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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने 'इश्क करो पार्टी' नाम की नई पार्टी की शुरुआत की, जाति और धर्म के आधार पर विभाजन का मुकाबला करने का लक्ष्य

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने 'इश्क करो पार्टी' नाम की नई पार्टी की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य जाति और धर्म के आधार पर विभाजन का मुकाबला करना और लोगों के बीच एकता को बढ़ावा देना है। काटजू ने यह पार्टी उन लोगों के लिए शुरू की है जो जाति और धर्म के आधार पर विभाजित नहीं हैं।

8 जून 2026 को 01:38 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने 'इश्क करो पार्टी' नाम की नई पार्टी की शुरुआत की, जाति और धर्म के आधार पर विभाजन का मुकाबला करने का लक्ष्य

सौजन्य से:- Jansatta

सोशल मीडिया कैंपेन ‘कॉकरोच जनता पार्टी‘ की व्यापक चर्चाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने ‘इश्क करो पार्टी’ नाम का एक डिजिटल इनिशिएटिव शुरू करने का एलान किया है। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने एक्स पर एक पोस्ट में इस संबंध में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने अपील की कि जो भी युवा उनके इस इनिशिएटिव से जुड़ना चाहते हैं, वो आधिकारिक ई-मेल आईडी पर संपर्क कर सकते हैं।

पूर्व जज के अनुसार यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म होगा जो लोगों को युद्ध या घृणा नहीं, प्यार करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। अपनी इनिशिएटिव के संबंध में काटजू ने एक्स पर विभिन्न पोस्ट किए हैं। उन्होंने एक पोस्ट में कहा, “जो लोग नई बनी ‘इश्क़ करो पार्टी’ से जुड़ना चाहते हैं, जिसका मैं संरक्षक हूं, वे ishqkaroparty@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।”

उन्होंने अपनी एक अन्य पोस्ट में लिखा कि जो लोग समझ रहे हैं कि यह इनिशिएटिव एक मजाक है, उन्हें बहुत बड़ी गलतफहमी है। उन्होंने लिखा, “कुछ लोगों को लग सकता है कि नई बनाई गई इश्क करो पार्टी कोई मजाक है या फिर यह केवल लड़के-लड़कियों के बीच प्रेम संबंधों को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई कोई “वैलेंटाइन डे” जैसी पहल है। लेकिन यह पूरी तरह गलत धारणा है।”

पोस्ट में कहा गया, “वास्तव में, यह भारत के सामने मौजूद गंभीर समस्याओं से निपटने का एक गंभीर प्रयास है। आज भारत में भारी गरीबी, व्यापक बेरोजगारी, बच्चों में कुपोषण की भयावह स्थिति (ग्लोबल हंगर इंडेक्स के अनुसार भारत का लगभग हर दूसरा बच्चा कुपोषित है और हाल के वर्षों में स्थिति और खराब हुई है), बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी, आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, जातीय और सांप्रदायिक तनाव जैसी अनेक गंभीर समस्याएं मौजूद हैं।”

पोस्ट में कहा गया, “इन विशाल समस्याओं का समाधान तब तक संभव नहीं है, जब तक हमारे लोगों में एकता नहीं होगी। लेकिन दुखद सच्चाई यह है कि आज हमारा समाज जाति, धर्म और नस्ल के आधार पर बंटा हुआ है। इस विभाजन को स्वार्थी राजनेता बढ़ावा देते हैं, जो केवल सत्ता और धन चाहते हैं तथा जनता के वास्तविक कल्याण की बजाय अपने वोट बैंक की राजनीति करते हैं।”

पूर्व जज काटजू ने अपनी पोस्ट में लिखा, “इश्क करो पार्टी का उद्देश्य इस बुराई का मुकाबला करना और लोगों के बीच एकता को बढ़ावा देना है। हमें अपने सभी देशवासियों के प्रति प्रेम रखना चाहिए, चाहे उनकी जाति, धर्म, नस्ल या कोई भी पहचान क्यों न हो। केवल तभी हम आधुनिक सोच वाले नेतृत्व के मार्गदर्शन में एक शक्तिशाली जनसंघर्ष खड़ा कर पाएंगे, जो हमारे लोगों को उनकी कठिन परिस्थितियों से मुक्ति दिला सके। इसी महान उद्देश्य के लिए आईकेपी भारतीय जनता का मार्गदर्शन करना चाहती है और यही पार्टी का मूल लक्ष्य है।”

अपनी एक पोस्ट में उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अभिजीत दीपके मूर्ख हैं, इसका प्रमाण उनके प्रमुख मांगों में से एक से ही मिल जाता है। वह भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। लेकिन अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा भी दे दें, तो उनकी जगह कोई दूसरा मंत्री आ जाएगा। ऐसे में इससे आखिर क्या फर्क पड़ेगा?

गौरतलब है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद अभिजीत ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई है। इस मांग को लेकर उन्होंने 6 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का अह्वान किया था। प्रदर्शन में सैकड़ों सीजेपी समर्थकों ने हिस्सा लिया। हालांकि, उनकी मांगों पर सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

बहरहाल, अभिजीत ने आगे भी प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। हालांकि, इसी बीच उन्हें ‘कंपटीशन’ देने एक नई पार्टी आ गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ‘इश्क करो पार्टी’ को भी सोशल मीडिया पर सीजेपी की तरह व्यापक तवज्जो मिलती है या फिर यह एक असफल प्रयास मात्र बनकर रह जाती है।

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इसका मतलब क्या है

सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू द्वारा ‘इश्क करो पार्टी’ नाम का डिजिटल इनिशिएटिव शुरू करने से भारत में गंभीर समस्याओं से निपटने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्लेटफ़ॉर्म लोगों को युद्ध या घृणा के बजाय प्यार करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या इससे वास्तविक समस्याओं का समाधान होगा या यह सिर्फ एक नया सोशल मीडिया ट्रेंड होगा। इस इनिशिएटिव का प्रभाव युवाओं पर कैसा होगा और इससे भारत के सामने मौजूद गंभीर समस्याओं का समाधान होगा या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।

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