सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के बहुत बड़े कारण! जानें पूरी बात
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक बिल पेश किया है, जिससे सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के लिए लोकसभा में बिल पेश कर दिया है। इस बिल के पेश होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से याचिकाओं पर सुनवाई की गुणवत्ता सुधरेगी।
नई दिल्ली: भारत सरकार ने बढ़ते हुए लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने और लोगों को त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के लिए जा रही है। इस संबंध में संसद में विधेयक भी पेश किया जा चुका है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष के हंगामे के बीच इस बिल को पेश किया था। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के कई प्रमुख कारण हैं जिसके बारे में आज हम आपलोगों को विस्तार से बताने जा रहे हैं।
संवैधानिक पीठों के गठन में कमी होगी पूरी
जजों की सीमित संख्या के कारण, कोर्ट को अक्सर रोजमर्रा की अपीलों और संविधान से जुड़े अहम मामलों के बीच संतुलन बनाने में मुश्किल होती है, जिससे मामलों की सुनवाई में लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस विस्तार का मकसद सुप्रीम कोर्ट को एक साथ ज्यादा बेंच बनाने, मामलों का तेजी से निपटारा करने और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर फैसला करने वाली संविधान पीठों को ज्यादा समय देने में सक्षम बनाना है।
कानून बनने के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सहित अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल स्वीकृत क्षमता 38 हो जाएगी। इससे पहले जजों की कुल संख्या 34 थी, जिसमें 33 अन्य जज और 1 मुख्य न्यायाधीश शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट में 94000 लंबित मामले
जून 2026 तक, खबरों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में 94,000 से ज्यादा मामले पेंडिंग थे। साल की शुरुआत के मुकाबले इनमें लगभग 1,500 मामलों की बढ़ोतरी हुई है। इन पेंडिंग मामलों में स्पेशल लीव पिटीश, संवैधानिक मामले, सिविल और क्रिमिनल अपील, और मौलिक अधिकारों, चुनावों व केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े विवाद शामिल हैं। अब इन मामलों के जल्दी से निपटारा के लिए जजों की संख्या बढ़ानी जरूरी है।
समय पर न्याय मिले
त्वरित सुनवाई और फैसलों से नागरिकों के समय और धन की बचत होती है, तथा उन्हें समय पर न्याय मिल पाता है, जिससे न्यायपालिका में आम लोगों का विश्वास और मजबूत होता है।
जजों पर काम का बोझ कम होगा, न्याय देने में गलतियां कम होगी
यह कदम देश की सबसे बड़ी अदालत पर बढ़ते दबाव और लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उठाया गया है; यह अदालत दुनिया में सबसे ज्यादा मामलों का बोझ उठाने वाली अदालतों में से एक है। ऐसे में दबाव में कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
सरकार का क्या मानना है?
सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता बेहतर होगी, क्योंकि इससे एक साथ ज्यादा मामलों की सुनवाई हो सकेगी। कोर्ट नियमित न्यायिक कामकाज में रुकावट डाले बिना और ज़्यादा 'संविधान बेंच' बना सकेगा। मौलिक अधिकारों, कमर्शियल विवादों, आपराधिक अपीलों और अंतर-राज्यीय मामलों में समय पर न्याय मिलने की सुविधा बेहतर होगी।
लेखक के बारे मेंसंजीव कुमारसंजीव कुमार (सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर)
संजीव कुमार वर्तमान में नवभारत टाइम्स में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वे मई 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। पत्रकारिता में ऑनलाइन न्यूज डेस्क पर उन्हें काम करने का 6 साल का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह अमर उजाला, वन इंडिया हिंदी और दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में सेवा दे चुके हैं। वह वर्तमान में नवभारत टाइम्स में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्रोतों की जांच के साथ तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करते हैं।
विशेषज्ञता
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मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले संजीव कुमार ने वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से बैचेलर इन मीडिया साइंस में स्नातक किया। फिर आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी से मास्टर इन मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट की भी डिग्री ली। इसके अलावा उन्होंने मीडिया से संबंधित कई ऑनलाइन कोर्स भी किए हैं।... और पढ़ें
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