बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, स्लम वासियों को एसआरए परियोजना को जकड़ नहीं सकता
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक भूमि पर घुड़सवारी जैसा लेन‑देन खुले तौर पर चलता है और स्लम वासियों को एसआरए परियोजना को रोकना संभव नहीं। अदालत ने फरवरी 2026 के आदेश को निरस्त किया, जिसमें रुपरेल बिल्डकॉन को बड़े चेंबूर प्रोजेक्ट से हटाने का निर्देश दिया गया था, जबकि 16 एकड़ जमीन पर काम जारी था। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्लम सोसाइटीयों की सहमति से किए गए समझौते को एसआरए द्वारा अनदेखा नहीं किया जा सकता।

सौजन्य से:- The Times of India
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- Some slum dwellers canât hold SRA project to ransom: Bombay High Court
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Mumbai: Bombay High Court observed that âhorse trading on public lands is an open affairâ, saying some slum dwellers cannot hold a slum rehabilitation authority (SRA) project to ransom. HC said State govt and public bodies must actively try and undertake redevelopment projects on their own land.The HC ruled against enforcing a Feb 2026 directive of the SRA chief to remove one builder â Ruparel Buildcon â as developer of a large Chembur project after substantial progress already made in the project. The land is a large 16-acre sprawl. The slum federation comprises 33 slum societies. The builder said his appointment had resulted from a consent from a slum federation and consent terms from previous litigation.Some of these slum societies denied giving their consent to the project with a chequered history with builders earlier appointed. The builder, Ruparel Buildcon, had moved the HC to challenge a February order by SRA to remove him. For any of the slum dwellers or their societies to contend that the agreement entered into between the parties to the consent terms is of no consequence or redundant and not enforceable by the SRA is âquite untenableâ, the HC concluded.
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