भाई के अतीत को आधार बना कर हाई कोर्ट कर्मचारी की सुरक्षा मंजूरी नहीं रद्द
जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने एक पैनल द्वारा सीआईडी की रिपोर्ट खारिज कर दी, यह कहा गया कि किसी कर्मचारी की सुरक्षा मंजूरी केवल उसके भाई के कथित पूर्वजों के कारण नहीं हटाई जा सकती। पैनल ने फर्दौस अहमद शेख की नियुक्ति को सामान्यीकृत किया और सुरक्षा मंजूरी से इनकार को अनुचित बताया। मामला मुख्य न्यायाधीश को सौंपकर नियुक्ति एवं प्रोमोशन समिति को भेजा गया।

सौजन्य से:- The Times of India
- News
- India News
- Canât deny employee security clearance based on kinâs antecedents: J&K high court
Trending
SRINAGAR: A Jammu and Kashmir high court (HC) panel Tuesday rejected a CID report against an HC staffer, observing that an employee cannot be denied security clearance solely because of his brotherâs alleged antecedents.HC engaged Pampore resident Firdous Ahmad Sheikh as a daily-rated worker on April 1, 2010, and posted him at its Srinagar wing. On July 4, 2024, HC regularised his services as an orderly under the Regularization of Services of Daily Wagers in the High Court of Jammu & Kashmir and Ladakh Regulations, 2022.Like other appointments, Firdousâs regularisation was subject to CID verification, as is required for govt employment in J&K. On Jan 1, 2026, CID denied him security clearance, citing the âheightened adversity of his brother, Abdul Qayoom Sheikhâ.The matter was placed before the Chief Justice, who referred it to the Committee for Appointment and Promotion of Officials, Officers of the High Court Staff, for consideration.
Join conversation
Share your thoughts in the comments
Be respectful · TOI community guidelines
End of Article
Follow Us On Social Media
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मिलेगा नया समर्थन

मेरठ के ब्लू ड्रम हत्याकांड में आज जज सुनाएंगे फैसला, मुस्कान‑साहिल की दोषसिद्धि पर निर्णय

स्कूल में कानून‑नियमों की जागरूकता: पुलिस‑शिक्षकों का 1,722 छात्रों के साथ व्यापक अभियान

मेरठ जिला अदालत ब्लू ड्रम हत्या पर निर्णय: मुस्कान और साहिल की दोषसिद्धि का इंतज़ार

ब्लू ड्रम कांड में निर्णायक दिन: मेरठ की अदालत 30 सितंबर को तय करेगी मुस्कान‑साहिल की सजा

सुप्रीम कोर्ट ने फोर्टिस फोरेंसिक ऑडिट को सीमित किया, बैंकों की व्यापक जांच पर रोक लगाई

सोनभद्र में बाल कानूनी जागरूकता शिविर: बच्चों को अधिकारों की बुनियादी जानकारी

उत्त प्रदेश में मदरसे की मान्यता में कूटलेखित दस्तावेज़, 22 पर FIR, जामताड़ा लोक अदालत के अध्यक्ष भी शामिल
ताज़ा ख़बरें
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोटर सूची संशोधन को लेकर उठे सवाल
- सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या तीन तक पहुंचने की संभावना
- सचिन वज़े को बांड, एंटिलिया बम मामले में 5‑वर्षीय कैद के बावजूद अदालत ने अनुमति दी
- सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत मुल्ला अफरोज की निवारक हिरासत रद्द की, उत्तर प्रदेश पर 10 लाख लागत का आदेश
- सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द की, यूपी सरकार पर ₹10 लाख दंड
- कुशल क़नाल ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की मांग: ‘विधायी विशेषाधिकार’ के खिलाफ मुक्त भाषण की जीत
- दिल्ली हाई कोर्ट ने 10‑साल की बाल पीड़िता को न्यायिक संदेश भेजा, उम्रकैद सजा बरकरार
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प की तीसरे देश में डिपोर्टेशन नीति को फिर से मंजूरी दी

