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मथुरा में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ, 3.5 लाख मामलों का समाधान लक्ष्य, पेमेंट सेतु ऐप से चालान निपटान

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शनिवार को मथुरा जनपद न्यायालय में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गई, जिसका उद्देश्य 3.5 लाख चयनित मामलों का शांतिपूर्ण समाधान करना है। अदालत में आपराधिक, सिविल, उपभोक्ता, पारिवारिक विवाद सहित व्यापक मामलों का निपटारा किया जा रहा है, और चालान व राजस्व मामलों के लिए पेमेंट सेतु ऐप का उपयोग किया जा रहा है। जज विकास कुमार के अनुसार, अंतिम निपटारा आँकड़े शाम को जारी होंगे।

12 सितंबर 2026 को 12:04 pm बजे
मथुरा में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ, 3.5 लाख मामलों का समाधान लक्ष्य, पेमेंट सेतु ऐप से चालान निपटान

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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मथुरा में राष्ट्रीय लोक अदालत शुरू:3.5 लाख मामलों के निस्तारण का लक्ष्य, चालान भुगतान के लिए पेमेंट सेतु ऐप का इस्तेमाल

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शनिवार को मथुरा जनपद न्यायालय में इस साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गई। सुबह 10 बजे शुरू हुई लोक अदालत में मामलों के जल्द निस्तारण के लिए सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी। यहां आपसी सहमति और सुलह-समझौते के जरिए विवादों को खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है।

मथुरा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार ने बताया कि लोक अदालत के लिए जिलेभर से करीब 3.5 लाख मामले चुने गए हैं। उम्मीद है कि इनमें से ज्यादा से ज्यादा मामलों का शांतिपूर्ण तरीके से निस्तारण किया जाएगा।

आपराधिक से लेकर पारिवारिक विवाद तक शामिल

राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक और समझौते योग्य मामले, सिविल केस, उपभोक्ता विवाद, पारिवारिक और वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावे, राजस्व मामले, बैंक रिकवरी और यातायात चालान शामिल किए गए हैं।

जिला जज ने बताया कि इस बार चालानों के निस्तारण और भुगतान के लिए ‘पेमेंट सेतु ऐप’ की डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारी भी अपने स्तर पर संबंधित मामलों का निस्तारण कर रहे हैं।

शाम तक साफ होगा निस्तारण का आंकड़ा

विकास कुमार ने बताया कि राजस्व वसूली और यातायात चालानों के निस्तारण का सही आंकड़ा शाम तक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। सभी मामलों के निस्तारण और राजस्व वसूली की अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद कुल आंकड़े सामने आएंगे।

उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को जल्दी और आसान न्याय उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही आपसी सहमति से विवादों का समाधान कर लोगों का समय और खर्च बचाना भी इसका मकसद है।

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