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सोनिया गांधी के लिए वोटर लिस्ट मामले में फैसला 13 अगस्त को

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के मामले में एक विशेष अदालत 13 अगस्त को फैसला सुनाएगी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज किया गया था।

25 जुलाई 2026 को 05:14 pm बजे
सोनिया गांधी के लिए वोटर लिस्ट मामले में फैसला 13 अगस्त को

सौजन्य से:- Jagran

वोटर लिस्ट विवाद में सोनिया गांधी को राहत या झटका? विशेष अदालत 13 अगस्त को तय करेगी प्राथमिकी पर फैसला

मतदाता सूची मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर राउज एवेन्यू कोर्ट 13 अगस्त को फैसला सुनाएगा। शिकायतकर्ता ने ना ...और पढ़ें

HighLights

- सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी याचिका पर फैसला 13 अगस्त को।

- नागरिकता से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने का आरोप।

- सोनिया गांधी ने आरोपों को निराधार और राजनीतिक दुर्भावना बताया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मतदाता सूची मामले में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश कोर्ट ने फैसला टास दिया।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि मामले में आदेश 13 अगस्त को सुनाया जाएगा। अदालत ने सोनिया गांधी और शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी को एक अगस्त तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का समय भी दिया है।

शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी ने अदालत से सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश देने की मांग की है। उनका आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज कर लिया गया था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता अप्रैल 1983 में मिली थी।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि उनका नाम वर्ष 1980 में मतदाता सूची में जोड़ा गया, वर्ष 1982 में हटाया गया और फिर वर्ष 1983 में दोबारा शामिल किया गया।

इस मामले में पहले अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने 11 सितंबर 2025 को शिकायत खारिज कर दी थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सत्र अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की। नौ दिसंबर 2025 को पुनरीक्षण अदालत ने सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया था।

सोनिया गांधी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए अदालत में कहा है कि शिकायत पूरी तरह निराधार, राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। उनके जवाब में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई मूल दस्तावेज पेश नहीं किया है और पूरा मामला केवल अटकलों, मीडिया रिपोर्टों व काल्पनिक दावों पर आधारित है।

जवाब में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने न तो मतदाता पंजीकरण आवेदन, न नागरिकता संबंधी दस्तावेज और न ही किसी फर्जी रिकार्ड की प्रति अदालत के समक्ष रखी है। ऐसे में केवल कल्पना और अनुमान के आधार पर लगाए गए आरोपों के आधार पर आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।

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