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फरीदाबाद में विशेष लोक अदालत ने 474 चेक बाउंस मामलों का निपटारा, 4.35 करोड़ रुपये के समझौते पर

फरीदाबाद के जिला अदालत परिसर में आयोजित विशेष लोक अदालत में 1053 चेक बाउंस मामलों की सुनवाई की गई। 474 मामलों में पक्षों के बीच आपसी सहमति से निपटारा हुआ और कुल 4.35 करोड़ रुपये का समझौता हुआ। इस प्रक्रिया के दौरान कोर्ट फीस भी वापस कर दी गई और पक्षों को संतोषजनक समाधान मिला।

3 अक्टूबर 2026 को 02:04 pm बजे
फरीदाबाद में विशेष लोक अदालत ने 474 चेक बाउंस मामलों का निपटारा, 4.35 करोड़ रुपये के समझौते पर

सौजन्य से:- Hindustan

स्पेशल लोक अदालत में चेक बाउंस के 474 मामलों का निपटारा

-सुनवाई के लिए 1053 मामले रखे गए -4.35 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पर हुआ समझौताफरीदाबाद, संवाददाता। जिला अदालत परिसर सेक्टर-12 में शनिवार को चेक बाउंस मामलों के निस्तारण के लिए स्पेशल लोक अदालत आयोजित...

फरीदाबाद, संवाददाता। जिला अदालत परिसर सेक्टर-12 में शनिवार को चेक बाउंस मामलों के निस्तारण के लिए स्पेशल लोक अदालत आयोजित की गई। लोक अदालत में चेक बाउंस से संबंधित 1053 मामले सुनवाई के लिए रखे गए, जिनमें से 474 मामलों का आपसी सहमति और समझौते के आधार पर निपटारा किया गया। इन मामलों में 4.35 करोड़ रुपये की रकम पर समझौता हुआ।

विशेष अदालत के निर्देश

हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी चेयरमैन एवं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति हर सिमरन सिंह सेठी के दिशा-निर्देशानुसार प्रदेश के प्रत्येक जिले में चेक बाउंस मामलों के निस्तारण के लिए स्पेशल लोक अदालत आयोजित की गई। इसी क्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फरीदाबाद के चेयरमैन सुधीर जीवन के निर्देशानुसार आयोजित लोक अदालत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव जितेंद्र सिंह की देखरेख में संपन्न हुई।

मामलों का निपटारा

लोक अदालत में मामलों की सुनवाई के दौरान पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से विवादों का समाधान कराया गया। 474 मामलों के निस्तारण के बाद संबंधित पक्षकार अपने मामलों के समाधान से संतुष्ट दिखाई दिए। इस अवसर पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं सचिव जितेंद्र सिंह ने कहा कि लोक अदालत में होने वाले फैसलों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय तक कोई अपील नहीं होती। साथ ही, पक्षकारों की कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का स्थायी समाधान होता है। इससे लोगों के समय और धन की बचत होती है तथा आपसी भाईचारा और सौहार्द भी बना रहता है।

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अमित भाटिया

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