पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून को मंजूरी, 10 साल की जेल और 10 करोड़ का जुर्माना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक रोकने संबंधी कानून में संशोधन को मंजूरी दी है, जिसमें 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना शामिल है। यह फैसला नीट परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध के बीच लिया गया है।

सौजन्य से:- Hindustan
कैबिनेट ने पेपर लीक के खिलाफ कड़े कानून को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार मध्य रात्रि के वीडियो संदेश के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक रोकने संबंधी कानून में कड़े संशोधनों को मंजूरी दी है। नए प्रावधानों में शामिल पाए गए लोगों को अधिकतम 10 साल जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना होगा। यह फैसला नीट परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में लिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरूवार मध्य रात्रि जारी किए गए वीडियो संदेश के अनुरूप केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पेपर लीक रोकने संबंधी कानून में बड़े और कड़े प्रावधानों वाले संशोधनों को मंजूरी दे दी है। नए प्रावधानों के अनुसार पेपर लीक में शामिल पाए गए लोगों को अधिकतम 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार की ओर से अभी मसौदे की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सूत्रों ने कहा कि 2024 में लागू हुए कानून में सजा के प्रावधानों को संशोधित कानून में ज्यादा सख्त बनाया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा कानून में न्यूनतम सजा तीन साल थी, जिसे बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया है। जबकि राशि को एक करोड़ रूपए से बढ़ाकर अधिकतम दस करोड़ तक किया जा रहा है। यह फैसला देशभर में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और छात्रों की मांगों के बीच लिया गया है。
तीन माह में सजा पर फैसला
- पेपर लीक माफिया के खिलाफ और कड़े दंडात्मक प्रावधान जोड़े जाएंगे
- स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को वैधानिक दर्जा दिया जाएगा
- इन फास्ट ट्रैक कोर्ट का दायित्व होगा कि मामले का निपटारा कर तीन महीने के भीतर सजा का फैसला सुनाया जाए
- जांच प्रक्रिया भी समयबद्ध (टाइम -बाउंड ) होगी, ताकि मामलों में अनावश्यक देरी न हो
संसद में जल्द पेश होगा बिल
सूत्रों ने कहा कि सरकार जल्द ही यह बिल संसद में पेश करेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्देश दिए हैं कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस बिल में कोई देरी न हो। सरकार का मानना है कि नए सख्त प्रावधानों से प्रतियोगी परीक्षाओं की साख बहाल करने में मदद मिलेगी और पेपर लीक करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
प्रदर्शनकारियों से वार्ता के बाद फैसला
कैबिनेट का यह फैसला प्रदर्शनकारी छात्रों से लगातार चल रही वार्ताओं के बाद आया है। किरेन रिजिजू ने कहा कि इस समय सबसे बड़ा मुद्दा छात्रों का भविष्य है। परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही बाधित करने से कोई समाधान नहीं निकलेगा।
पुराने कानून में प्रावधान
पुराने कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय होंगे, पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है। अपराधों को गैर-जमानती बनाया गया था। यह प्रावधान बने रहेंगे। समझौता न किए जा सकने वाले (नॉन कंपाउडेबल) होंगे यानी पक्षकार आपसी समझौते से मामला खत्म नहीं कर सकते।
पुराने कानून में कम से कम 3 साल और अधिकतम 5 साल की जेल। इसे बढ़ाकर न्यूनतम पांच साल और अधिकतम दस साल तक किया जा सकता है। पुराने कानून में अपराध में शामिल निजी लोगों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त कारावास। इसे भी ज्यादा सख्त बनाया जा रहा है।
परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी/सर्विस प्रोवाइडर परीक्षा आयोजित करने वाले एजेंसी पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना बढ़ाकर दस करोड़ तक हो सकता है। परीक्षा कराने में हुए खर्च की वसूली। कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की जेल की सजा के प्रावधान भी ज्यादा सख्त होंगे।
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