अलीगढ़: बेटी के फांसी की मांग, अदालत ने मां और प्रेमी को उम्रकैद की सजा
अलीगढ़ में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई। छह साल की एक बच्ची ने अदालत में अपनी मां के खिलाफ फांसी की मांग की। अदालत ने हत्या के मामले में मां और प्रेमी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

सौजन्य से:- Jagran
‘ऐसी मां को तो फांसी मिलनी चाहिए’, अलीगढ़ की अदालत में छलक आए छह साल की बेटी के आंसू; क्या है पूरा मामला?
अलीगढ़ में पति की हत्या के मामले में पत्नी और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। मृतक की छह साल की बेटी और नाबालिग बेटे की गवाही इस फैसल ...और पढ़ें
HighLights
- मां और प्रेमी को पति की हत्या में उम्रकैद।
- छह साल की बेटी ने मां के लिए फांसी मांगी।
- नाबालिग बेटे की गवाही ने अहम भूमिका निभाई।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। पति की हत्या कराने वाली मां के खिलाफ उसकी ही छह साल की बेटी के मुंह से निकले शब्दों ने अदालत का माहौल गमगीन कर दिया। न्यायाधीश ने जब बच्ची से पूछा कि ‘आप क्या चाहती हो?’ तो उसने रोते हुए कहा, ‘ऐसी मां को तो फांसी मिलनी चाहिए।’ बच्ची की बात सुनकर अदालत में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
इस मामले में मृतक के नाबालिग बेटे की गवाही भी बेहद अहम रही। मां के खिलाफ बेटे के गवाही पर ही अदालत ने पति की हत्या कराने वाली महिला व उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह सनसनीखेज घटना 10 जुलाई 2025 को बरला कस्बे के मुहल्ला कोठी में हुई। जहां सुरेश की गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या की रिपोर्ट सुरेश के भाई विजय सिंह ने दर्ज कराई।
रिपोर्ट में उसने बताया कि उसके भाई सुरेश की पत्नी बीना के मुहहल्ले के ही मनोज से प्रेम संबंध थे। घटना वाले दिन विजय अपने भाई सुरेश के साथ घर के बाहर बैठा था। बीना भी दरवाजे पर खड़ी थी। इसी दौरान मनोज वहां पहुंचा।
आरोप है कि बीना ने मनोज से कहा कि सुरेश को गोली मार दो, आज इसे जिंदा मत छोड़ना। इसके बाद मनोज ने तमंचे से सुरेश को गोली मार दी। गोली लगने से सुरेश की मौके पर ही मौत हो गई। विजय भाई को बचाने के लिए दौड़ा तो मनोज ने उस पर भी फायर किया, लेकिन गोली दीवार में जा लगी। पुलिस ने बीना और मनोज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जेपी राजपूत ने बताया कि विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने गवाह और साक्ष्य पेश किए। इनमें मृतक के नाबालिग बेटे की गवाही को अहम माना गया। बेटे ने मां पर ही पिता की हत्या कराने का आरोप लगाया।
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गुरुवार को दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय तोष कुमार शर्मा ने बीना और मनोज को दोषी मानते हुए उम्रकैद और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
फैसले के बाद भी अदालत में सबसे ज्यादा चर्चा उस छह साल की बच्ची के शब्दों की रही, जिसने अपनी मां के लिए उम्रकैद को भी कम बताते हुए फांसी की मांग कर दी।
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