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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया आदेश, साइबर ठगी को रोकने के लिए 4 हफ्ते में बनाए नियम

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे शिकायत निवारण और मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल को तेजी से अपनाएं और लागू करें।

5 अगस्त 2026 को 12:16 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया आदेश, साइबर ठगी को रोकने के लिए 4 हफ्ते में बनाए नियम

सौजन्य से:- Hindustan

साइबर ठगी को रोकने के लिए 4 हफ्ते में बनाए नियम, सुप्रीम कोर्ट का सरकार को आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे इस तरह धोखाधड़ी के पीड़ितों की राहत के लिए बनाए गए मॉड्यूल को तेजी से अपनाएं और लागू करें। एसओपी बनाने का भी निर्देश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक को साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले फर्जी अकाउंट्स से निपटने के लिए 4 सप्ताह के भीतर मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी बनाने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने साइबर अपराध को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इससे निपटने के तरीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने, तेजी से लागू करने और लगातार फॉलो-अप करने की जरूरत है। देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई को सख्त करने के मकसद से केंद्र सरकार, सभी राज्यों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी कई निर्देश जारी किए हैं। पीठ ने आदेश दिया है कि वे धोखाधड़ी के पीड़ितों के लिए बनाए गए शिकायत निवारण और मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल को तेजी से अपनाया जाना चाहिए।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश संयुक्त रिपोर्ट और अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि हालांकि इस पर अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन जो तरीके पहले से लागू किए गए हैं, उन्हें बड़े पैमाने पर अपनाने, तेजी से लागू करने और लगातार फॉलो-अप करने की जरूरत है।

पीठ ने अंतरिम निर्देश जारी करते हुए कहा कि आरबीआई 4 सप्ताह के भीतर म्यूल अकाउंट्स, मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधि और साइबर आधारित धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों से निपटने के लिए एक एसओपी तैयार करे और उसे जारी करे। पीठ ने एसओपी की एक कॉपी सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी मुहैया कराने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी निर्देश दिया कि वे सभी अदालतों और अधिकारियों को शिकायत निवारण तंत्र के बारे में जानकारी दें ताकि वे साइबर धोखाधड़ी में शामिल बैंक खातों को फ्रीज करने से जुड़े मामलों को देख सकें।

SC ने मांगा डेटा

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि पीड़ित व्यक्ति को आम तौर पर सबसे पहले इस तंत्र का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। हालांकि, ऐसा करने से कानून में उपलब्ध किसी भी संवैधानिक, वैधानिक या अन्य कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने में कोई रुकावट नहीं आएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपनी अगली रिपोर्ट में दर्ज और निपटाई गई शिकायतों का ‘राज्य-वार और बैंक-वार डेटा’ भी शामिल करें। साथ ही जारी किए गए बहाली आदेशों और पीड़ितों को लौटाई गई रकम का ब्योरा भी दें।

जागरुकता अभियान शुरू करने पर जोर

राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्रों और ई-जोरो एफआईआर के रजिस्ट्रेशन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब तक सिर्फ 18 राज्यों ने ऐसे केंद्र स्थापित किए हैं। पीठ ने बाकी राज्यों से कहा कि वे चार सप्ताह के भीतर राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र स्थापित करने और ई-जीरो एफआईआर शुरू करने के लिए अधिसूचना जारी करें। शीर्ष अदालत ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के साथ सलाह-मशविरा करके ई-जीरो एफआईआर सिस्टम को अपनाने के लिए कदम उठाने को भी कहा। पीठ ने डिजिटल गिरफ्तारी के जरिए ठगी रोकने, जागरूकता, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी से गई रकम की रिकवरी के लिए उपलब्ध मदद के बारे में जन-जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया।

लेखक के बारे में

Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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