आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को अदालत से बड़ी राहत
आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को जबरन वसूली और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी कर दिया गया है। अदालत ने जांच में कमियों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के भरोसेमंद न होने के आधार पर उन्हें राहत दी।

सौजन्य से:- Hindustan
AAP के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को राहत, अदालत ने 2 गंभीर आरोपों से बरी किया
आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें जबरन वसूली और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने जांच में कमियों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के भरोसेमंद न होने के आधार पर उन्हें राहत दे दी।
दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को जबरन वसूली और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने जांच में कमियों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के भरोसेमंद न होने की बात कही। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता का मोबाइल तक जब्त नहीं किया गया, जबकि यह मामला कथित तौर पर गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू द्वारा एक इंटरनेशनल नंबर से की गई जबरन वसूली की कॉल का था।
कपिल सांगवान उर्फ नंदू के खिलाफ 2023 में जबरन वसूली, आपराधिक साजिश आदि के कथित अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज की गई थी। दिल्ली पुलिस ने नवंबर 2024 में बाल्यान को गिरफ्तार किया था। हालांकि, उन्हें 4 दिसंबर 2024 को जमानत मिल गई थी, लेकिन जमानत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें कोर्ट रूम से ही मकोका मामले में गिरफ्तार कर लिया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने इस बात पर गंभीर सवाल उठाए कि नरेश बाल्यान के खिलाफ जांच नवंबर 2024 में क्यों शुरू की गई, जबकि फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव होने वाले थे। यह मामला कथित तौर पर कपिल सांगवान उर्फ नंदू द्वारा एक इंटरनेशनल नंबर से की गई जबरन वसूली की कॉल से जुड़ा है।
एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) पारस दलाल ने नरेश बाल्यान को उन आरोपों से बरी कर दिया जिनके लिए उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।एसीजेएम ने 31 जुलाई को आदेश दिया कि इस कोर्ट का मानना है कि अभियोजन पक्ष नरेश बाल्यान पर ऐसे गंभीर संदेह नहीं जता पाया है जिनके आधार पर उन पर जबरन वसूली के लिए कपिल सांगवान के साथ आपराधिक साजिश रचने या सबूत मिटाने के आरोप तय किए जा सकें। इसलिए, आरोपी नरेश बाल्यान को उन सभी अपराधों से बरी किया जाता है, जिनके लिए चार्जशीट दाखिल की गई थी।
कोर्ट ने कहा कि पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को बरी कर दिया गया है। यह एक विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट है, इसलिए यह अदालत कपिल सांगवान के खिलाफ उनकी अनुपस्थिति में आगे की कार्रवाई नहीं कर सकती। जांच अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे फाइल वापस ले लें और कपिल सांगवान की गिरफ्तारी होने पर उसे संबंधित कोर्ट में पेश करें।
कपिल सांगवान उर्फ नंदू और नरेश बाल्यान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 387 (जबरन वसूली) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत अपराधों के लिए चार्जशीट दाखिल की गई थी। कपिल सांगवान पर IPC की धारा 174A (गिरफ्तारी से बचना) के तहत अपराध करने का आरोप भी लगाया गया और आरोपी नरेश बालियान पर IPC की धारा 201 के तहत अपराध करने का आरोप लगाया गया।
5 जुलाई 2023 को एफआईआर दर्ज किया गया था
आरोप है कि 31 मई 2023 को शिकायतकर्ता गुरचरण सिंह को एक इंटरनेशनल नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम कपिल सांगवान उर्फ नंदू बताया और धमकी दी कि अगर उन्होंने एक करोड़ रुपए की जबरन वसूली की रकम नहीं दी तो उन्हें भी सुरेंद्र मटियाला की तरह खत्म कर दिया जाएगा। यह भी आरोप लगाया कि आवाज साफ न होने के कारण उन्हें उसी धमकी भरे मैसेज वाला एक वॉयस नोट भी मिला। इसके बाद 1 जून 2023, 8 जून 2023 और 1 जुलाई 2023 को बार-बार कॉल आए, जिसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई और 5 जुलाई 2023 को यह एफआईआर दर्ज की गई।
30 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था
अगस्त 2023 में जांच अधिकारी ने सोशल मीडिया पर कपिल सांगवान और नरेश बालियान के बीच जबरन वसूली के लेन-देन से जुड़ी एक ऑडियो क्लिप देखी, जो फेसबुक और ट्वीटर जैसे कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गई थी। जांच में पता चला कि यह वायरल ऑडियो/वीडियो दिल्ली के मोहन गार्डन थाने में दर्ज 2023 के एक मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक न्यूज चैनल से हासिल किया था। उस चैनल ने एक प्रोग्राम में यह ऑडियो भी दिखाया था। न्यूज प्रोग्राम की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जब्त कर ली गई थी। इसके बाद, नवंबर 2024 में ये ऑडियो फिर से सामने आए। इस तरह जांच की कड़ियां नरेश बाल्यान तक पहुंचीं और उन्हें 30 नवंबर 2024 को गिरफ्तार कर लिया गया।
मोबाइल को जब्त नहीं किया गया था
नरेश बालियान की ओर से वकील विवेक जैन, रोहित कुमार दलाल और सादिक नूर ने दलील की कि एफआईआर में लगाए गए आरोप सच हैं कि शिकायतकर्ता को धमकी भरी ऑडियो फाइलें मिली थीं। हालांकि, असली डिवाइस को सुरक्षित रखने के लिए उस मोबाइल को जब्त नहीं किया गया था। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि इसी तरह, फेसबुक पर अपलोड की गई दो ऑडियो फाइलों के ओरिजिनल सोर्स का भी पता नहीं लगाया जा सका और इन दो ऑडियो को रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किए गए डिवाइस की 'चेन ऑफ कस्टडी' (डिवाइस किसके पास और कैसे रहा) को साबित करने के लिए कोई गवाह नहीं है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि शिकायतकर्ता का मोबाइल जब्त या एनालाइज नहीं किया गया था। इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर ने कथित तौर पर पांच ऑडियो फाइलों वाली एक पेन ड्राइव हासिल की थी। इसके अलावा जांच अधिकारी ने कभी भी उनके सोर्स से ओरिजिनल ऑडियो फाइलें जब्त नहीं कीं, जो अगस्त 2023 में फेसबुक पर मौजूद थीं।
आरोपी के खिलाफ कुछ भी नहीं बचता
बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि अगर जांच अधिकारी से मिले इन दो सबूतों को हटा दिया जाए तो पूरी पुलिस रिपोर्ट में आरोपी के खिलाफ कुछ भी नहीं बचता। यह भी तर्क दिया गया कि अगर इन ऑडियो फाइलों पर विचार भी किया जाए तो भी इन्हें सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये सबूत के नियमों के खिलाफ हैं। नरेश बाल्यान को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह एक स्थापित बात है कि साजिश शायद ही कभी खुलेआम रची जाती है, इसलिए इसका कोई सीधा सबूत नहीं मिल सकता। कोर्ट ने यह भी बताया कि ऑडियो फाइलों का कोई भरोसेमंद स्रोत नहीं था।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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