दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बेघर कैंसर मरीज के लिए 3 लाख मुआवजा
दिल्ली हाई कोर्ट ने बेघर ब्लड कैंसर मरीज विक्रांत तिवारी के इलाज के लिए दिल्ली सरकार को एक सप्ताह के भीतर तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता सीधे एम्स को जारी करने का निरदेश दिया है।

सौजन्य से:- Jagran
बेघर कैंसर मरीज की मदद के लिए अदालत का बड़ा फैसला, दिल्ली सरकार को एक हफ्ते में 3 लाख देने के आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने एम्स में भर्ती एक बेघर ब्लड कैंसर मरीज विक्रांत तिवारी के इलाज के लिए दिल्ली सरकार को एक सप्ताह के भीतर तीन लाख रुपये की वित्तीय स ...और पढ़ें
HighLights
- दिल्ली हाई कोर्ट का बेघर कैंसर मरीज को राहत देने का आदेश।
- दिल्ली सरकार को एम्स को तीन लाख रुपये देने का निर्देश।
- दस्तावेजों की कमी के कारण इलाज में देरी नहीं की जा सकती।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एम्स में ब्लड कैंसर का इलाज करा रहे एक बेघर मरीज को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली सरकार को एक सप्ताह के भीतर तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता एम्स को जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मरीज के पास उपलब्ध नहीं होने वाले दस्तावेज की मांग कर सहायता देने में देरी नहीं की जा सकती।
दिल्ली हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि एम्स में इलाज करा रहे 37 वर्षीय बेघर ब्लड कैंसर मरीज विक्रांत तिवारी के उपचार के लिए एक सप्ताह के भीतर तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता सीधे एम्स को जारी की जाए। अदालत ने एम्स की ओर से इलाज जारी रखने के आश्वासन को रिकाॅर्ड पर लेते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।
अदालत ने कहा कि मरीज बेघर है और सरकारी आश्रय गृह में रह रहा है, इसलिए उससे ऐसे दस्तावेज मांगना उचित नहीं होगा जो उसके पास उपलब्ध ही नहीं हैं। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने यह आदेश विक्रांंत तिवारी की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से दलील दी गई कि मरीज फिलहाल ओरल कीमोथेरेपी पर है, उसकी स्थिति स्थिर है और एम्स उसकी आवश्यक चिकित्सा जारी रखेगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने दलील दी कि विक्रांत तिवारी के पास इलाज का खर्च उठाने के लिए कोई आर्थिक संसाधन नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों का संवैधानिक दायित्व है कि जीवनरक्षक इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएं। याचिका में दलील दी गई है कि विक्रांत तिवारी वर्ष 2024 से डिफ्यूज लार्ज बी-सेल लिम्फोमा (ब्लड कैंसर) से पीड़ित हैं।
खबरें और भी
इसके अलावा वह टीबी और एचआइवी से भी संक्रमित हैं। बेघर होने के कारण वह सरकारी आश्रय गृह में रहते हैं और स्वास्थ्य ठीक रहने पर ही दिहाड़ी मजदूरी कर पाते हैं। याचिका के अनुसार, एम्स ने इलाज का खर्च लगभग तीन लाख रुपये बताया था।
आर्थिक सहायता के लिए मरीज ने एम्स के मेडिकल समाजिक कार्य अधिकारी, उप मंडलाधिकारी (एसडीएम) सहित अन्य अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन कोई प्रभावी सहायता नहीं मिलने पर उसे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। याचिका में कहा गया था कि आर्थिक सहायता नहीं देना संविधान के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है।
-----------------------
रीतिका
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
धर्म परिवर्तन मामले में राहत: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने POCSO अपराध छिपाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का फैसला

दिल्ली दंगे के आरोपी के खिलाफ पुलिस ने अदालत में याचिका दाखिल की, रोजाना चार कच्चे अंडे और टीवी देने के आदेश को चुनौती दी

भारत में आज: नौसेना का यूएवी दुर्घटनाग्रस्त, आयकर विभाग ने समलैंगिक जोड़े की याचिका का विरोध किया

नाबालिग पीड़िता से यौन उत्पीड़न के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले व्यक्ति को अधिकारियों को रिपोर्ट करनी होगी: सुप्रीम कोर्ट

400 करोड़ रुपये टीएमसी खाते फ्रीज पर कलकत्ता HC का बड़ा आदेश, विशेष अधिकारी की नियुक्ति

सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर बोला, मैं बेगुनाह, झूठा फंसाया गया

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध इमारतों को लेकर सख्त संदेश दिया, 4 अगस्त तक कार्रवाई नहीं तो शीर्ष अधिकारियों की खैर नहीं
ताज़ा ख़बरें
- चंडीगढ़ अदालत ने झपटमारों को 5 साल की जेल का दिया फैसला
- सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू व्यक्ति से जुड़े कथित जबरन धर्म परिवर्तन मामले में कार्यवाही पर रोक लगा दी
- टाइपिंग एरर पर जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को रिकॉर्ड लाने का निर्देश दिया
- कानून को करीब लाने वाले पुलिस कप्तान
- कोर्ट ने खारिज की शिवसेना पार्षद की याचिका, व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश
- टीएमसी को प्रतिबंधों के साथ जमे हुए बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति दी: कलकत्ता उच्च न्यायालय का फैसला
- अदालत ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के दैनिक खर्चों का प्रबंधन के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया
- किराएदार को बेदखली से नहीं बचता बैंकों का विलय: सुप्रीम कोर्ट

