सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सुकेश चंद्रशेखर ने दिल्ली हाई कोर्ट में चरित्र पर अपमानजनक टिप्पणियों को हटाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट के जज बने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर ने 2017 के भ्रष्टाचार मामले में जमानत के लिए जज का रूप धारण कर जमानत पाने की कोशिश की थी और ट्रायल कोर्ट में दोषसिद्ध हुए। अब वे हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देते हुए कहते हैं कि ट्रायल कोर्ट ने उनके चरित्र पर निंदात्मक टिप्पणियों के आधार पर निर्णय लिया और पर्याप्त सबूत प्रस्तुत करने का मौका नहीं दिया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर भ्रष्टाचार मामले में जमानत पाने की कोशिश करने के दोषी ठहराए गए सुकेश चंद्रशेखर ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
नई दिल्ली: कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर ने 2017 के एक भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट के जज का रूप धरकर जमानत हासिल करने की कोशिश के मामले में दोषसिद्धि को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। चंद्रशेखर ने ट्रायल कोर्ट के 20 अगस्त के फैसले को चुनौती देते हुए अपने चरित्र पर की गई “अपमानजनक, निंदात्मक और कलंक लगाने वाली” टिप्पणियों को हटाने की मांग की है।
कोर्ट ने आरोपी को ठहराया था दोषी
ट्रायल कोर्ट ने 20 अगस्त को चंद्रशेखर को IPC के तहत सरकारी कर्मचारी का रूप धारण करने, नुकसान पहुंचाने की धमकी देने और आपराधिक डराने-धमकाने के अपराधों का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने कथित कृत्य को न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता का सीधा अपमान बताया था।
मामले में क्या है अभियोजन पक्ष का कहना
अभियोजन के मुताबिक, 28 अप्रैल 2017 को पुलिस हिरासत में रहते हुए चंद्रशेखर ने एक कॉन्स्टेबल का मोबाइल फोन लिया था। आरोप है कि इस फोन का इस्तेमाल उन्होंने एक स्पेशल जज को प्रभावित करने की कोशिश में किया। पुलिस के अनुसार, उन्होंने खुद को सुप्रीम कोर्ट के जज और उनके निजी सचिव के रूप में पेश किया था।
आरोपी चंद्रशेखर ने किया दावा
आरोप था कि इस पूरी कवायद का मकसद 2017 के भ्रष्टाचार मामले में जमानत हासिल करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना था। हाई कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में चंद्रशेखर ने दावा किया है कि ट्रायल कोर्ट ने मामले को पहले से तय और नकारात्मक सोच के साथ देखा। उनका आरोप है कि उन्हें अपने बचाव में पर्याप्त सबूत पेश करने का पूरा अवसर नहीं दिया गया।
सबूतों के बजाय चरित्र को ध्यान में रखकर सुनाया फैसला
उन्होंने यह भी दावा किया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला ठोस सबूतों के बजाय उनके कथित चरित्र को ध्यान में रखकर सुनाया गया। इसी आधार पर उन्होंने फैसले में अपने व्यक्तित्व और चरित्र को लेकर की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की है।
लेखक के बारे मेंप्राची यादवलगभग 19 साल से पत्रकारिता में हैं। सात साल तक एक दिल्ली-एनसीआर न्यूज चैनल में विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। प्रोग्रामिंग और एंकरिंग भी की। टीवी से ही लीगल रिपोर्टिंग की शुरुआत हुई। उस दौरान, जिला अदालतों और दिल्ली हाई कोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट तक की रिपोर्टिंग की। 2013 में नवभारत टाइम्स से जुड़ीं। यहां पर शुरुआत जिला अदालतों, नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उपभोक्ता अदालतों की रिपोर्टिंग से हुई। वर्तमान में अन्य सभी अदालतों के साथ दिल्ली हाई कोर्ट भी कवर कर रही हैं।... और पढ़ें
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