होमवकील12 सितंबर को तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
वकील

12 सितंबर को तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

चंबा के जिला न्यायालय और उपमंडल न्यायालय तीसा में 12 सितंबर को तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इसके माध्यम से पक्षकार आपसी सहमति और समझौते के आधार पर अपने विवादों का स्थायी समाधान प्राप्त कर सकते हैं। लोक अदालत की ओर से पारित निर्णय सिविल न्यायालय की डिक्री के समान प्रभावी होता है।

17 जुलाई 2026 को 06:13 pm बजे
12 सितंबर को तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

सौजन्य से:- Amar Ujala

{"_id":"6a5a65f9b3ad7c4b67037a06","slug":"the-third-national-lok-adalat-of-the-year-will-be-held-on-september-12-chamba-news-c-88-1-ssml1006-190247-2026-07-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: 12 सितंबर को होगी इस वर्ष की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}

Chamba News: 12 सितंबर को होगी इस वर्ष की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत

Fri, 17 Jul 2026 10:57 PM IST

शिमला ब्यूरो

संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा

संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा

Updated Fri, 17 Jul 2026 10:57 PM IST

विज्ञापन

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

जिला न्यायालय और उपमंडल न्यायालय तीसा में होगा आयोजन

आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर कर सकेंगे स्थायी समाधान

संवाद न्यूज एजेंसी

चंबा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में 12 सितंबर को तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत होगी। इसका आयोजन जिला न्यायालय परिसर चंबा और उपमंडल न्यायालय तीसा में किया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एकांश कपिल ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय प्राप्ति का एक प्रभावी, सरल, त्वरित एवं कम खर्चीला माध्यम है। इसके माध्यम से पक्षकार आपसी सहमति और समझौते के आधार पर अपने विवादों का स्थायी समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

लोक अदालत की ओर से पारित निर्णय सिविल न्यायालय की डिक्री के समान प्रभावी होता है। अंतिम एवं पक्षकारों पर बाध्यकारी होता है। इसके विरुद्ध सामान्यता कोई अपील नहीं होती। जिन मामलों में न्यायालय शुल्क जमा किया गया है, उनमें समझौता होने पर न्यायालय शुल्क वापस कर दिया जाता है।

राष्ट्रीय लोक अदालत में विशेष रूप से धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (चेक अनादरण), मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, वैवाहिक और पारिवारिक विवाद, धन वसूली संबंधी मामले, बैंक ऋण, श्रम, विद्युत व जल बिल संबंधी विवाद, दीवानी, राजस्व प्रकृति के समझौता योग्य मामले और अन्य समझौता योग्य प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा। पूर्व-वाद (प्री-लिटीगेशन ) मामलों का भी लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से निस्तारण करवाया जा सकता है। अधिवक्ताओं से अपेक्षा की गई है कि वे अपने मुवक्किलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए प्रेरित करें।

विज्ञापन

राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार-प्रसार के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विभिन्न विभागों, पंचायतों, शिक्षण संस्थानों, पैरा लीगल वालंटियर्स व अन्य हितधारकों के सहयोग से जागरूकता अभियान भी चला रहा है। इच्छुक व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंबा से दूरभाष नंबर 01899-226309 या ई-मेल आईडी secy-dlsa-cha-hp@ gov.in पर संपर्क कर सकते हैं।

--

विज्ञापन

आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर कर सकेंगे स्थायी समाधान

संवाद न्यूज एजेंसी

चंबा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में 12 सितंबर को तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत होगी। इसका आयोजन जिला न्यायालय परिसर चंबा और उपमंडल न्यायालय तीसा में किया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एकांश कपिल ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय प्राप्ति का एक प्रभावी, सरल, त्वरित एवं कम खर्चीला माध्यम है। इसके माध्यम से पक्षकार आपसी सहमति और समझौते के आधार पर अपने विवादों का स्थायी समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

लोक अदालत की ओर से पारित निर्णय सिविल न्यायालय की डिक्री के समान प्रभावी होता है। अंतिम एवं पक्षकारों पर बाध्यकारी होता है। इसके विरुद्ध सामान्यता कोई अपील नहीं होती। जिन मामलों में न्यायालय शुल्क जमा किया गया है, उनमें समझौता होने पर न्यायालय शुल्क वापस कर दिया जाता है।

विज्ञापन

राष्ट्रीय लोक अदालत में विशेष रूप से धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (चेक अनादरण), मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, वैवाहिक और पारिवारिक विवाद, धन वसूली संबंधी मामले, बैंक ऋण, श्रम, विद्युत व जल बिल संबंधी विवाद, दीवानी, राजस्व प्रकृति के समझौता योग्य मामले और अन्य समझौता योग्य प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा। पूर्व-वाद (प्री-लिटीगेशन ) मामलों का भी लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से निस्तारण करवाया जा सकता है। अधिवक्ताओं से अपेक्षा की गई है कि वे अपने मुवक्किलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए प्रेरित करें।

विज्ञापन

राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार-प्रसार के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विभिन्न विभागों, पंचायतों, शिक्षण संस्थानों, पैरा लीगल वालंटियर्स व अन्य हितधारकों के सहयोग से जागरूकता अभियान भी चला रहा है। इच्छुक व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंबा से दूरभाष नंबर 01899-226309 या ई-मेल आईडी secy-dlsa-cha-hp

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
विरासत में प्राप्त खेती की जमीन बेचने से पहले 'इनसे' पूछना होगा किसे पहले खरीदना है!
वकील

विरासत में प्राप्त खेती की जमीन बेचने से पहले 'इनसे' पूछना होगा किसे पहले खरीदना है!

विशेष लोक अदालत का आयोजन: चेक बाउंस मामलों की सुनवाई के लिए तीन बेंच गठित
वकील

विशेष लोक अदालत का आयोजन: चेक बाउंस मामलों की सुनवाई के लिए तीन बेंच गठित

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वोटर लिस्ट से नाम कटने पर नहीं जाती नागरिकता
वकील

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वोटर लिस्ट से नाम कटने पर नहीं जाती नागरिकता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया कड़ा आदेश, पूरे आदेश का पालन केवल स्टे लेने से नहीं
वकील

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया कड़ा आदेश, पूरे आदेश का पालन केवल स्टे लेने से नहीं

केरल वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
वकील

केरल वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

सुप्रीम कोर्ट ने जीवन रक्षक दवाओं तक पहुंच की याचिका को स्थगित करने के बाद केरल HC पर स्वत: संज्ञान लिया
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने जीवन रक्षक दवाओं तक पहुंच की याचिका को स्थगित करने के बाद केरल HC पर स्वत: संज्ञान लिया

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरसेक्स व्यक्तियों के लिए मान्यता और सुरक्षा की मांग करने वाली याचिका की जांच की
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरसेक्स व्यक्तियों के लिए मान्यता और सुरक्षा की मांग करने वाली याचिका की जांच की

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: SIR में नाम कटने से नागरिकता नहीं जाएगी, चुनाव आयोग को हस्तक्षेप नहीं करना है
वकील

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: SIR में नाम कटने से नागरिकता नहीं जाएगी, चुनाव आयोग को हस्तक्षेप नहीं करना है

ताज़ा ख़बरें