125 साल पुराना कानून बदलेगा: डिजिटल रिकॉर्ड अब अदालत में मान्य
सरकार ने बैंकिंग रिकॉर्ड को आधुनिक बनाने के लिए 125 साल पुराने बैंक कानून को बदलने के लिए नया बिल लाया है। इस नए विधेयक के तहत, अब डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग रिकॉर्ड को अदालतों में साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
बैंकिंग कानून में होगा बदलाव, डिजिटल रिकॉर्ड को सबूत बनाने वाला बिल लोकसभा में पेश
संसद का मॉनसून सत्र, फोटो पीटीआई
सरकार 125 साल पुराने बैंक कानून को बदलने के लिए नया बिल लेकर आई है. इस नए विधेयक के तहत, अब डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग रिकॉर्ड को भी अदालतों में साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाएगा. यह कदम बैंकिंग रिकॉर्ड को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
Bankers' Books Evidence Bill 2026 : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में बैंकर्स बुक एविडेंस एक्ट (बैंककार बही साक्ष्य विधेयक) 2026 पेश किया. इस विधेयक का उद्देश्य अदालतों में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने की प्रक्रिया को आधुनिक और ज्यादा स्पष्ट बनाना है. नया कानून लागू होने के बाद 125 साल पुराने बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 की जगह लेगा.
डिजिटल रिकॉर्ड भी होंगे मान्य
प्रस्तावित विधेयक में 'बैंककार बही' की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है. अब इसमें पारंपरिक दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड, क्लाउड आधारित डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग रिकॉर्ड भी शामिल होंगे. इसके अलावा अदालतों में इन रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में पेश करने और उनके प्रमाणन के लिए एक समान और स्पष्ट नियम तय किए गए हैं.
बैंक अधिकारियों को भी मिलेगी राहत
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि बैंक अधिकारियों को बिना ठोस वजह के बार-बार अदालत में पेश होने के लिए नहीं बुलाया जाएगा. इसके लिए 'स्पेशल कॉज' (विशेष कारण) का प्रावधान रखा गया है, ताकि केवल जरूरी मामलों में ही उन्हें तलब किया जा सके.
गौरतलब है कि वित्त मंत्री ने यह विधेयक ऐसे समय पेश किया, जब लोकसभा में विपक्ष अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर हंगामा कर रहा था. विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ही विधेयक सदन में पेश किया गया.
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