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राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, आय से अधिक संपत्ति मामले में इलाहाबाद HC की सुनवाई पर रोक

आय से अधिक संपत्ति मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है, जहां शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की सुनवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी…

17 अगस्त 2026 को 02:56 pm बजे
राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, आय से अधिक संपत्ति मामले में इलाहाबाद HC की सुनवाई पर रोक

सौजन्य से:- Navbharat Times

आय से अधिक संपत्ति मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है, जहां शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की सुनवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को बड़ी राहत मिली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को मामले में आगे की सुनवाई फिलहाल स्थगित रखने का निर्देश दिया है। साथ ही CBI और ED को भी हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करने को कहा गया है।

क्या था मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक निवासी एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर राहुल गांधी, CBI और ED को नोटिस जारी किए। शिशिर ने ही राहुल गांधी की कथित आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।

वकील ने हाई कोर्ट की कार्यवाही पर उठाए सवाल

राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हाई कोर्ट की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए इसे “कानून से पूरी तरह अनजान” और “विच हंट प्रक्रिया” बताया। उन्होंने याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र (लोकस) पर भी सवाल उठाया और कहा कि उन्होंने अपनी साख भी स्पष्ट नहीं की है। सिब्बल ने कहा कि CBI ने अब तक केवल शिकायत का सत्यापन किया है।

कोर्ट में क्या बोले केंद्रीय जांच एजेंसी के वकील

केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि फिलहाल एजेंसियों की मामले में कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है तो मामला गंभीर हो सकता है।

सुनवाई के दौरान बोवे सीजेआई सूर्यकांत

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि अदालत किसी मामले में निर्देश देना चाहती है तो उसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करना अपेक्षित है। वहीं जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने एजेंसियों से पूछा कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो उन्होंने स्वयं कोई कार्रवाई क्यों नहीं की और क्या उन्हें कार्रवाई के लिए अदालत के निर्देश की जरूरत है। याचिकाकर्ता शिशिर ने सुप्रीम कोर्ट में ऑनलाइन पेश होकर राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी प्री-FIR चरण में है और इस स्तर पर आरोपी को सुनवाई का अधिकार नहीं होता।

हाई कोर्ट ने CBI से मांगी थी प्रगति रिपोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने 20 जुलाई को CBI के जवाब से असंतोष जताते हुए एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसमें राहुल गांधी की संपत्ति से जुड़े आरोपों की जांच में हुई प्रगति का विस्तृत ब्योरा मांगा गया था।

हाई कोर्ट ने CBI को दिया था निर्देश

हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि जांच के दौरान ED को किसी अवैधता से जुड़े दस्तावेज या सामग्री मिलती है तो वह कानून के मुताबिक आगे कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त तय की थी। हाई कोर्ट ने CBI को यह भी निर्देश दिया था कि संबंधित जोन के संयुक्त निदेशक या नई दिल्ली स्थित एंटी करप्शन मुख्यालय के प्रमुख अधिकारी स्वयं नया हलफनामा दाखिल करें।

विभागों को भी दिया समय

इसके अलावा केंद्र सरकार को भी विभिन्न विभागों की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया था। मामले के रिकॉर्ड को संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए सीलबंद कवर में सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के आदेश के बाद हाई कोर्ट में अगली कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई तक आगे नहीं बढ़ेगी।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

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