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स्विगी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना, बुफे कीमतें गलत बताने का दोषी पाया गया

दिल्ली उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी और रेस्टोरेंट को 1 लाख रुपये का जुर्माना ठहराया, क्योंकि प्लेटफॉर्म पर दिखाए गए बुफे मूल्य वास्तविक कीमत से 40‑47% अधिक थे। न्यायालय ने कहा कि इंटरमीडियरी होने के बावजूद स्विगी को सही कीमत दिखाने की जिम्मेदारी है और उसने यह कर्तव्य निभाने में विफल रहा।

2 अक्टूबर 2026 को 05:05 pm बजे
स्विगी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना, बुफे कीमतें गलत बताने का दोषी पाया गया

सौजन्य से:- Hindustan

दिल्ली की उपभोक्ता अदालत ने स्विगी और रेस्टोरेंट पर लगाया 1 लाख का जुर्माना, इस बात का दोषी पाया

आयोग ने कहा कि सेक्शन 79 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को पूरी छूट नहीं देता है। कोर्ट ने माना कि इस प्रावधान के तहत सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि इंटरमीडियरी कानून की जरूरतों को पूरा करे, जिसमें जरूरी सावधानी बरतना भी शामिल है।

दिल्ली की एक उपभोक्ता अदालत ने फूड एग्रिगेटर कंपनी स्विगी और दिल्ली के एक रेस्टोरेंट को एक ग्राहक को 1 लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने उन्हें फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर बुफे की कीमतों के बारे में गलत जानकारी दिखाने का दोषी पाया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) (नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट) ने इस मामले में फैसला देते हुए कहा कि कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म खुद को सिर्फ एक मध्यस्थ बताकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। आयोग ने माना, 'गलत कीमत लगातार दिखाना दोनों कंपनियों की तरफ से सर्विस में कमी और गलत व्यापारिक तरीका माना जाएगा।' आयोग ने कहा कि कीमत साफ तौर पर शरारतपूर्ण तरीके से दिखाई गई थी ताकि शिकायतकर्ता को बुफे की असल कीमत के बारे में गुमराह किया जा सके।

यह आदेश वकील प्रवीण कुमार सिंह की शिकायत पर जारी किया गया। जिसमें उन्होंने बताया था कि उन्होंने स्विगी डाइनआउट के जरिए 7 अप्रैल, 2024 को केशव पुरम स्थित 'थेमिस बारबेक्यू हाउस' में एक टेबल बुक की थी। शिकायत में कहा गया कि बुकिंग के समय स्विगी ने दो लोगों के लिए कुल 1,500 रुपए का खर्च दिखाया था, यानी प्रति व्यक्ति 750 रुपए कीमत बताई थी। हालांकि शिकायतकर्ता ने बताया कि, ‘हालांकि जब वो वहां खाना खाने गए तो रेस्टोरेंट ने शाकाहारी बुफे के लिए प्रति व्यक्ति 1,050 रुपए और मांसाहारी बुफे के लिए 1,100 रुपए चार्ज किए।’

कोर्ट ने कहा- सही तथ्य दिखाने की जिम्मेदारी स्विगी पर थी

इस बारे में 21 सितंबर को जारी अपने आदेश में DCDRC की अध्यक्ष दिव्या ज्योति जयपुरियार की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि 'स्विगी की यह जिम्मेदारी थी कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसके प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई कीमतें सही हों और रेस्टोरेंट द्वारा दी जाने वाली सेवाओं से मेल खाती हों।' कोर्ट ने कंपनी के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने IT एक्ट की धारा 79 के तहत मध्यस्थ होने की वजह से बचने का दावा किया था। इस धारा के तहत कुछ मामलों में मध्यस्थ को जिम्मेदारी से छूट मिलती है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि ऐसी सुरक्षा इस शर्त पर मिलती है कि प्लेटफॉर्म ने उचित सावधानी बरती हो।

'प्लेटफॉर्म पर दिखाई कीमत से 40 से 47% ज्यादा वसूले'

उपभोक्ता आयोग ने पाया कि असली कीमत प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई रकम से लगभग 40 से 47% ज्यादा थी। सुनवाई के दौरान स्विगी ने तर्क दिया था कि 1,500 रुपए का आंकड़ा सिर्फ एक औसत या अनुमानित रकम थी और ग्राहक बुकिंग से पहले विस्तृत मेन्यू और सही कीमतें देख सकता था। हालांकि, कमीशन ने उसकी सफाई को खारिज कर दिया और कहा कि डाइनआउट लिस्टिंग में ऐसा कोई संकेत नहीं था, जिससे पता चले कि वह आंकड़ा सिर्फ एक अनुमान था। आयोग ने कहा, 'स्विगी की अपनी शर्तों में भी ऐसा कोई डिस्क्लेमर नहीं था जिसमें इस रकम को अनुमानित या गैर-बाध्यकारी बताया गया हो।'

'बताई कीमत और लगाई कीमत में बहुत बड़ा अंतर था'

आयोग ने कहा, 'प्री-बुकिंग के समय ग्राहक को बताई गई कीमत... एक उम्मीद पैदा करती है कि असल बिलिंग उस कीमत से बहुत अलग नहीं होगी।' आयोग ने यह भी कहा कि इस मामले में जो अंतर था, वह साधारण ना होकर काफी बड़ा था। फैसला सुनाते हुए आयोग ने प्लेटफॉर्म की भूमिका को खास तौर पर अहम माना और कहा कि बुकिंग के समय स्विगी के पास रेस्टोरेंट के वीकेंड बुफे की सही और आइटम-वाइज कीमतें मौजूद थीं।

बिना किसी डिस्क्लेमर के दिखाई गई थी कीमतें

कोर्ट ने कहा कि दो लोगों के लिए बुफे की कम कीमत वाला आंकड़ा बिना किसी साफ डिस्क्लेमर के दिखाया जाता रहा, जबकि वीकेंड की कीमतें अलग थीं। आयोग ने कहा, 'विज्ञापन देने वाले सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर रेस्टोरेंट जिम्मेदार था, और साथ ही यह भी कहा कि उस प्लेटफॉर्म के तौर पर स्विगी भी जिम्मेदार है जिस पर गुमराह करने वाली जानकारी दिखाई गई थी।'

स्विगी नियमों का पालन करने में असफल रहा

कोर्ट ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स, 2020 का भी हवाला दिया, जिसके तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए यह पक्का करना जरूरी है कि सेलर की ओर से दिखाई गई जानकारी सही हो और असल में दी जा रही चीजों या सर्विस से मेल खाती हो। कोर्ट ने कहा, 'स्विगी ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जिससे पता चले कि उसके पास 'दो लोगों के लिए कीमत' वाले आंकड़े और असल बिलिंग का मिलान करने का कोई सिस्टम था।'

मानसिक परेशानी व उत्पीड़न के लिए मिलेंगे 1 लाख रुपए

सुनवाई के बाद आयोग ने स्विगी और रेस्टोरेंट को निर्देश दिया कि वे शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी, उत्पीड़न, असुविधा और कानूनी कार्यवाही के खर्च के तौर पर संयुक्त रूप से 1 लाख रुपए का भुगतान करें। आयोग ने कहा कि यह रकम चार सप्ताह के भीतर चुकानी होगी और ऐसा नहीं करने पर तथा निर्धारित समय-सीमा खत्म होने के बाद पूरी तय रकम पर 12% सालाना ब्याज देना होगा।

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