बहन की शादी में शामिल होने के लिए ड्रग्स तस्कर को नही मिली राहत, दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ड्रग्स तस्कर को बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने आरोपों की गंभीरता, आरोपित के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और बरामद किए गए ड्रग्स को देखते हुए अपना फैसला सुनाया।

सौजन्य से:- Jagran
ड्रग्स तस्कर को बहन की शादी के लिए नहीं मिली अंतरिम जमानत, दिल्ली हाई कोर्ट ने ठुकराई याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ड्रग्स तस्कर को बहन की शादी में शामिल होने के लिए 20 दिन की अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने आरोपों की गंभीरता, आरो ...और पढ़ें
HighLights
- दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत याचिका खारिज की।
- ड्रग्स तस्कर को बहन की शादी में नहीं मिली राहत।
- एनडीपीएस अधिनियम के तहत सख्त नियमों का हवाला दिया।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बिहार में अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए मानवीय आधार पर 20 दिन की अंतरिम जमानत की आरोपित की मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने ठुकरा दिया।
ड्रग्स की तस्करी और 40 किलो से ज्यादा मात्रा में गांजा रखने के आरोपित की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति तेजस करिया की अवकाश पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता पर लगे आरोप की गंभीर हैं और उसके पूर्व के आपराधिक रिकॉर्ड व भारी मात्रा में बरामद किए गए ड्रग्स को देखते हुए उसे अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आधार नहीं बनता है।
अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि पुलिस ने अंतरिम जमानत याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को वर्ष 2024 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत हुई प्राथमिकी में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपित एक आदतन अपराधी है और उसे 40 किलो से ज्यादा गांजा रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने आरोपित के अन्य भाई भी हैं जो बहन की शादी में धार्मिक रस्में निभा सकते हैं।
अदालत ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत जमानत के नियम बहुत सख्त हैं और अंतरिम जमानत देने की शक्ति का इस्तेमाल अदालत विशेष स्थिति में ही कर सकती है। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा-37 के तहत पाबंदियां अनिवार्य हैं और ये जमानत देने से जुड़े सामान्य नियमों से ऊपर हैं।
ऐसे में एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों में अंतरिम या नियमित जमानत केवल बहुत विशेष और असाधारण हालात में ही दी जा सकती है। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता इस मामले में कोई असाधारण या ठोस वजह नहीं दिखा पाया और वह इस स्तर पर अंतरिम जमानत पर रिहा होने का हकदार नहीं है।
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