पेपर लीक और नकल के खिलाफ झारखण्ड का कानून: 10 साल जेल और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना
झारखण्ड में प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक रोकने के लिए एक सख्त कानून बनाया गया है. इस कानून के तहत परीक्षार्थियों को नकल करने या पेपर लीक करने के लिए 3 से 10 साल की जेल और 5 लाख से 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं पेपर लीक करने वालों या परीक्षा में बाधा देने वालों को 10 साल से लेकर जीवनभर की सजा हो सकती है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
झारखंड का एंटी-पेपर लीक कानून चर्चा में, 10 साल की सजा का प्रावधान! इस रिपोर्ट से जानें सबकुछ
छात्र आंदोलन के बीच झारखंड का एंटी-पेपर लीक कानून चर्चा में है.
Published : July 25, 2026 at 7:05 PM IST
रांचीः नीट पेपर लीक मामले में दिल्ली के जंतर मंतर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे छात्र आंदोलन का असर दिखने लगा है. धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे चुके हैं. केंद्र सरकार ने पेपर लीक को रोकने के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी शुरू कर दी है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि झारखंड सरकार इस मामले में साल 2023 में ही सख्त कानून बना चुकी है, जिसका नाम है 'झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023'. यह कानून भर्ती परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों पर कड़ी सजा का प्रावधान करता है.
झारखंड में इस कानून का पहली बार इस्तेमाल जेएसएससी द्वारा लिए गए सीजीएल परीक्षा गड़बड़ी मामले में हुआ है. दूसरी बार इसका इस्तेमाल जेपीएससी 14वीं पीटी परीक्षा गड़बड़ी मामले में हुआ है.
3 अगस्त 2023 को सदन से पारित हुआ था विधेयक
प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की शिकायतों के बीच हेमंत सरकार ने झारखंड विधानसभा से इस विधेयक को 3 अगस्त 2023 को पारित कराया था. इसके बाद राज्यपाल की मंजूरी मिलने पर इसे झारखंड अधिनियम संख्या-15, 2023 के रूप में अधिसूचित किया गया. 29 नवंबर 2023 को इसका प्रकाशन झारखंड राजपत्र (असाधारण) में हुआ और राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से ही यह कानून पूरे राज्य में प्रभावी हो गया. वर्तमान में यह कानून झारखंड में लागू है.
कानून में तय की गई है जवाबदेही
इस कानून का उद्देश्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल, प्रश्नपत्र लीक, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग, परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप और संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना है. इसके तहत परीक्षा कराने वाली एजेंसियों, सेवा प्रदाताओं और परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही भी तय की गई है. कानून के अनुसार सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य हैं. ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित करने का भी प्रावधान किया गया है.
परीक्षार्थी के नकल करने या कराने पर सजा का प्रावधान
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए लागू झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 में नकल और पेपर लीक जैसे मामलों पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. अगर कोई अभ्यर्थी ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा में खुद नकल करते हुए या किसी दूसरे परीक्षार्थी को नकल कराते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे कम से कम 3 साल की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना देना होगा. अगर वही अभ्यर्थी दोबारा नकल करते पकड़ा जाता है, तो कम से कम 7 साल की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा होगी. जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त जेल की सजा भी भुगतनी पड़ेगी.
पेपर लीक करने वालों पर सबसे सख्त कार्रवाई
इस कानून में पेपर लीक, प्रश्नपत्र की सुरक्षा में सेंध, परीक्षा कराने वाली एजेंसी, प्रिंटिंग प्रेस, परीक्षा केंद्र, सेवा प्रदाता या परीक्षा प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत को बेहद गंभीर अपराध माना गया है. ऐसे मामलों में कम से कम 10 साल की जेल, जो आजीवन कारावास तक हो सकती है. साथ ही 1 करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है.
अगर कोई संगठित गिरोह बनाकर पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करता है, तो उसके लिए भी 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और 2 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. वहीं प्रश्नपत्र चोरी करना, ओएमआर शीट या उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ करना या उन्हें अवैध तरीके से हासिल करना जैसे मामलों में 7 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. यानी इस कानून के तहत सबसे कम सजा 3 साल की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माना, जबकि सबसे बड़ी सजा आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना है.
दरअसल, झारखंड में हाल के वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं. भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्ध परीक्षा और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी रहा है. वर्तमान में जीपीएससी की 14वीं पीटी परीक्षा परिणाम को लेकर विवाद गहराया हुआ है.
इस मामले में जीपीएससी के पदाधिकारी समेत परीक्षा आयोजित करने वाली टीडीपीएल कंपनी के कुल आठ लोग जेल भेजे जा चुके हैं. सेवानिवृत आईएएस एल खियांग्ते जीपीएससी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके हैं. उनके आवास पर सीआईडी का छापा पड़ चुका है. छात्रों के आंदोलन और दबाव के बीच जेपीएससी ने मुख्य परीक्षा समेत कई परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है.
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