CAA-NRC बवाल: सुप्रीम कोर्ट की लोक अदालत का ऑफर खारिज, 195 आरोपितों का 11 लाख के नुकसान की भरपाई से इंकार - rampur caa nrc violence accused refuse property damage fine supreme court lok adalat
CAA-NRC बवाल: सुप्रीम कोर्ट की लोक अदालत का ऑफर खारिज, 195 आरोपितों का 11 लाख के नुकसान की भरपाई से इंकार रामपुर में सीएए-एनआरसी बवाल के आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में संपत्ति नुकसान की भरपाई से इनकार क…

सौजन्य से:- Jagran
CAA-NRC बवाल: सुप्रीम कोर्ट की लोक अदालत का ऑफर खारिज, 195 आरोपितों का 11 लाख के नुकसान की भरपाई से इंकार
रामपुर में सीएए-एनआरसी बवाल के आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में संपत्ति नुकसान की भरपाई से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि स्थानीय अदालतों में आपराधिक मुकदमे लंबित हैं और भुगतान से निर्णय प्रभावित हो सकता है।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत (समाधान समारोह) में मध्यस्थता के लिए भेजी थी फाइल
भास्कर सिंह, रामपुर। सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) के विरोध में बवाल के मुकदमों में आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से लग रही विशेष लोक अदालत (समाधान समारोह) में संपत्ति नुकसान का पैसा जमा करने से इन्कार कर दिया है। इसकी वजह स्थानीय कोर्ट में चल रहे आपराधिक मुकदमे को बताया गया है। इस मुकदमे में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
सात साल पहले सीएए और एनआरसी के विरोध में प्रदेश के कई जिलों में विरोध हुआ था। प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली के लिए उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली दावा अधिकरण का गठन किया गया था।
पश्चिमी क्षेत्र के जिलों के लिए यह अभिकरण मेरठ में बनाया गया था। उत्तर प्रदेश लोक और निजी संपत्ति क्षति वसूली दावा न्यायाधिकरण मेरठ ने रामपुर के 195 लोगों को दोषी मानते हुए इनसे 1108901 रुपये वसूली का आदेश दिया था।
इस तरह प्रत्येक दोषी को 5687 रुपये बतौर अर्थदंड जमा करना है। हालांकि इस आदेश के खिलाफ आरोपितों ने हाई कोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने आरोपितों को 50 फीसद धनराशि चार सप्ताह के अंदर जमा करने और बाकी धनराशि जमा करने या न करने का निर्णय मुकदमे के फैसले के आधार पर किए जाने के आदेश दिए थे।
हाईकोर्ट के आदेश को आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने तब चार सप्ताह के लिए वसूली पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार से तीन दिन के लिए विशेष लोक अदालत (समाधान समारोह) का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें करीब एक लाख मुकदमों का निस्तारण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
समाधान समारोह में आपसी सहमति से वादों का निस्तारण होगा। इसमें एनआरसी बवाल से संंबंधित वसूली वादों को भी शामिल किया गया। इसी संबंध में अगस्त के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने यहां बवाल के 16 आरोपितों की पत्रावली भी मध्यस्थता के लिए भेजी थी।
जिस पर पुलिस द्वारा उन्हें नोटिस भेजकर बुलाया गया और मध्यस्थता केंद्र भेजकर वसूली वाद का निस्तारण विशेष लोक अदालत में कराने की जानकारी दी गई।
अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि 16 आरोपितों की जानकारी आई थी, जिसमें कुछ दूसरे जिलों के नाम थे। सात-आठ लोग ही मिले, जिन्हें मध्यस्थता केंद्र में अपनी बात रखने के लिए नोटिस भेजा गया था।
आरोपितों के अधिवक्ता सैयद आमिर मियां ने बताया कि आरोपित सगीर अहमद, सलीम खां, शाहनवाज तुर्की, हमजा, जलील खां, फैज आमिर और फसाहत के नाेटिस आए थे। सभी ने इन्कार कर दिया है। उन्होंने बताया कि बवाल के मुकदमे स्थानीय अदालत में विचाराधीन है।
अभी इन मुकदमों में निर्णय नहीं आया है। बिना निर्णय के वसूली का पैसा जमा करना मुकदमे के निर्णय को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण से हमने मेरठ के न्यायाधिकरण के संपत्ति वसूली के आदेश को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
यह था बवाल प्रकरण
शहर में बवाल की घटना 21 दिसंबर 2019 को हुई थी। सीएए और एनआरसी के विरोध में शाहबाद गेट पर जलसे का आयोजन किया गया था। इसके लिए भीड़ सड़कों पर आ गई थी। भीड़ ने कई जगह हिंसक प्रदर्शन किया था।
हाथीखाना चौराहे पर पुलिस से मारपीट और पथराव किया था। छह बाइक और पुलिस की एक जीप भी फूंक दी थी। इस दौरान गोली चलने से एक युवक की मौत हो गई थी। पुलिस पर भीड़ ने पेट्रोल बम तक फेंके थे।
पुलिस ने इस मामले में गंज और शहर कोतवाली में हजारों लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे। मुकदमे बलवा, जानलेवा हमला, लूट, हत्या, मारपीट, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, सात क्रिमनल ला अमेंडमेंट एक्ट आदि धाराओं में दर्ज किए गए थे।
पुलिस पर पथराव करते हुए भीड़ के फोटो के जरिए पुलिस ने आरोपितों की पहचान कर गिरफ्तारियां की थीं। हमलावरों पहचान होने के बाद इनसे सरकारी संपत्ति की वसूली के आदेश हुए थे।
यह भी पढ़ें- रामपुर: 500 करोड़ के विवाद में फंसी जौहर यूनिवर्सिटी, आजम खान के विक्टिम कार्ड पर BJP का पलटवार
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