तमिलनाडु सरकार ने आरटीआई छूट आदेश को निरस्त किया
राज्य सरकार ने वह आदेश वापस ले लिया, जिसके तहत सार्वजनिक (कानून‑व्यवस्था) विभाग को सूचना का अधिकार अधिनियम से बाहर रखा गया था। इस कदम पर सरकार के सहयोगी दलों और पारदर्शिता के समर्थकों, विशेष रूप से वीसीके और कांग्रेस ने कड़ी निंदा की थी, जिसके बाद आदेश को रद्द किया गया।

सौजन्य से:- Hindustan
आरटीआई कानून से छूट देने वाला विवादित आदेश वापस
तमिलनाडु सरकार ने विवादित आदेश को वापस ले लिया, जो पब्लिक विभाग को सूचना का अधिकार अधिनियम से बाहर रखता था। सत्ताधारी पार्टी और पारदर्शिता के पैरोकारों ने इस आदेश का विरोध किया था। कांग्रेस और वीसीके ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। सरकार का यह कदम राजनीतिक घमासान के बीच आया।
चेन्नई, एजेंसी। तमिलनाडु सरकार ने रविवार को एक विवादित आदेश वापस ले लिया। इस आदेश के तहत राज्य के पब्लिक (कानून-व्यवस्था) विभाग को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर रखा गया था। सरकार के इस कदम का सत्ताधारी टीवीके के सहयोगी दलों और पारदर्शिता की वकालत करने वालों ने कड़ा विरोध किया था। प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर 21 सितंबर को जारी मानव संसाधन प्रबंधन (आर) विभाग के सरकारी आदेश को वापस ले लिया। पहले जारी किए गए इस आदेश में पारदर्शिता कानून की धारा 24(4) का इस्तेमाल करते हुए विभाग को खुफिया और सुरक्षा संगठन का दर्जा दिया गया था, जिससे इसे सार्वजनिक जानकारी देने से छूट मिल गई थी।
टीवीके नेतृत्व वाले राज्य प्रशासन के इस शुरुआती कदम से राजनीतिक हलचल मच गई थी और सहयोगी दलों कांग्रेस और विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) ने इसकी कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद ही सरकार ने तुरंत यह फैसला बदला।आदेश वापस लेने से पहले वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने गजट अधिसूचना को बेहद चौंकाने वाला बताया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे मानवाधिकारों के दमन का रास्ता खुलेगा और इसे तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की थी। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी शुरुआती फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि इससे गलत मिसाल कायम होगी और आरटीआई एक्ट का दायरा सीमित करने के बजाय उसे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि अगर यह आदेश लागू रहता, तो पुलिस द्वारा प्रताड़ना, हिरासत में मौत, पुलिस फायरिंग, सांप्रदायिक झड़पों और सुरक्षा से जुड़ी हिरासत से संबंधित मामलों की जांच के रिकॉर्ड तक आरटीआई के जरिए पहुंच नहीं मिल पाती।
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