45 फीसदी सांसदों पर क्रिमिनल केस, 14 मुख्यमंत्रियों पर भी कई मुकदमें, सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश
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सौजन्य से:- AajTak
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सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र (अमाइकस क्यूरी) वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने देश में राजनीति के अपराधीकरण को लेकर शीर्ष अदालत में एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की है. रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल 326 मौजूदा सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. साथ ही वर्तमान और पूर्व सांसदों व विधायकों को मिलाकर कुल 4,192 आपराधिक मामले अदालतों में लंबित हैं.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के आंकड़ों और विभिन्न हाईकोर्ट से प्राप्त जानकारी पर आधारित इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के 776 मौजूदा सांसदों में से लगभग 45 फीसदी यानी 326 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि देश भर की अदालतों में वर्तमान और पूर्व सांसदों व विधायकों पर कुल 4,192 मुकदमे चल रहे हैं. इस रिपोर्ट में विशेष अदालतों में इन मामलों की रोजाना सुनवाई की मांग की गई है.
लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सांसदों पर आपराधिक मामले
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 326 दागी सांसदों में से लोकसभा के 543 में से 251 और राज्यसभा के 233 में से 75 सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज हैं.
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि लोकसभा के 170 सांसदों और राज्यसभा के 40 सांसदों पर ऐसे गंभीर मामले दर्ज हैं, जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा सजा का प्रावधान है जो कि बेहत गंभीर आपराधिक मामलों में आते हैं.
14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमें दर्ज
रिपोर्ट में सामने आया है कि देश के 28 राज्यों में से 14 मौजूदा मुख्यमंत्रियों के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. इस लिस्ट में तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी 89 मामलों के साथ सबसे ऊपर हैं. राज्यों के आधार पर देखें तो केरल के 95% (20 में से 19) और तेलंगाना के 82% सांसदों पर आपराधिक आरोप हैं. जबकि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार के करीब 50% सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि से आते हैं.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्तमान और पूर्व सांसदों-विधायकों को मिलाकर अदालतों और थानों में कुल 4,192 मामले लंबित हैं. न्याय मित्र ने राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इन मामलों की विशेष अदालतों में रोजाना सुनवाई कराई जाए और एक साल के अंदर इनका अंतिम निपटारा सुनिश्चित किया जाए.
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