थलपति विजय ने मद्रास हाई कोर्ट में तमिल को प्रमुख भाषा मानने की मांग की, विधासनभा में प्रस्ताव पेश करेंगे
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय विधानसभा में एक प्रस्ताव रखेंगे, जिसमें केंद्र सरकार से मद्रास हाई कोर्ट की कार्यवाही में तमिल को मुख्य भाषा के रूप में मान्यता देने को कहा गया है। प्रस्ताव में तमिल की प्राचीनता, क्लासिकल भाषा का दर्जा और कानूनी शब्दावली में हुई प्रगति का उल्लेख है, तथा सभी न्यायिक आदेशों को तमिल में उपलब्ध कराने की माँग है। यह पहल पूर्व में भाषा‑संबंधी प्रस्तावों के बाद की जा रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे प्रस्तावों को अभी तक स्वीकार नहीं किया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
चेन्नई में मुख्यमंत्री थलपति विजय विधानसभा में प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसमें केंद्र से मद्रास हाई कोर्ट की कार्यवाही में तमिल को प्रमुख भाषा के रूप में मान्यता देने की मांग होगी।
चेन्नई : तमिलनाडु के सीएम सी. जोसेफ विजय ने द्रविड़ राजनीति में तमिल भाषा के मुद्दे को हवा दे दी। टीवीके सरकार पहले ही केंद्र सरकार के त्रिभाषा फॉर्मूला को खारिज कर चुकी है। अब उन्होंने तमिल को मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य भाषा के तौर पर मान्यता दिलाने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। सरकार के इस प्रस्ताव में तमिल को क्लासिकल लैंग्वेज का दर्जा मिलने और तमिल भाषा में कानूनी शब्दावली के क्षेत्र में हुई अहम प्रगति का जिक्र किया गया है।
मिल को मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य भाषा की मान्यता देने की मांग
कुछ दिन पहले सीएम विजय ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें तमिलनाडु के राज्य गीत को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से पहले गाए जाने का प्रावधान था। विधानसभा में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था। इसके साथ ही राज्य के सभी आधिकारिक कार्यक्रमों, शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में राज्य गीत पहले गाना अनिवार्य हो गया। भाषा की राजनीति को आगे बढ़ाते हुए अब सीएम विजय गुरुवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश करेंगे। इस प्रस्ताव के ज़रिए केंद्र सरकार से मांग की जाएगी कि तमिल को मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य भाषा के तौर पर मान्यता दी जाए।
तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक
प्रस्ताव के मसौदे में बताया गया है कि तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है। इसकी व्याकरणिक और साहित्यिक विरासत हजारों साल पुरानी है। साथ ही, केंद्र से यह भी आग्रह किया जाएगा कि तमिल को हाई कोर्ट की भाषा के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी दी जाए। तमिल भाषा में कानूनी शब्दावली में काफी तरक्की हुई है और इसमें टेक्नोलॉजी की मदद से होने वाले अनुवाद जैसी सुविधाओं का उपयोग किया जा सकता है। विधानसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। राज्य का आधिकारिक प्रस्ताव एक ऐसा ढांचा बनाने की मांग करेगा, जिसके तहत हाई कोर्ट की ओर से सुनाए गए सभी फैसले, डिक्री और न्यायिक आदेश तमिल में उपलब्ध कराए जाएं। इसमें मौजूदा कानूनी ढांचे का भी ज़िक्र हो सकता है, जो भारत के राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से राज्यपाल की मंजूरी मिलने पर, हाई कोर्ट के फैसलों में इंग्लिश के अलावा राज्य की आधिकारिक भाषा के इस्तेमाल की इजाजत देता है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट तमिल पर राज्य के प्रस्ताव से सहमत नहीं था। एक दशक से भी पहले, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के उस प्रस्ताव पर विचार करने से इनकार कर दिया था, जिसे केंद्र ने उसके पास भेजा था।
लेखक के बारे मेंराहुल महाजनराहुल महाजन नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह पंजाब, हरियाणा और हिमाचल जैसे राज्यों की खबरें कवर करते हैं। पत्रकारिता में उनका अनुभव 12 साल से अधिक का है। राहुल महाजन ने सितंबर 2022 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। इससे पहले उन्होंने न्यूज़18 हिंदी में छह साल तक बतौर वरिष्ठ संवाददाता काम किया। 2014 में जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की। वहां उन्होंने बतौर कॉपी एडिटर काम किया। दो साल तक टीवी में काम करने के बाद राहुल ने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। 2016 से अब तक यह सफर लगातार जारी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वह @rahuljuly14 के नाम से सक्रिय हैं।
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