105 साल के कैदी को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, 2024 की जमानत को बनाया अंतिम; उम्रकैद की बाकी सजा भी माफ
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की अत्यधिक उम्र को ध्यान में रखते हुए मामले को समाप्त किया जा रहा है। कोर्ट ने नवंबर 2024 में दिए गए अंतरिम जमानत के आदेश को पूर्ण…

सौजन्य से:- Navbharat Times
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की अत्यधिक उम्र को ध्यान में रखते हुए मामले को समाप्त किया जा रहा है। कोर्ट ने नवंबर 2024 में दिए गए अंतरिम जमानत के आदेश को पूर्ण और अंतिम कर दिया।
68 साल की उम्र में हुई थी सजा
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वर्ष 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को 1988 के हत्या मामले में वर्ष 1994 में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र करीब 68 वर्ष थी। दोषसिद्धि के बाद उन्होंने लंबे समय तक जेल में सजा काटी।मंडल ने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी उनकी याचिका खारिज हो गई।
99 साल की उम्र में मांगी थी समय से पहले रिहाई
वर्ष 2020 में जब मंडल की उम्र 99 वर्ष थी, उन्होंने अपनी अत्यधिक उम्र और उम्र संबंधी बीमारियों का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था।मंडल की उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को उन्हें अंतरिम जमानत/पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने उस समय निर्देश दिया था कि मुकदमे की कार्यवाही लंबित रहने के दौरान उन्हें ट्रायल कोर्ट द्वारा तय शर्तों के आधार पर अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए।
अब दोबारा जेल नहीं जाएंगे
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंडल की उम्र को देखते हुए मामले को अब बंद किया जा रहा है। अदालत ने उनकी शेष सजा, यदि कोई है, को माफ करते हुए 2024 में दी गई अंतरिम जमानत को पूर्ण और अंतिम कर दिया।सीजेआई ने स्पष्ट किया कि भले ही उनकी उम्रकैद की सजा की अवधि तकनीकी रूप से पूरी नहीं हुई हो, उन्हें अब वापस हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
इस आदेश के साथ करीब 105 वर्ष की उम्र में रसिक चंद्र मंडल अब स्वतंत्र जीवन जी सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में उनकी अत्यधिक उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को विशेष महत्व देते हुए मानवीय आधार पर उन्हें राहत दी।
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