इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया कड़ा आदेश, पूरे आदेश का पालन केवल स्टे लेने से नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नुसरत अंसारी के मामले में कहा है कि जब तक कोई आदेश कानूनी रूप से स्टे नहीं होता, उसका पालन किया जाना ही चाहिए. कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 20 जुलाई को देने के लिए कहा है

सौजन्य से:- ETV Bharat
नुसरत अंसारी केस: 31 जुलाई 2025 के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, 20 जुलाई को मांगी अनुपालन रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने नुसरत अंसारी मामले में कह, जब तक ऊपरी अदालत से स्टे न मिले, तब तक किसी भी अदालती-आदेश का पालन करना अनिवार्य है.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 17, 2026 at 10:27 PM IST
प्रयागराज: प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नुसरत अंसारी के एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए कानून की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक किसी निचली या अन्य अदालत के आदेश को किसी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विधिक रूप से रद्द या स्थगित नहीं किया जाता, तब तक उस आदेश का शत-प्रतिशत पालन किया जाना अनिवार्य है. कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि सिर्फ ऊपरी अदालत में अपील दाखिल कर देने मात्र से पूर्व में जारी किए गए आदेश का महत्व और उसकी विधिक बाध्यता कम नहीं हो जाती. यह कड़ा संदेश और महत्वपूर्ण टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने नुसरत अंसारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दी.
सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय: अदालत ने पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय और राज्य सरकार के सरकारी वकील की दलीलों को विस्तार से सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. इस हाई-प्रोफाइल सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, एजीए रूपक चौबे और पंकज सक्सेना ने अपनी दलीलें रखीं. उन्होंने कोर्ट के समक्ष 31 जुलाई 2025 के पुराने आदेश के पूर्ण अनुपालन के लिए दो दिन का अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग की थी. माननीय कोर्ट ने मामले के पुराने रिकॉर्ड का गहन अवलोकन करते हुए कहा कि 31 जुलाई 2025 का आदेश तकनीकी और कानूनी रूप से अब भी पूरी तरह प्रभावी है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला: इस आदेश को देश या प्रदेश की किसी भी सक्षम अदालत द्वारा अभी तक रोका अथवा स्थगित नहीं किया गया है. कोर्ट ने कानून की इस स्थापित स्थिति को और अधिक स्पष्ट करने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के दो ऐतिहासिक फैसलों का विशेष रूप से जिक्र किया. खंडपीठ ने कहा कि इन दोनों नजीरों के आलोक में यह पूरी तरह साफ है कि जब तक कोई आदेश कानूनी रूप से स्टे नहीं होता, उसका पालन किया जाना ही चाहिए. इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती क्योंकि यह सीधे तौर पर कानून के राज का मामला है.
अगली तारीख पर मांगी एक्शन रिपोर्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंत में राज्य सरकार के वकील के अनुरोध को स्वीकार करते हुए इस मामले को आगामी 20 जुलाई को दोबारा सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही कोर्ट ने सख्त हिदायत दी कि अगली नियत तारीख तक आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट) हर हाल में रिकॉर्ड पर लाई जाए. ऐसा न होने की स्थिति में न्यायालय अवमानना या अन्य सख्त विधिक कदम उठाने पर विचार कर सकता है. इस कड़े आदेश के बाद से ही प्रशासनिक गलियारों और सरकारी वकीलों के पैनल में हलचल तेज हो गई है.
यह भी पढ़ें- अवमानना का सामना करने को रहें तैयार: हाईकोर्ट की चेतावनी- विसरा रिपोर्ट लाएं, नहीं तो खुद हाजिर हों ACP और FSL निदेशक
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