सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में बच्चों को मोहरा बनाने को दुर्भाग्यपूर्ण किया, झूठा POCSO केस रद किया
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में झूठे मुकदमों और बच्चों को मोहरा बनाने पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के रुख पर नाराजगी जताते हुए एक नाबालिग बच्चे की बुआ के खिलाफ दर्ज पोक्सो मामले को खारिज कर दिया और कहा कि बच्चों का मोहरा बनना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

सौजन्य से:- Jagran
'वैवाहिक विवादों में बच्चों को मोहरा बनाना दुर्भाग्यपूर्ण', सुप्रीम कोर्ट ने रद किया झूठा POCSO केस
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में झूठे मुकदमों और बच्चों को मोहरा बनाने पर गहरी चिंता जताई है। ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में झूठे मुकदमों पर चिंता जताई।
- बदला लेने के लिए बच्चों को मोहरा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण।
- बुआ के खिलाफ दर्ज पोक्सो एफआईआर को कोर्ट ने रद्द किया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विवाह टूटने के बाद आपसी रंजिश निकालने के लिए किस हद तक जाया जा सकता है, इसका एक दर्दनाक और चिंताजनक मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है।
कोर्ट ने हाल ही में वैवाहिक विवादों के चलते झूठे मुकदमों में ससुराल पक्ष के लोगों को फंसाए जाने और इस प्रक्रिया में मासूम बच्चों को एक-दूसरे के खिलाफ मोहरा बनाए जाने पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के रुख पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के रुख पर नाराजगी जताते हुए एक नाबालिग बच्चे की बुआ के खिलाफ दर्ज पोक्सो मामले को खारिज कर दिया और कहा कि वैवाहिक विवादों में रिश्तेदारों को घसीटना और बच्चों का मोहरा बनना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह पूरा मामला एक कड़वे तलाक और बच्चों की कस्टडी की जंग से जुड़ा है। एक तलाकशुदा मां ने अपने ही नाबालिग बेटे की तरफ से उसकी बुआ (पिता की बहन) पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले यौन उत्पीड़न (पोक्सो मामले के तहत) के आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गहराई से पड़ताल की और पाया कि यह एफआइआर किसी वास्तविक अपराध का परिणाम नहीं, बल्कि पिता द्वारा दर्ज कराई गई एक अन्य शिकायत के जवाब में केवल बदला लेने की नीयत से रचा गया षड्यंत्र थी।
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कोर्ट ने पाया कि जब सितंबर 2023 में आपसी सहमति से तलाक हुआ था, तब ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया था। इसके अलावा, मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए बच्चे के बयान में भी इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'बदला लेने के लिए मासूम बच्चों को हथियार बनाना समाज और कानून दोनों के लिए बेहद शर्मनाक है।'
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले की भी आलोचना की जिसमें बिना रिकॉर्ड की ठीक से समीक्षा किए मामले को खारिज करने से इन्कार कर दिया गया था।
इसने स्पष्ट किया कि जब न्याय प्रक्रिया का इस तरह से निजी हित साधने के लिए दुरुपयोग किया जाने लगे, तो न्यायपालिका मूकदर्शक नहीं रह सकती। मामले की पैरवी कर रही वकील सना रईस खान ने कोर्ट को बताया कि यह मुकदमा कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पुणे के खडकी पुलिस स्टेशन में दर्ज पोक्सो और आइपीसी की धाराओं के तहत बुआ के खिलाफ दर्ज एफआइआर को पूरी तरह से रद कर दिया है।
कोर्ट के इस फैसले से यह उम्मीद बंधती है कि पारिवारिक द्वेष की आग में बेकसूर रिश्तेदारों को अब न्याय मिल सकेगा।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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