सड़कों पर छोड़े जाकर जानवरों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो लोग पशुओं को पालना चाहते हैं, उन्हें हमेशा उनकी देखभाल करनी चाहिए। अदालत ने आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से उपाय ढूंढ़ने को कहा है।

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ए कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि जो लोग पशुओं को पालना चाहते हैं, उन्हें हमेशा उनकी देखभाल करनी चाहिए। लाइवलॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जब ये जानवर आर्थिक तौर पर इस्तेमाल लायक नहीं रह जाते तो उन्हें यूं ही सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं और न ही उन्हें उनकी सुरक्षा की चिंता रह जाती है।
'कोई उससे पेट भरता है तो हमें बुरा लगता है'
बेंच ने कहा, 'हम पहले ही इस मुद्दे पर बात कर चुके हैं कि जब जानवरों की उपयोगिता कम हो जाती है तो उन्हें छोड़ देते हैं। आदर्श दुनिया में यह नहीं होता। किसी जानवर को अगर लोग घर लाते हैं, तो उन्हें यह भी तय करना चाहिए कि उनकी जीवन भर देखभाल की जाए। पर हकीकत यह है कि हम इंसानों की उस दुनिया में रहते हैं, जिसमें कई कमियां हैं।''पशुओं को अधिकृत शेल्टर तक पहुंचाएं'
- सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि 'पालतू और अन्य जानवरों में स्पष्ट अंतर' है।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर, हाइवे पर घूमने वाले अधिकतर मवेशी वे हैं, जिन्हें विशेष आर्थिक इरादे से लाया जाता है।
- एक बार जब उनका काम पूरा हो जाता है या वे उत्पादक नहीं रह जाते तो अक्सर उन्हें छोड़ दिया जाता है।
- बेंच ने यह भी माना कि कई किसान और डेयरी मालिकों के पास इतने आर्थिक संसाधन नहीं हैं कि उन्हें उपयोगी नहीं रह जाने पर भी उनकी देखभाल कर सकें।
- अदालत ने कहा कि इसका मतलब ये नहीं कि उन्हें आवारा छोड़ देना कोई समाधान है।
- सुप्रीम कोर्ट ने सलाह दी कि अगर लोग अपने मवेशियों को छोड़ने का फैसला करते हैं तो उन्हें यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि उन्हें अधिकृत शेल्टर तक पहुंचाएं।
24 राज्यों में मवेशी हत्या के खिलाफ कानून
- सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी आवारा पशुओं की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं के बड़े मुद्दे पर सुनवाई के दौरान की हैं।
- सर्वोच्च अदालत ने आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से उपाय ढूंढ़ने को कहा है।
- जजमेंट में यह भी कहा गया है कि 24 राज्यों में मवेशी हत्या के खिलाफ कानून हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों को सही तरीके लागू नहीं किया जा रहा।
- सुप्रीम कोर्ट की ये तमाम टिप्पणियां एक विधवा की अपील पर आई हैं, जिसके पति की 2007 में पंजाब के संगरूर में आवारा सांड के हमले में मौत हो गई थी।
- अदालत ने महिला को अपने फैसले में 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का फैसला सुनाया है।
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