सुप्रीम कोर्ट ने दवा फर्मों को डॉक्टरों को महंगे तोहफे‑यात्रा देने से रोकने के लिये समिति बनाकर निर्देशित किया
कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक समिति स्थापित करने का आदेश दिया है, जो दवा कंपनियों की अनुचित मार्केटिंग प्रथाओं पर रोकथाम के उपाय सुझाएगी। यह कदम फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया की याचिका के बाद उठाया गया है, और समिति की रिपोर्ट 29 जनवरी 2027 को पुनः न्यायालय में पेश की जाएगी।

सौजन्य से:- ETV Bharat
दवा कंपनियां डॉक्टरों को नहीं दे पाएंगी महंगे तोहफे और विदेश यात्राओं के ऑफर, सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार को कमेटी बनाने का बड़ा निर्देश दिया है.
By Sumit Saxena
Published : October 8, 2026 at 1:26 PM IST
नई दिल्ली: दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को कीमती तोहफे, विदेश यात्राएं और अन्य मुफ्त चीजें (फ्रीबीज) देकर अपनी कंपनी की दवाएं लिखवाने के खेल पर अब पूरी तरह लगाम लगने वाली है. दवा कंपनियां इस तरह के गलत या अनैतिक तरीकों से अपनी दवाओं का प्रचार न करें, इसके लिए अब एक विशेष समिति बनेगी. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को इस कमेटी का गठन करने का सख्त निर्देश दिया है.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सरकार को आदेश दिया कि वह कोर्ट के पुराने निर्देशों और टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए इस कमेटी का गठन करे. यह समिति उन सुझावों पर विचार करेगी और उपायों की सिफारिश करेगी जिससे इन गलत तरीकों पर रोक लगाई जा सके.
फैसले का मुख्य हिस्सा पढ़ते हुए जस्टिस मेहता ने कहा, "हमने भारत सरकार को कमेटी बनाने और हमारे पिछले निर्देशों व टिप्पणियों के आधार पर अपनी सिफारिशें देने का निर्देश दिया है. कोर्ट के इस आदेश का पालन हुआ है या नहीं, इस मामले को 29 जनवरी 2027 को दोबारा कोर्ट के सामने रखा जाएगा."
यह मामला फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (FMRAI) द्वारा दायर की गई एक याचिका से शुरू हुआ. इस याचिका में दवा कंपनियों के मार्केटिंग के तरीकों को नियंत्रित करने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी नियम बनाने की मांग की गई थी. साथ ही, डॉक्टरों और मेडिकल प्रोफेशनल्स से जुड़े गलत या अनैतिक तौर-तरीकों का भी आरोप लगाया गया था.
याचिका में मांग की गई थी कि जब तक कोई प्रभावी कानून नहीं बन जाता, तब तक सुप्रीम कोर्ट खुद ऐसी गाइडलाइंस तय करे, जिससे दवा कंपनियों के इन गलत तरीकों पर लगाम लगाई जा सके. सितंबर में, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह एक तीन सदस्यीय पैनल (तीन लोगों की कमेटी) का गठन कर रही है. यह पैनल एक कानूनी ढांचा तैयार करने के सुझाव देगा ताकि यह पक्का किया जा सके कि दवा कंपनियां गलत तरीकों का इस्तेमाल न करें.
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया था कि डॉक्टरों को कोई खास दवा लिखने के लिए प्रभावित करने के लिए उन्हें कीमती तोहफे, विदेश यात्राएं, अन्य मुफ्त की चीजें और भारी दबाव बनाने वाले मार्केटिंग के तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
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