सोनम रघुवंशी की जमानत पलटी, सुप्रीम कोर्ट का हैरानी का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने बीस दिन की सुनवाई के बाद सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है. इस मामले में सोनम को अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. शिलांग की लोअर कोर्ट ने पहले सोनम को जमानत दी थी, जिसे मेघालय हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच करते हुए सोनम की जमानत रद्द कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को तीन हफ्ते के अंदर मेघालय पुलिस के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को एक राहत भी दी है, जिसमें कहा गया है कि अगर अगले छह महीने के अंदर राजा रघुवंशी मर्डर केस का फैसला नहीं होता है, तो सोनम को फिर से जमानत मिल सकती है.

सौजन्य से:- AajTak
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शिलांग की लोअर कोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 को सोनम रघुवंशी को ज़मानत पर रिहा करने का हुक्म दिया. फिर मेघालय हाई कोर्ट ने 29 जून 2026 को सोनम को ज़मानत देने के निचली अदालत के फ़ैसले को बरकरार रखा. लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई 2026 के दिन सोनम को ज़मानत देने के मेघालय हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया और सोनम को तीन हफ्ते के अंदर मेघालय पुलिस के सामने सरेंडर करने का हुक्म दिया है.
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देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में बीस दिन की सुनवाई के बाद आखिरकार सोनम रघुवंशी की दो-दो अदालतों से मिली ज़मानत ख़ारिज हो गई है और अब अगलते तीन हफ्तों के अंदर सोनम को वापस फिर से जाल जाना होगा. हालांकि सुप्रम कोर्ट ने सोनम को एक राहत भी दी है. कोर्ट ने कहा है कि अगर अगले छह महीने के अंदर राजा रघुवंशी मर्डर केस में कोर्ट ट्रायल पूरा नहीं कर पाता है, तो सोनम ज़मानत की नई अर्ज़ी दे सकती है.
यानी अगले छह महीने में अगर निचली अदालत ने मुकदमे का फैसला नहीं सुनाया तो सोनम को वापस ज़मानत वापस मिल सकती है. अब ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या अगले छह महीने में सोनम के पति राजा रघुवंशी मर्डर केस का फैसला आ सकता है?
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तो ज़मानत पर बहस के दौरान मेघालय सरकार की तरफ से पेश सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राजा रघुवंशी मर्डर केस में चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुका है, अब बस चार्ज फ्रेम होना है. चार्जशीट में मेघालय पुलिस ने कुल 94 गवाहों को रखा है. अब देखना ये है कि सभी 94 गवाहों की गवाही अगले छह महीने में पूरी हो पाती है या नहीं?
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी के आधार को लेकर उठाई गई आपत्ति का कोई ठोस आधार नहीं है. उनका कहना था कि रिकॉर्ड और चार्जशीट में यह साफ-साफ दर्ज है कि आरोपी ने खुद सरेंडर किया था. साथ ही उन्होंने दोहराया कि तकनीकी गलतियों के आधार पर मिली जमानत को जारी रखाना गलत होगा.
दरअसल, मेघालय पुलिस ने राजा रघुवंशी के मर्डर के लिए बीएनएस की धारा 103 लगाने की बजाए गलती से 403 लगा दी थी. जबकि 403 धारा बीएनएस में है ही नहीं. इसी को आधार बना कर सोनम को पहले निचली अदालत और फिर हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी. जवाब में सोनम के वकील ने दलील दी कि सोनम ने यूपी के गाजीपुर में 9 जून 2025 को सरेंडर नहीं किया था, बल्कि उसे गिरफ्तार किया गया था. इसलिए सरेंडर की बात गलत है.
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और जब सरेंडर की बात गलत है तो फिर ये बात भी खारिज होती है कि सोनम को अपना जुर्म पता था. सोनम के वकील ने भी कहा कि मामले में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और सोनम को कड़ी शर्तों के साथ जमानत मिली थी. जिसका वो पालन कर रही है. सोनम के फरार होने का अब कोई अंदेशा नहीं है. इसलिए उसकी जमानत बरकरार रखी जाए.
सोनम ने सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मामले में खुद को बेकसूर बताते हुए ये भी कहा कि उसे इसे मर्डर केस में गलत तरीके से फंसाया गया है. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने सोनम की ज़मानत रद्द करते हुए कहा कि मेघालय पुलिस की तरफ से पेश दस्तावेज़ से ये साफ हो जाता है कि सोनम को उसकी गिरफ्तारी की वजह पहले ही बताई जा चुकी थी.
इतना ही नहीं 9 जून 2025 को जब सोनम ने यूपी के गाजीपुर में सरेंडर किय था, उससे भी ये साबित होता है कि सोनम अपना जुर्म जानती थी. सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि कानून की एक गलत धारा जो कि टाइपो एरर की वजह से हुआ सिर्फ उसके बिना पर पहले शिलॉग की लोअर कोर्ट और फिर मेघालय हाई कोर्ट का सोनम को ज़मानत देना गलत था. सोनम पर जो गंभीर इल्जाम है, उसे देखते हुए उसे ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए थी.
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हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को फौरन वापस जेल भेजने की बजाए सरेंडर करने के लिए उसे तीन हफ्ते का वक्त दे दिया. यानी सोनम अगले तीन हफ्तों के अंदर कभी भी खुद से सरेंडर कर सकती है. इस बीच एक इसी सुप्रीम कोर्ट में एक अजीब बात हुई. सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही यानी बुधवार को एक केस में एक फैसला सुनाते वक्त कहा कि अगर किसी को हाई कोर्ट से जमानत मिल जाती है, तो उसे फाइनल जमानत समझा जाए.
हाई कोर्ट के जमानत के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं होनी चाहिए. इस फैसले से एक बार को लगा था कि सोनम की जमानत शायद जारी रहेगी. क्योंकि सोनम को मेघालय हाई कोर्ट ने जमानत दी है. इंदौर की सोनम वही सोनम है, जिस पर पिछले साल अपने पति राजा रघुवंशी को हनीमून पर ले जाकर मार डालने का इल्जाम है. अब सवाल ये है कि ऐसे संगीन और हाई प्रोफाइल केस में भी जो एक वक्त पूरे देश में सुर्खियां बनी हुई थी. गिरफ्तारी के महज दस महीने के अंदर सोनम को दो-दो अदालतों ने जमानत कैसे दे दी थी, तो इसकी कहानी भी बेहद अजीब है.
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली सोनम को पिछले साल जून में अपने बिजनेसमैन पति राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था. यह जोड़ा 23 मई को मेघालय के सोहरा इलाके में छुट्टियां मनाने के दौरान लापता हो गया था. इसके बाद 2 जून को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई में मिला. पुलिस का आरोप है कि सोनम ने ही अपने पति की हत्या की साजिश रची थी.
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