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सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर बोला, मैं बेगुनाह, झूठा फंसाया गया

मेघालय के चर्चित हनीमून मर्डर केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल करके खुद को निर्दोष बताया है. उन्होंने अदालत से कहा है कि इस मामले में उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है और उन्हें जमानत मिलने के बाद से वह ट्रायल की प्रक्रिया में लगातार सहयोग कर रही हैं.

9 जुलाई 2026 को 01:59 pm बजे
सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर बोला, मैं बेगुनाह, झूठा फंसाया गया

सौजन्य से:- AajTak

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बीते शुक्रवार को मेघालय के चर्चित हनीमून मर्डर केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर रोक लगाने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल स्वीकार नहीं की थी. मेघालय पुलिस ने हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत सोनम को जमानत मिली थी. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को नोटिस जारी करते हुए पूछा था कि आखिर उनकी जमानत क्यों न रद्द की जाए.

'मैं बेगुनाह हूं, मुझे फंसाया गया'

अब सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया है. उन्होंने अदालत से कहा है कि इस मामले में उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है. उनका कहना है कि अभियोजन पक्ष ने केवल अपनी आशंकाओं और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ आरोपों का पूरा ढांचा तैयार किया है. महज आरोप लगाए जाने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट गुरुवार यानी आज फिर सुनवाई करेगा.

अपने हलफनामे में सोनम ने कहा है कि जमानत मिलने के बाद से वह ट्रायल की प्रक्रिया में लगातार सहयोग कर रही हैं. उन्होंने कहा कि मुकदमे की सुनवाई में हो रही देरी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. जांच से लेकर न्यायिक कार्यवाही तक उन्होंने हर स्तर पर सहयोग किया है और अदालत द्वारा जमानत के साथ लगाई गई सभी शर्तों का पालन किया है.

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'मुझे दोबारा जेल भेजने का कोई मतलब नहीं'

सोनम ने अपने जवाब में यह भी कहा कि उन्हें 27 अप्रैल 2026 को जमानत मिली थी और अगले ही दिन, 28 अप्रैल को वह जेल से रिहा हो गई थीं. ऐसे में अब उन्हें दोबारा जेल भेजने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बनता. उन्होंने अदालत से कहा कि जमानत रद्द करने के लिए जरूरी कानूनी आधार इस मामले में मौजूद नहीं हैं. इतना ही नहीं, राज्य सरकार ने भी यह आरोप नहीं लगाया है कि उन्होंने जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन किया है.

हलफनामे में सोनम ने यह भी कहा कि इस मामले में अब उनसे किसी तरह की बरामदगी की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पुलिस पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. ऐसे में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी नहीं बनती.

पिछली सुनवाई में क्या बोली थी सोनम रघुवंशी?

पिछली सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी थी कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील उपलब्ध कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण बताए गए. उनका कहना था कि पुलिस ने केवल एक खाली प्रोफॉर्मा उन्हें थमा दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया था कि यदि यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण था तो इसे पहले अदालत के सामने क्यों नहीं रखा गया. कोर्ट ने यह भी पूछा था कि यदि जमानत केवल तकनीकी आधार पर दी गई है तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी करने से रोकता है?

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सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यह बेहद सनसनीखेज मामला है. उन्होंने अदालत को बताया कि चार्जशीट के अनुसार सोनम रघुवंशी कथित तौर पर हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में शामिल थीं तथा अन्य आरोपी भी इस षड्यंत्र का हिस्सा थे. उन्होंने यह भी बताया कि निचली अदालत पहले ही तीन बार सोनम की जमानत याचिका खारिज कर चुकी है. उन आदेशों में अदालत ने प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ मजबूत साक्ष्य होने और उनके फरार होने की आशंका जताई थी.

हत्याकांड में ट्रायल अभी भी जारी

राजा रघुवंशी हत्याकांड में अब तक की स्थिति की बात करें तो का ट्रायल अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा है. सोनम रघुवंशी फिलहाल जमानत पर हैं, जबकि अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी है. दूसरी ओर मेघालय सरकार और राजा रघुवंशी के परिजन उनकी जमानत रद्द कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई को इस पूरे मामले के लिए निर्णायक माना जा रहा है, क्योंकि इससे केस की आगे की दिशा काफी हद तक तय हो सकती है.

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