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इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; 40 साल तक अटकी रही हत्या की अपील पर जताई चिंता - supreme court concern over rising pendency of cases in allahabad high court

इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; 40 साल तक अटकी रही हत्या की अपील पर जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने हत्या के…

Jagran के अनुसार9 जून 2026 को 09:21 pm बजे
इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; 40 साल तक अटकी रही हत्या की अपील पर जताई चिंता - supreme court concern over rising pendency of cases in allahabad high court

सौजन्य से:- Jagran

इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; 40 साल तक अटकी रही हत्या की अपील पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति ...और पढ़ें

HighLights

40 साल तक लंबित रही हत्या मामले की अपील को बताया असाधारण स्थिति

कहा, मामलों के अंबार के कारण बड़ी संख्या में लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंच रहे हैं

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की अपील 40 वर्षों से अधिक समय तक लंबित रहने को न्यायिक व्यवस्था के लिए असाधारण स्थिति बताया।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर की पीठ ने सोमवार को पूछा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में बढ़ती पेंडेंसी से निपटने और न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कौन से नए उपाय अपनाए जा सकते हैं।

मामला कानपुर के विजय सिंह से जुड़ा है, जिन्हें 1985 में अपने भाई की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उनकी अपील पर फैसला आने में करीब 41 वर्ष लग गए। हाईकोर्ट ने इसी वर्ष फरवरी में उनकी अपील खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि विजय सिंह केवल तीन महीने जेल में रहे और बाद में जमानत पर रिहा होकर लगभग 43 वर्ष तक अपनी अपील के निपटारे का इंतजार करते रहे। अदालत ने फिलहाल उनकी जमानत जारी रखने का निर्णय लिया है।

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पीठ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में अत्यधिक लंबित मामलों के कारण बड़ी संख्या में याचिकाकर्ता शीघ्र सुनवाई की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे हैं। अदालत ने इस समस्या के समाधान के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं से सुझाव भी मांगे।

हालांकि, तीन दशक से अधिक पुराने मामलों को केवल लंबित रहने के आधार पर समाप्त करने के सुझाव को पीठ ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि न्याय के मूल सिद्धांत ऐसे मामलों को सिर्फ देरी के आधार पर खारिज करने की अनुमति नहीं देते, क्योंकि इससे जनहित प्रभावित हो सकता है और पक्षकारों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिल पाएगा।

अपनी याचिका में 72 वर्षीय विजय सिंह ने कहा है कि उन्होंने अपना पूरा यौवन, मध्य आयु और अब वृद्धावस्था भी एक आपराधिक दोषसिद्धि की छाया में बिताई है, जबकि उनकी अपील चार दशकों तक लंबित रही।

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