अमेरिकी अदालत के फैसले से ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत, सीमा पर दीवार का निर्माण जारी
एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत देते हुए सीमा पर दीवार बनाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका एक मूल अमेरिकी जनजाति ने दायर की थी जो अपने आरक्षित क्षेत्र में दीवार निर्माण के खिलाफ थी।

सौजन्य से:- अमर उजाला
यू. एस.: जनजाति की अपील के बावजूद सीमा पर दीवार बनानी नहीं रुकेगी, अदालत ने ट्रंप प्रशासन को दी बड़ी राहत
सत., 15 अगस्त 2026 11:47 पूर्वाह्न भारतीय समय
नितिन गौतम
पीटीआई, वॉशिंगटन
पीटीआई, वॉशिंगटन
प्रकाशितकर्ता: नितिन गौतम
अद्यतन शनिवार, 15 अगस्त 2026 11:47 पूर्वाह्न भारतीय समय
सार
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत देते हुए सीमा पर दीवार बनाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका एक मूल अमेेरिकी जनजाति ने दायर की थी।
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विस्तार
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने मूल अमेरिकी जनजाति की मांग पर उनके आरक्षित क्षेत्र में सीमा पर दीवार बनाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जनजाति ने मांग की थी कि उनके 62 मील के आरक्षित इलाके में सीमा पर दीवार न बनाई जाए क्योंकि इससे उनके धार्मिक रीति-रिवाज और सामाजिक संबंधों पर बुरा असर पड़ेगा। हालांकि अदालत ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला
अमेरिका के मूल टोहानो ओ ओधम जनजाति के लोगों के लिए अमेरिकी सरकार ने करीब 28 लाख एकड़ जमीन अमेरिका और मैक्सिको के बॉर्डर पर आरक्षित की हुई है। जनजाति ने दावा किया कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के यह दीवार उनकी सीमाओं को बांट देगी। हालांकि जज ने जनजाति के इस दावे को खारिज कर दिया और देश की संप्रभुता और सीमा सुरक्षा को ज्यादा जरूरी बताया। अदालत के इस फैसले पर अभी जनजाति की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मैक्सिको में भी रहते हैं इस जनजाति के लोग
अमेरिका की टोहानो ओ ओधम जनजाति एरिजोना में मैक्सिको बॉर्डर पर 62 मील इलाके में रहती है। इस जनजाति के करीब 37 हजार सदस्य हैं, जिनमें से हजारों मैक्सिको में रहते हैं। जनजाति का कहना है कि सीमा पर दीवार बनने से उनके आरक्षण को नुकसान पहुंचेगा। साथ ही उनके पवित्र पर्वत को भी नुकसान होगा। साल 1907 में तत्कालीन राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने इस भूमि को आरक्षित घोषित किया था, जिसे बाद में ओधम जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया था।
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जनजाति के आपसी संबंधों को होगा नुकसान
जनजाति के वकीलों ने कहना है कि, 'इससे बॉर्डर के दोनों ओर रहने वाले ओ'ओधम समुदायों और परिवारों के बीच संबंध कमजोर होंगे, ओ'ओधम लोगों के धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं में भारी रुकावट आएगी, और ओ'ओधम लोगों के लिए पवित्र पेड़-पौधों और जानवरों के संसाधनों का विनाश होगा।'
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क्या है पूरा मामला
अमेरिका के मूल टोहानो ओ ओधम जनजाति के लोगों के लिए अमेरिकी सरकार ने करीब 28 लाख एकड़ जमीन अमेरिका और मैक्सिको के बॉर्डर पर आरक्षित की हुई है। जनजाति ने दावा किया कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के यह दीवार उनकी सीमाओं को बांट देगी। हालांकि जज ने जनजाति के इस दावे को खारिज कर दिया और देश की संप्रभुता और सीमा सुरक्षा को ज्यादा जरूरी बताया। अदालत के इस फैसले पर अभी जनजाति की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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मैक्सिको में भी रहते हैं इस जनजाति के लोग
अमेरिका की टोहानो ओ ओधम जनजाति एरिजोना में मैक्सिको बॉर्डर पर 62 मील इलाके में रहती है। इस जनजाति के करीब 37 हजार सदस्य हैं, जिनमें से हजारों मैक्सिको में रहते हैं। जनजाति का कहना है कि सीमा पर दीवार बनने से उनके आरक्षण को नुकसान पहुंचेगा। साथ ही उनके पवित्र पर्वत को भी नुकसान होगा। साल 1907 में तत्कालीन राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने इस भूमि को आरक्षित घोषित किया था, जिसे बाद में ओधम जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया था।
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जनजाति के आपसी संबंधों को होगा नुकसान
जनजाति के वकीलों ने कहना है कि, 'इससे बॉर्डर के दोनों ओर रहने वाले ओ'ओधम समुदायों और परिवारों के बीच संबंध कमजोर होंगे, ओ'ओधम लोगों के धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं में भारी रुकावट आएगी, और ओ'ओधम लोगों के लिए पवित्र पेड़-पौधों और जानवरों के संसाधनों का विनाश होगा।'
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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