इंडस जल समझौते पर पाकिस्तान की हर चाल ठहर गई, भारत का कड़ा रुख अडिग
पाकिस्तान ने पिछले सवा साल में जल विवाद को लेकर द हेग में कई कदम उठाए, लेकिन भारत ने अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट के अधिकार को नकारते हुए अपने संप्रभु निर्णयों को बरकरार रखा। हालिया हेग का फैसला पाकिस्तान के पक्ष में आया था, फिर भी भारत ने इसे अमान्य कर दिया और समझौते के विवादों को निर्दिष्ट तटस्थ विशेषज्ञों के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया। इस कारण पाकिस्तान की जल‑संबंधी रणनीतियाँ अब तक सफल नहीं हुईं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर द हेग (Permanent Court of Arbitration) पहुंचा है। जानें कैसे भारत के कड़े रुख और जल परियोजनाओं के आगे पाकिस्तान का हर पैंतरा फेल हो रहा है
इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब सिंधु जल समझौते को स्थगित किया था जब कुछ भारतीय तथाकथित विशेषज्ञों ने सरकार का मजाक उड़ाया था। लेकिन अब करीब सवा साल बीतने के बाद पाकिस्तान सिंधु जल के लिए जिस तरह से छटपटा रहा है उसे देखकर लगता है कि सरकार का तीर बिल्कुल निशाने पर लगा है। पाकिस्तान सिंधु जल पर पिछले सवा साल में भारत को परमाणु युद्ध की धमकी देने से लेकर बांधों को मिसाइलों से उड़ाने, जंग छेड़ने का ऐलान, अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस यानि हर दांव आजमा चुका है।
पिछले महीने हेग स्थिति अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट का फैसला भी सिंधु जल पर पाकिस्तान के पक्ष में आ गया है। लेकिन भारत ने कोर्ट के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने साफ कहा है कि उसने कभी भी इस कोर्ट के अधिकार को नहीं माना, न ही इसकी कार्यवाही में हिस्सा लिया और न ही वह इसके फैसलों को मानने के लिए बाध्य है। भारत ने कोर्ट के फ़ैसलों को कानूनी रूप से अमान्य बताया है और कहा है कि संधि से जुड़े भारत के संप्रभु फैसलों पर कोर्ट का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
भारत ने 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' बनाने के वर्ल्ड बैंक के फैसले का विरोध किया था जबकि संधि के मुताबिक पाकिस्तान के साथ विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए 'न्यूट्रल एक्सपर्ट्स' की मदद ली जा रही थी। भारत का मानना है कि संधि के तहत दोनों पक्षों के बीच मतभेदों और विवादों को सुलझाने के तरीकों का इस्तेमाल एक-एक करके किया जाना चाहिए न कि एक साथ। इसलिए भारत ने कोर्ट की कार्यवाही में किसी भी तरह से हिस्सा नहीं लिया है।
द हेग के चक्कर काट रहा पाकिस्तान को बड़ा झटका
पाकिस्तान का अब मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों, सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते और सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के बाद उसकी अंतरराष्ट्रीय साख काफी बेहतर हुई है और अब उसे आतंकवादी देश के तौर पर नहीं देखा जाता। इसलिए उसे लगता है कि पानी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भारत के खिलाफ उसके अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा समर्थन मिलेगा। एनडीटीवी में लिखते हुए भारत के पूर्व विदेश सचिव कंपल सिब्बल ने लिखा है कि पाकिस्तान अपने प्रोपेगैंडा को बढ़ावा देने के लिए 'कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन' के फैसले का फायदा उठाएगा।
लेकिन भारत उसके दावों पर ध्यान नहीं देगा। उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान गलत तरीके से दावा करता है कि IWT एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है शायद इसलिए ताकि उसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल सके। हालांकि उसे इसमें अब तक कामयाबी नहीं मिली है। यह भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय समझौता है जो दोनों सरकारों की मंजूरी के बाद लागू हुआ था। IWT को UN सुरक्षा परिषद से मंजूरी नहीं मिली है।
इसीलिए इस संधि के औपनिवेशिक पहलू 'एनेक्शर G' के उस हिस्से में दिखते हैं जो 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' के गठन से जुड़ा है। इसमें इंजीनियर सदस्य का चुनाव मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रेसिडेंट और लंदन के इंपीरियल कॉलेज ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के रेक्टर करते हैं। कोर्ट के कानूनी सदस्य का चुनाव अमेरिका के चीफ जस्टिस और इंग्लैंड के लॉर्ड चीफ जस्टिस करते हैं।
लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।
अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।
विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।
पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।
पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए 'बेस्ट राइटर' अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।
अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का 'बॉर्डर-डिफेंस' नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Worldकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दुमका में राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए जिला जज ने पुलिस से की समन्वय बैठक

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली विशेषज्ञ पैनल को 30 नवंबर तक रिपोर्ट पेश करने का अंतिम आदेश, विस्तार का अनुरोध खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली विशेषज्ञ पैनल को 30 नवंबर 2026 तक रिपोर्ट जमा करने का आदेश, विस्तार का अनुरोध खारिज

ताई निन्ह की जन अदालत ने 73% से अधिक दीवानी मामलों का निपटारा कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की

कानूनी स्नातक ने नौकरी छोड़कर गृहनगर में शहद आड़ू के बाग से समृद्धि लायी

आदिवासी अधिकारों की अनदेखी: जस्टिस लोकुर ने वन‑और पंचायत अधिनियमों के गैर-प्रवर्तन को उजागर किया

ओडिशा जन कांग्रेस ने एमएमडीआर कानून के विरोध में चंडीखोल में बड़ा प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी का आह्वान

समस्तीपुर में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत में लंबित ई‑चालानों पर 50% छूट
ताज़ा ख़बरें
- नवीन भूमि कानून मसौदा: कागज़ी व इलेक्ट्रॉनिक स्वामित्व प्रमाणपत्र, प्रक्रिया उल्लंघन वाले भूखंडों पर विशेष प्रावधान
- कानून से कार्यान्वयन तक: राष्ट्रीय सभा के निर्णय से प्रशासन में नई सुव्यवस्था
- सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने बताया: अदालतें राष्ट्र की 'अदृश्य रीढ़'
- सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालतों के बकाया मामलों को देखते हुए अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का आदेश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद रजिस्ट्रार से जांच का निर्देश, न्यायिक अधिकारी पर रिपोर्ट न देने की चेतावनी
- न्यायिक सेवा आयु में बड़ा बदलाव: 60 साल से बढ़ाकर 62 साल, मध्यप्रदेश सहित सात राज्यों में लागू
- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से न्यायिक अधिकारी पर जांच शुरू करने का निर्देश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी होर्डिंग विवाद में हाईकोर्ट को फैसला देने का निर्देश, सुनवाई से मना किया

