आगरा का 12 साल के प्रिंस हत्याकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट से दोनों आरोपित बरी, सबूतों के अभाव में फास्ट ट्रैक का फैसला रद
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के 12 साल के प्रिंस हत्याकांड के दो आरोपियों कबीर खान और इरशाद को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

सौजन्य से:- Jagran
आगरा के प्रिंस हत्याकांड में इलाहाबाद HC से दो आरोपित बरी, सबूत के अभाव में अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक का फैसला रद
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आगरा के 12 वर्षीय प्रिंस हत्याकांड के दो आरोपियों कबीर खान और इरशाद को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत क ...और पढ़ें
HighLights
- कोर्ट ने कहा- बेटा लापता, पिता का शांति से सोना, सुबह इत्मीनान से बैठना अस्वाभाविक
- अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक ने आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी
विधि संवाददाता, प्रयागराज। आगरा के शाहगंज थाना क्षेत्र के बहुचर्चित हत्याकांड में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों कबीर खान और इरशाद को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक आगरा के 3 नवंबर 2020 के फैसले को रद कर दिया, जिसमें दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने आरोपियों को रिहा करने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट ने कहा- लड़का लापता,और पिता रातभर शांति से सोया रहा, सुबह उठा और चाय पी फिर घर के बाहर इत्मीनान से बैठ गया, पुलिस को लापता लड़के की सूचना नहीं दी।और घर के पास भीड़ देख लाश की पहचान की। ऐसे की गवाही विश्वसनीय कैसे मानी जा सकती है।
12 वर्षीय प्रिंस का आधा जला शव मिला था
कहा गया कि 2013 में 12 वर्षीय प्रिंस को इरशाद नाम के व्यक्ति द्वारा शाम को घर से बुलाकर ले जाया गया।अगली सुबह रेलवे ग्राउंड के पास कूड़े के ढेर में उसका आधा जला शव मिला था, जिसके पैर बंधे हुए थे। पोस्टमार्टम में मौत का कारण गला घोंटना पाया गया था। पुलिस ने इरशाद और कबीर खान के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने का मुकदमा दर्ज किया था।
कोर्ट ने गवाहों के आचरण को 'अस्वाभाविक' बताया
कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने पूरा मामला अंतिम बार साथ देखे जाने के सिद्धांत पर आधारित रखा, लेकिन इसके गवाह पिता सर्वेश कुमार शर्मा सहित चार गवाहआपस में विरोधाभासी बयान दे रहे थे। कोर्ट ने गवाहों के आचरण को 'अस्वाभाविक' बताया। जैसे बेटे के रातभर न लौटने पर भी पिता का शांति से सोना, सुबह चाय पीना और इत्मीनान से घर के बाहर बैठना।
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ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का सही मूल्यांकन नहीं किया
कोर्ट ने कहा कि न तो एफआइआर में और न ही किसी गवाह के बयान में हत्या का कोई मकसद बताया गया, और मौके से कोई सबूत या हथियार बरामद नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि केवल 'लास्ट सीन टुगेदर' सिद्धांत दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है, जब तक अन्य ठोस सबूत न हों। कोर्ट ने कहा ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का सही मूल्यांकन नहीं किया।
कोर्ट ने कबीर खान व इरशाद को आरोपों से किया बरी
दोनों अपीलें स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कबीर खान और इरशाद को धारा 302/34 और 201 आईपीसी के आरोपों से बरी कर दिया और आदेश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में वांछित न हों तो उन्हें तुरंत जेल से रिहा किया जाए।
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