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Xप्लेन: हिजाब विवाद पर देश की अदालतों के बड़े फैसले, कब क्या कहा

Xप्लेन: हिजाब विवाद पर देश की अदालतों के बड़े फैसले, कब क्या कहा शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब और ड्रेस कोड से जुड़ा कानूनी मुद्दा केवल पोशाक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समानता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक अधिकार और संस्…

25 अगस्त 2026 को 09:55 am बजे
Xप्लेन: हिजाब विवाद पर देश की अदालतों के बड़े फैसले, कब क्या कहा

सौजन्य से:- ABP News

Xप्लेन: हिजाब विवाद पर देश की अदालतों के बड़े फैसले, कब क्या कहा

शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब और ड्रेस कोड से जुड़ा कानूनी मुद्दा केवल पोशाक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समानता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक अधिकार और संस्थागत अनुशासन के बीच संतुलन का एक जटिल विषय बन चुका है.

एक अहम फ़ैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ़ किया है कि किसी भी स्टूडेंट को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी पसंद के हिसाब से किसी एजुकेशनल इंस्टिट्यूट के तय ड्रेस कोड में बदलाव करे. कोर्ट ने एक स्टूडेंट की याचिका खारिज कर दी, जिसमें स्कूल अथॉरिटीज़ को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि उसे स्कूल की तय यूनिफ़ॉर्म के साथ हेडस्कार्फ़ पहनने की इजाज़त दी जाए. यह याचिका प्रयागराज के एक प्राइवेट स्कूल की एक नाबालिग छात्रा ने दायर की थी. छात्रा ने हाई स्कूल पास कर लिया है और उसी इंस्टिट्यूट में 11वीं क्लास में एडमिशन लेना चाहती है.

उसने अपनी मां के ज़रिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और स्कूल अथॉरिटीज़ को निर्देश देने की मांग की कि उसे स्कूल की तय यूनिफ़ॉर्म के साथ हेडस्कार्फ़ पहनने की इजाजत दी जाए. याचिका में कहा गया था कि हेडस्कार्फ़ पहनना इस्लामिक परंपरा का एक ज़रूरी हिस्सा है और छात्रा उसी स्कूल में छठी क्लास से ही इसे पहनती आ रही है.

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की दो जजों की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा,

'हमने छात्रा से जुड़ी अलग-अलग क्लास की फ़ोटो देखी हैं. उसके अलावा, कोई दूसरी छात्रा हेडस्कार्फ़ नहीं पहने हुए है, यहां तक कि वे छात्राएं भी नहीं जो उसी धार्मिक समुदाय से हैं जिससे याचिकाकर्ता है."

कोर्ट ने आगे कहा, "जहां भी यह मुद्दा उठा है, हाई कोर्ट्स की राय एक रही है कि महिलाओं के लिए सिर पर स्कार्फ (हिजाब) पहनना इस्लामिक आस्था का कोई अनिवार्य हिस्सा नहीं है, जिसके बिना आस्था खतरे में पड़ जाएगी."

हिजाब को लेकर सबसे बड़ा विवाद

हिजाब को लेकर वैसे तो विवाद कई बार हुए हैं लेकिन फरवरी 2022 में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर आया. यह तब शुरू हुआ जब कर्नाटक के उडुपी में एक सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज ने क्लासरूम के अंदर हिजाब पहनने पर रोक लगा दी. इस मुद्दे पर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए, जिसमें कई छात्र-छात्राओं (खासकर लड़कियों) ने स्कूल में हिजाब पहनने के अपने अधिकार के समर्थन में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस विवाद ने समानता के अधिकार, सम्मान के अधिकार, अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार, धर्म की आज़ादी के अधिकार आदि जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी.

सरकार के इस आदेश को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसने सरकार के आदेश को सही ठहराया. बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने हिजाब प्रतिबंध मामले में बंटा हुआ फैसला सुनाया.

हिजाब बैन के समर्थन में एक जज का मानना था कि कर्नाटक सरकार को शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर रोक लगाने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीति से समुदायों के बीच भाईचारा बढ़ता है. धर्मनिरपेक्ष माहौल में छात्रों को हिजाब पहनने की इजाज़त देने से उनमें असमानता की भावना पैदा होगी. उन्होंने कहा कि यूनिफ़ॉर्म का पालन करना अभिव्यक्ति की आज़ादी पर एक उचित रोक है. किसी छात्र को धर्मनिरपेक्ष स्कूल में सिर पर स्कार्फ़ (हिजाब) पहनने का अधिकार नहीं है.

वहीं बेंच के दूसरे जज ने कहा कि लड़कियों की शिक्षा एक निजी पसंद का मामला है. उन्होंने कहा कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 21 के तहत मिले उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. उन्होंने स्कूल में हिजाब पहनने के अधिकार को एक "पसंद" और "मौलिक अधिकार" बताया, जो लड़की की "गरिमा और निजता" से जुड़ा है.

बंटे हुए फ़ैसले के कारण यह मामला अभी भी अनसुलझा है.

प्रमुख न्यायिक फैसले और उनका कानूनी विश्लेषण

2. बॉम्बे हाई कोर्ट का निर्णय

2024 में मुंबई के एक कॉलेज द्वारा कैंपस में हिजाब, बुर्का और कैप पर प्रतिबंध लगाने की नीति को बॉम्बे हाई कोर्ट ने सही ठहराया. कोर्ट का तर्क था कि एक समान ड्रेस कोड लागू करना किसी के मौलिक अधिकारों पर अनुचित आघात नहीं है. हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश के कुछ हिस्सों पर अंतिम सुनवाई तक अंतरिम स्थगन दिया है.

3. केरल हाई कोर्ट के विविध निर्णय

केरल हाई कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में संतुलन साधने का प्रयास किया है. 2016 के निर्णय में उन्होंने CBSE परीक्षाओं में धार्मिक पोशाक पहनने की अनुमति दी, लेकिन परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा जांच के निर्देश दिए. वहीं 2018 के फातिमा तस्नीम मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब छात्र के व्यक्तिगत अधिकार और संस्थान के प्रबंधन अधिकार आपस में टकराते हैं, तो संस्थान के सामूहिक अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी.

शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब और ड्रेस कोड से जुड़ा कानूनी मुद्दा केवल पोशाक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समानता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक अधिकार और संस्थागत अनुशासन के बीच संतुलन का एक जटिल संवैधानिक विषय बन चुका है.

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