होमअपराधतमिलनाडु की अलगाववादी मांग पर भारत में देशद्रोह का केस खारिज, मद्रास हाईकोर्ट ने किया फैसला
अपराध

तमिलनाडु की अलगाववादी मांग पर भारत में देशद्रोह का केस खारिज, मद्रास हाईकोर्ट ने किया फैसला

तमिलनाडु के अलगाववादी आंदोलन से जुड़े एक मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने देशद्रोह के आरोपों को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दायर किए गए मामले में आया है।

5 जुलाई 2026 को 08:23 am बजे
तमिलनाडु की अलगाववादी मांग पर भारत में देशद्रोह का केस खारिज, मद्रास हाईकोर्ट ने किया फैसला

सौजन्य से:- Navbharat Times

औरतों के 'मासिक धर्म' पर कानून,चौंकिए मत पाकिस्तान लगाता है 'पीरियड टैक्स', अवाम के विरोध से हुआ खत्म

क्या था पूरा मामला और क्यों दर्ज हुआ था देशद्रोह का केस?

देशद्रोह से जुड़ा मामला 'कलगम पथिप्पगम' नामक प्रकाशन संस्था से जुड़ा है, जिसके संचालकों के खिलाफ पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया था। वर्डिक्टम की रिपोर्ट के अनुसार, आरोप थे कि साल 2014 में प्रकाशित एक पुस्तक में साल 1967 के दौरान तमिज्हरासन द्वारा तमिलनाडु को अलग राष्ट्र बनाने और गुरिल्ला युद्ध का उल्लेख किया गया था। इसी आधार पर प्रकाशकों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की देशद्रोह संबंधी धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई। मामले के मुख्य आरोपी लेखक इलंगोवन की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी, जबकि दो प्रकाशकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कार्यवाही रद्द करने की मांग की। अदालत में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि उनकी पुस्तक में केवल ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख है, न कि वर्तमान समय में अलगाववाद का प्रचार। वो ऐसा नहीं चाहते।करोड़ों कमाने वाले SC-ST, कन्वर्टेड ईसाईयों को टैक्स छूट क्यों, क्रीमी लेयर लागू हो, CJI बोले सरकार से कहो

मद्रास हाई कोर्ट ने देशद्रोह की व्याख्या पर क्या कहा?

- मद्रास हाईकोर्ट में मामले को न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती की एकल पीठ ने सुना।

- न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने कहा कि देशद्रोह का मूल तत्व सरकार के प्रति घृणा, अवमानना या असंतोष भड़काना अथवा उसका प्रयास करना है। ऐसे में किसी कथन का मूल्यांकन उस समय के सामाजिक और राष्ट्रीय परिवेश को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

- न्यायालय ने कहा कि किसी इतिहास पुस्तक, शोध या दस्तावेज में अतीत की घटनाओं का उल्लेख करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा हो सकता है। यदि कोई प्रकाशन केवल बीते समय की घटनाओं को दर्ज करता है और वर्तमान में लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काने का प्रयास नहीं करता, तो उसे देशद्रोह नहीं कहा जा सकता।

- न्यायालय के अनुसार वर्ष 1967 का राजनीतिक माहौल वर्तमान समय से पूरी तरह अलग था। आज भारत सामाजिक और राष्ट्रीय रूप से अधिक एकजुट है और ऐसे ऐतिहासिक कथनों से आम जनता में सरकार के प्रति घृणा उत्पन्न होने की संभावना नहीं है।

- अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित पुस्तक में अलग राष्ट्र की मांग को वर्तमान अभियान के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। केवल इतिहास में कही गई बातों का उल्लेख करना अपने आप में देशद्रोह का अपराध नहीं बनता।

- अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कथन को उसके पूरे संदर्भ में पढ़ना आवश्यक है। केवल एक पंक्ति या उद्धरण को अलग करके अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता। यह दृष्टिकोण भविष्य में इतिहास, शोध और प्रकाशन से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।

- अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून का प्रयोग केवल वास्तविक उकसावे या हिंसा भड़काने वाले मामलों तक सीमित रहना चाहिए।

इस्लाम अपनाने से भी नहीं मिलेगा 'आरक्षण', मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, धर्म परिवर्तन पर खींच दी बड़ी लकीर

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और देशद्रोह कानून की न्यायिक व्याख्या

गौर किया जाए तो मद्रास हाई कोर्ट का यह निर्णय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और देशद्रोह कानून की न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में काफी अहम है। अदालत ने दोहराया कि किसी भी कथन का मूल्यांकन वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों और उसके वास्तविक प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए। इससे यह सिद्धांत मजबूत होता है कि इतिहास का दस्तावेजीकरण और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का समर्थन एक समान नहीं हैं। यह फैसला प्रकाशकों, लेखकों, शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देता है कि ऐतिहासिक तथ्यों का महज उल्लेख कर देना अपराध नहीं बनता।15 दस्तावेज फिर भी 'अमीनुल हक' भारतीय नहीं, बाप कहता रहा 'बेटा' है मेरा, हाईकोर्ट ने ठुकराया दावा, जानें मामला

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
विदिशा पूर्व विधायक शशांक भार्गव को बड़ा झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज
अपराध

विदिशा पूर्व विधायक शशांक भार्गव को बड़ा झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज

बंगाल में हिंसक प्रदर्शन पर सख्त कानून का असर, अब निवेश का सुनहरा मौका?
अपराध

बंगाल में हिंसक प्रदर्शन पर सख्त कानून का असर, अब निवेश का सुनहरा मौका?

आगरा का 12 साल के प्रिंस हत्याकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट से दोनों आरोपित बरी, सबूतों के अभाव में फास्ट ट्रैक का फैसला रद
अपराध

आगरा का 12 साल के प्रिंस हत्याकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट से दोनों आरोपित बरी, सबूतों के अभाव में फास्ट ट्रैक का फैसला रद

राजस्थान की कानून व्यवस्था पर अशोक गहलोत का सवाल, कहा- कानून का डर शून्य
अपराध

राजस्थान की कानून व्यवस्था पर अशोक गहलोत का सवाल, कहा- कानून का डर शून्य

दिल्ली कोर्ट ने पासपोर्ट एक्ट के आरोप से व्यक्ति को किया बरी
अपराध

दिल्ली कोर्ट ने पासपोर्ट एक्ट के आरोप से व्यक्ति को किया बरी

कानून को जनता के करीब लाने के लिए हो रहे नवाचार
अपराध

कानून को जनता के करीब लाने के लिए हो रहे नवाचार

सिंघम-पुष्पा की जरूरत नहीं, कानून है समाज का सेवक
अपराध

सिंघम-पुष्पा की जरूरत नहीं, कानून है समाज का सेवक

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पालतू कुत्ते को भगवान कृष्ण के रूप में सजाने को अपराध बताया नहीं
अपराध

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पालतू कुत्ते को भगवान कृष्ण के रूप में सजाने को अपराध बताया नहीं

ताज़ा ख़बरें