मेहता के जरिये JKCA चुनाव प्रक्रिया को चुनौती दी है और यह घोषित करने की मांग की है कि 16 जनवरी, 2026 को हुए चुनाव और 21 मई, 2026 को घोषित नतीजे गैर-कानूनी, अमान्य और एसोसिएशन के नियमों के खिलाफ थे. बचाव पक्ष में जाविद किताब, जिन्हें आदेश में JKCA का "तथाकथित अध्यक्ष" बताया गया है, के साथ-साथ दूसरे पदाधिकारियों और अधिकारियों, चुनाव अधिकारी, पूर्व लोकपाल, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), BCCI प्रेसिडेंट मिथुन मन्हास और एसोसिएशन से जुड़े दूसरे लोग शामिल हैं.
कोर्ट के वादपत्र के सारांश के अनुसार, वादी का दावा है कि मॉडर्न क्रिकेट क्लब जम्मू और अन्य वैध कार्यसमिति सदस्यों को प्रबंधन में भाग लेने और पदाधिकारियों के चुनाव में वोट डालने के उनके कथित अधिकार से वंचित कर दिया गया था. वादपत्र में उन नामित व्यक्तियों की भागीदारी को भी चुनौती दी गई है, जिन्हें वादी (plaintiff) संबद्ध क्लबों का वैध प्रतिनिधि मानने से इनकार करता है.
वादी ने कथित चुनाव को रद्द करने और एक स्वतंत्र आयुक्त, रिसीवर या रिटर्निंग ऑफिसर के जरिये नए सिरे से चुनाव कराने की भी मांग की है. मुकदमे में इस तरह की प्रक्रिया लंबित रहने तक JKCA के प्रबंधन के संबंध में निर्देश देने की भी मांग की गई है.
मुख्य मुकदमे के साथ, वादी ने अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग करते हुए एक आवेदन भी दायर किया. वादी के वकील को सुनने और मामले की फाइल तथा अनुलग्नकों (annexures) की जांच करने के बाद, कोर्ट ने दर्ज किया कि इस चरण में, वादी ने प्रथम दृष्टया एक मजबूत मामला स्थापित किया है.
न्यायाधीश ने यह भी दर्ज किया कि सुविधा का संतुलन वादी के पक्ष में झुका हुआ था और उस चरण में निषेधाज्ञा रोकने से ऐसा नुकसान हो सकता था जिसकी भरपाई नहीं हो सकती थी.
आदेश में कहा गया है, "इस अवलोकन से, इस स्तर पर वादी ने प्रथम दृष्टया एक मजबूत मामला बना लिया है और सुविधा का संतुलन भी वादी के पक्ष में है, तथा अगर इस स्तर पर स्थगन आदेश रोक दिया जाता है, तो वादी को ऐसी अपूरणीय क्षति होगी जिसकी किसी भी प्रकार से भरपाई नहीं की जा सकती."
कोर्ट ने इस मामले को अत्यंत आवश्यक माना और नागरिक प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 नियम 3 के तहत पहले से नोटिस की जरूरत को खत्म कर दिया. ऑर्डर में लिखा है, "चूंकि मामला इमरजेंसी का है, इसलिए ऑर्डर 39 रूल 3 CPC के तहत पहले से नोटिस देने की जरूरत नहीं है."
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन ने अपने अध्यक्ष को किया निलंबित
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