कानून
मुज़फ़्फ़रनगर के जज रवि कुमार दिवाकर पर सवाल: पाँच महीनों में 23 मौत की सज़ा
ऊपर सत्र जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने 7 सितंबर को नदीम को मौत की सज़ा सुनाई, जो पिछले पाँच महीनों में उनकी सुनवाई गई 23वीं सज़ा है। इस लगातार मिलने वाले फांसी के फ़ैसलों ने यह प्रश्न उठाया है कि क्या मृत्युदंड का प्रयोग अब नियमित हो गया है और इसकी सुनवाई कब‑कभी की जा सकती है।

सौजन्य से:- facebook.com
उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की ज़िला अदालत में अपर सत्र जज रवि कुमार दिवाकर कई हफ़्तों से सुर्ख़ियों में हैं. उनकी अदालत ने 7 सितंबर को नदीम नाम के एक व्यक्ति को मौत की सज़ा सुनाई. पिछले पांच...
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
कानून
कानून के अनुसार लड़कियों से बदसलूकी पर क्या है? सुरक्षा के उपाय क्या हैं?

कानून
अपर सत्र जज रवि कुमार दिवाकर की 23वीं मौत की सज़ा, क्या रूटीन में इतनी सज़ा संभव?

कानून
12 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का कार्यक्रम

कानून
लड़कियों के प्रति दुर्व्यवहार पर कानूनी नियम और सुरक्षा के उपाय

कानून
स्थायी लोक अदालत ने तेज़ सुनवाई के लिये नई SOP अपनाई

कानून
पॉक्सो अधिनियम पर स्कूल में बच्चों को कानूनी सुरक्षा का ज्ञान

कानून
संशोधित भूमि कानून में भूमि-वन डेटा लिंकेज पर चर्चा

कानून
कानून‑जागरूकता प्रतियोगिता में ब्रिगेड 683 की विविध टीमों ने दिखाया उत्साह
ताज़ा ख़बरें
- मंडी में राजस्व न्यायालय ने सुलझाए 594 केस, 1968 इंटकाल दर्ज
- विधायी गुणवत्ता को प्राथमिकता: राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष ने नई सोच की रूपरेखा पेश की
- अदालत के आदेश पर बंदी को पुलिस अभिरक्षा में शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए भेजा गया
- असदपुर में कानूनी जागरूकता शिविर: मध्यस्थता और लोक अदालत से विवाद सुलझाने की सलाह
- मधु कोड़ा ने एमएमडीआर संशोधन को राजनीतिक मुद्दा बना कर सरकार पर आरोप, खदानों के शीघ्र संचालन की मांग
- नगर निगम के सभागार में दूरसंचार पेंशन सुनवाई का आयोजन
- फू ले कम्यून में छात्रों को कानूनी जागरूकता देने के लिए पुलिस ने व्यापक अभियान चलाया
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मिलेगा नया समर्थन

