होमअपराधशादीशुदा बेटी को अनुकंपा नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
अपराध

शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी शादीशुदा बेटी को केवल इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह अपने पति पर निर्भर है। कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप याचिकाकर्ता के आवेदन पर 30 दिनों के भीतर नए सिरे से विचार करे। यह फैसला अनुकंपा नियुक्ति के मामले में एक महत्वपूर्ण निर्देश है।

25 जुलाई 2026 को 06:14 pm बजे
शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

सौजन्य से:- Amar Ujala

{"_id":"6a64d7aafe219d41340b2a21","slug":"hc-order-bilaspur-chhattisgarh-news-c-1-1-noi1485-4542139-2026-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chhattisgarh: 'शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नौकरी से वंचित नहीं कर सकते', हाईकोर्ट ने बैंक को दिया बड़ा निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}

Chhattisgarh: 'शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नौकरी से वंचित नहीं कर सकते', हाईकोर्ट ने बैंक को दिया बड़ा निर्देश

Sat, 25 Jul 2026 10:56 PM IST

बिलासपुर ब्यूरो

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर

Published by: बिलासपुर ब्यूरो

Updated Sat, 25 Jul 2026 10:56 PM IST

सार

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी शादीशुदा बेटी को केवल इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह अपने पति पर निर्भर है। कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संबंधित नीति के अनुरूप याचिकाकर्ता के आवेदन पर 30 दिनों के भीतर नए सिरे से विचार करे।

विज्ञापन

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि किसी शादीशुदा बेटी को सिर्फ इस अनुमान के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए विचार करने से मना नहीं किया जा सकता कि वह अपने पति पर निर्भर है। कोर्ट ने कहा कि निर्भरता एक तथ्य है, जिसे हर मामले में साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाना चाहिए। कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए अनुकंपा नियुक्ति के लिए उसके आवेदन पर 30 दिनों के भीतर नए सिरे से विचार करे।

'शादीशुदा होना नौकरी से इनकार का आधार नहीं'

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शादीशुदा होना अपने आप में किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के दायरे से बाहर करने का वैध आधार नहीं हो सकता, जब तक कि लागू नीति में इसका स्पष्ट प्रावधान न हो। याचिकाकर्ता ने अपने पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए दिए गए आवेदन को खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। उसके पिता बैंक ऑफ महाराष्ट्र में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। बैंक ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया था कि शादीशुदा होने के कारण याचिकाकर्ता अपने पति पर निर्भर मानी जाएगी और उसे दिवंगत कर्मचारी के आश्रित परिवार का सदस्य नहीं माना जा सकता।

बैंक की नीति में शादीशुदा बेटियों पर नहीं था कोई प्रतिबंध

याचिकाकर्ता का तर्क था कि बैंक की अनुकंपा नियुक्ति नीति में शादीशुदा बेटियों को स्पष्ट रूप से बाहर नहीं रखा गया है। उसने यह भी कहा कि वह आर्थिक रूप से अपने पिता पर निर्भर थी। कोर्ट ने बैंक की नीति की समीक्षा की और पाया कि 'आश्रित परिवार के सदस्य' की परिभाषा में बेटी को शामिल किया गया है तथा उसमें शादीशुदा और अविवाहित बेटियों के बीच कोई भेद नहीं किया गया है। कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन में आर्थिक निर्भरता का स्पष्ट उल्लेख किया था, जबकि बैंक उसकी बात का खंडन करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: CGPSC पेपर लीक: पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी गिरफ्तार, कोर्ट ने ईडी को सात दिन की रिमांड पर सौंपा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर रखना लिंग-आधारित रूढ़िवादी सोच (जेंडर स्टीरियोटाइप) को बढ़ावा देता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(1) में प्रदत्त समानता और भेदभाव-निषेध के अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी बेटी को सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना मनमाना और असंवैधानिक है।

विज्ञापन

'शादीशुदा होना नौकरी से इनकार का आधार नहीं'

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शादीशुदा होना अपने आप में किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के दायरे से बाहर करने का वैध आधार नहीं हो सकता, जब तक कि लागू नीति में इसका स्पष्ट प्रावधान न हो। याचिकाकर्ता ने अपने पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए दिए गए आवेदन को खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। उसके पिता बैंक ऑफ महाराष्ट्र में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। बैंक ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया था कि शादीशुदा होने के कारण याचिकाकर्ता अपने पति पर निर्भर मानी जाएगी और उसे दिवंगत कर्मचारी के आश्रित परिवार का सदस्य नहीं माना जा सकता।

विज्ञापन

बैंक की नीति में शादीशुदा बेटियों पर नहीं था कोई प्रतिबंध

याचिकाकर्ता का तर्क था कि बैंक की अनुकंपा नियुक्ति नीति में शादीशुदा बेटियों को स्पष्ट रूप से बाहर नहीं रखा गया है। उसने यह भी कहा कि वह आर्थिक रूप से अपने पिता पर निर्भर थी। कोर्ट ने बैंक की नीति की समीक्षा की और पाया कि 'आश्रित परिवार के सदस्य' की परिभाषा में बेटी को शामिल किया गया है तथा उसमें शादीशुदा और अविवाहित बेटियों के बीच कोई भेद नहीं किया गया है। कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन में आर्थिक निर्भरता का स्पष्ट उल्लेख किया था, जबकि बैंक उसकी बात का खंडन करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: CGPSC पेपर लीक: पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी गिरफ्तार, कोर्ट ने ईडी को सात दिन की रिमांड पर सौंपा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर रखना लिंग-आधारित रूढ़िवादी सोच (जेंडर स्टीरियोटाइप) को बढ़ावा देता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(1) में प्रदत्त समानता और भेदभाव-निषेध के अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी बेटी को सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना मनमाना और असंवैधानिक है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां: भारत में असहमति के लिए सार्वजनिक स्थान कम और विरोध कर्मियों को बढ़ती गिरफ्तारी
अपराध

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां: भारत में असहमति के लिए सार्वजनिक स्थान कम और विरोध कर्मियों को बढ़ती गिरफ्तारी

लोकतांत्रिक स्थान सिकुड़ रहा है: न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां
अपराध

लोकतांत्रिक स्थान सिकुड़ रहा है: न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां

सोनिया गांधी के लिए वोटर लिस्ट मामले में फैसला 13 अगस्त को
अपराध

सोनिया गांधी के लिए वोटर लिस्ट मामले में फैसला 13 अगस्त को

देवघर में आयोजित मासिक लोक अदालत में 117 मामलों का सफल निपटारा
अपराध

देवघर में आयोजित मासिक लोक अदालत में 117 मामलों का सफल निपटारा

संसद में पेश होगा सार्वजनिक परीक्षा कानून संशोधन विधेयक, पेपर लीक पर सख्ती
अपराध

संसद में पेश होगा सार्वजनिक परीक्षा कानून संशोधन विधेयक, पेपर लीक पर सख्ती

सड़क दुर्घटना में विकलांग हुए व्यक्ति को 18.92 लाख रुपये का मुआवजा मिला
अपराध

सड़क दुर्घटना में विकलांग हुए व्यक्ति को 18.92 लाख रुपये का मुआवजा मिला

सुप्रीम कोर्ट ने POCSO की एफआईआर को रद्द किया, तलाक विवाद में चाची के खिलाफ आरोप हो सकते हैं झूठे
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने POCSO की एफआईआर को रद्द किया, तलाक विवाद में चाची के खिलाफ आरोप हो सकते हैं झूठे

किशनगंज रेप मामले में दोषी की सजा
अपराध

किशनगंज रेप मामले में दोषी की सजा

ताज़ा ख़बरें